- ईरान, इजरायल के युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं
- भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग पचासी प्रतिशत और एलपीजी की साठ प्रतिशत जरूरतें विदेशी आयात पर निर्भर करता है
- संसदीय समिति ने पेट्रोलियम मंत्रालय को देश में 90 दिनों के कच्चे तेल का भंडारण तैयार करने की सिफारिश की
ईरान‑इजरायल के बीच जारी जंग का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखने लगा है. पिछले 18 दिनों से चल रहे युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और नेचुरल गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल 40 देशों से आयात करता है, जबकि घरेलू जरूरत का लगभग 60 फीसदी एलपीजी भी विदेशों से मंगाया जाता है.
रणनीतिक तेल भंडारण की बढ़ी अहमियत
ऐसे में भविष्य की अनिश्चितताओं और चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए ऑयल और नेचुरल गैस का स्ट्रेटेजिक रिजर्व भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है. इसी को लेकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने अहम सिफारिशें की हैं. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने मंगलवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पेट्रोलियम मंत्रालय को देश में 90 दिनों के कच्चे तेल का भंडारण (Strategic Reserve) तैयार करना चाहिए. यह सिफारिश मंत्रालय के अनुदान की मांग (Demand for Grants) 2026‑27 पर पेश रिपोर्ट में की गई है.
ये भी पढ़ें : क्रूड ऑयल सुनकर पेट्रोल-डीजल समझे क्या? देख लीजिए इससे बनने वाली चीजों की पूरी लिस्ट
वैश्विक ऊर्जा संकट का हवाला
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “वर्तमान भू‑राजनीतिक परिस्थितियों से उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए, समिति ने मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह देश में 90 दिनों के कच्चे तेल के भंडारण के वैश्विक मानक को प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करे.” इसके साथ ही संसदीय समिति ने मंत्रालय और तेल कंपनियों से कहा है कि वे देशभर में उन स्थानों पर अधिक भंडार (caverns) बनाने की संभावना तलाशें, जहां भूवैज्ञानिक परिस्थितियां देश की समग्र ऊर्जा सुरक्षा के लिए अनुकूल हों.
ये भी पढ़ें ; LPG Shortage: रसोई गैस सिलेंडर की दिक्कत दूर! सरकार ने उठाए ये 10 बड़े कदम, बुकिंग से सप्लाई तक सुधरे हालात
PNG कनेक्शन बढ़ाने की भी सिफारिश
संसदीय समिति ने देश में पीएनजी (PNG) कनेक्शन बढ़ाने की भी वकालत की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि वर्ष 2034 तक पीएनजी कनेक्शनों का लक्ष्य 12 करोड़ से अधिक है और वर्तमान में पीएनजी कनेक्शनों की संख्या काफी कम है, इसलिए समिति ने राय दी है कि मंत्रालय सीजीडी (शहरी गैस वितरण) नेटवर्क के रूप में पीएनजी कनेक्शनों के विस्तार को प्राथमिकता देने की संभावना तलाश सकता है.
उज्ज्वला योजना के तहत रिफिल में गिरावट पर चिंता
समिति ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को मिले एलपीजी कनेक्शनों में एलपीजी सिलेंडर रिफिल की संख्या में गिरावट पर भी चिंता जताई है. समिति ने सुझाव दिया है कि मंत्रालय को सबसे कम रिफिल दर वाले क्षेत्रों को औसत से अधिक सब्सिडी राशि देने पर विचार करना चाहिए.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं