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राम मंदिर चढ़ावा चोरी का डैमेज कंट्रोल करेगा RSS, जमीन पर उतरने की तैयारी; जनता के सवालों के देगा जवाब

संघ के एक पदाधिकारी ने कहा कि 4 जून से लेकर 7 जून की अवधि में ट्रस्ट के सदस्यों को एफ़आईआर दर्ज कराना चाहिए था.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का डैमेज कंट्रोल करेगा RSS, जमीन पर उतरने की तैयारी; जनता के सवालों के देगा जवाब
नई दिल्ली:

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चल रहे विवाद के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब भ्रांतियां दूर करने के लिए संवाद से समाधान निकालने की कोशिश के जुटा है. संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी समाज के अलग-अलग वर्गों से मिलकर पूरे मामले की जानकारी देकर 'डैमेज कंट्रोल' करने का प्रयास कर रहे हैं. संघ का मानना है कि अयोध्या में जो हुआ वो कहीं से भी उचित करार नहीं दिया जा सकता. हालांकि चोरी बैंक के कर्मचारियों ने की लेकिन सवाल संघ और विहिप पर उठ गए. सोमवार को लखनऊ में मीडिया के कुछ प्रतिनिधियों से संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी ने अनौपचारिक मुलाकात की. 

इस अनौपचारिक मुलाकात में राम मंदिर से लेकर जेन-ज़ी के आंदोलन जैसे मुद्दों पर खुलकर बात हुई. राम मंदिर को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी ने माना कि गलती हुई है. उन्होंने कहा कि कुल छह लोगों ने चोरी की और दो ज़िम्मेदार लोग उस षड्यंत्र में शामिल रहे. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी ने माना कि संवाद की कमी भी इस मामले के तूल पकड़ने की बड़ी वजह रही. इसके साथ ही घटना की जानकारी होने पर तत्काल एफआईआर ना कराना भी बड़ी भूल थी. अगर घटना की जानकारी मिलते ही मुक़दमा दर्ज करा दिया जाता तो शायद ये विवाद इतना आगे नहीं बढ़ता, जितना बढ़ गया. 

उन्होंने माना कि 4 जून से लेकर 7 जून की अवधि में ट्रस्ट के सदस्यों को एफ़आईआर दर्ज कराना चाहिए था. चढ़ावा चोरी की घटना को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केंद्रीय स्तर के बड़े पदाधिकारी ने कहा कि ट्रस्ट के सदस्यों ने मंदिर निर्माण और मंदिर के कामकाज से जुड़े कामों में पूरी पारदर्शिता रखने की कोशिश की. लेकिन जिस बैंक के साथ ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने करार किया था, उस बैंक के साथ क़रार करने वाली एजेंसी के कर्मचारियों ने गड़बड़ी की. हालांकि ये सिफारिशी कर्मचारी ट्रस्ट के लोगों के क़रीबी थे. इसलिए नैतिक ज़िम्मेदारी उनकी बनती ही है.

राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की ट्रस्ट में वापसी को लेकर संघ के पदाधिकारी ने कहा कि अभी इस पर कुछ कह पाना संभव नहीं है. हालांकि चंपत राय के कामों को लेकर उन्होंने कहा कि चंपत राय पैसे कमाने जैसा काम नहीं कर सकते. वो तो कई बार पैसे बचाने के चक्कर में लगे दिखाई देते थे. हालांकि रोज़मर्रा के कामकाज वो देख रहे थे, इसलिए नैतिक आधार पर उन पर ज़िम्मेदारी डाल दी गई. अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल पर संघ के पदाधिकारी ने कुछ ख़ास नहीं कहा.

जनसंपर्क से जनता में व्याप्त चिंताओं को दूर करना चाहता है संघ

लखनऊ में हुई इस बैठक में पत्रकारों ने सवाल किया कि क्या इस घटना से श्रद्धालुओं की आस्था में भी कमी आ सकती है, इस पर उन्होंने कहा कि संवाद ही समाधान है. संघ के लोग जन संपर्क के ज़रिए स्थिति स्पष्ट करने का काम करेंगे. संघ के लोग संवाद स्थापित करके भ्रम की स्थिति को दूर करने के काम में लगेंगे. उन्होंने कहा कि राम मंदिर में रोज़ाना 70 से 90 हज़ार के करीब श्रद्धालु आते हैं. ऐसे में लोगों में चिंता ज़रूर दिखाई दी, लेकिन आस्था में कोई कमी नहीं आई और ना आएगी.

ऑडिट की व्यवस्था दुरुस्त, फिर कहां से लग गई राम मंदिर के पैसों में सेंध

संघ के पदाधिकारी ने कहा कि मंदिर का प्रबंधन सही तरीके से चले, इसके लिए 22 अलग-अलग बैंक अकाउंट खुलवाए गए. इनसे अलग-अलग मदों में व्यय किए जाते हैं. इसके अलावा दान के पैसों को जमा कराने, ऑनलाइन चंदा लेने और एफडी के लिए अलग-अलग तीन बैंकों के अकाउंट खुलवाए गए. मंदिर निर्माण का काम प्रतिष्ठित एल एंड टी कंपनी को दिया गया. ऑडिट के काम में भी बड़ी फर्म को लगाया गया. उन्होंने माना कि सिर्फ निगरानी में कमी और बैंक में रखवाए गए कर्मचारियों की हरकतों ने सारे अच्छे कामों के बावजूद बदनाम कर दिया. 

'राम मंदिर बनते ही आने लगे श्रद्धालु, बन नहीं पाई व्यवस्था'

राम मंदिर में चढ़ावे में गड़बड़ी के सवाल पर उन्होंने कहा कि तिरुपति और माता वैष्णो देवी मंदिर जैसे मंदिरों में व्यवस्था पुरानी चली आ रही थी. राम मंदिर नया बना और जब तक व्यवस्था बन पाती, तब तक उम्मीद से कहीं बढ़कर श्रद्धालु दर्शन के लिए आने लगे. प्राण प्रतिष्ठा के बाद अभी मंदिर प्रबंधन ने पैसों और दान की वस्तुओं की कोई व्यवस्था नहीं बनाई थी, लेकिन बहुत सारा दान आने लगा. ऐसे में बैंक के लॉकर के दान की वस्तुओं को रखने के तमाम उपाय किए गए. फिलहाल इस पूरे विवाद पर संघ का मानना है कि जो हुआ, वो नहीं होना चाहिए था. लेकिन अब जो हो गया, वो दोबारा ना हो, इसकी पुख़्ता व्यवस्था करनी होगी.

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