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कांग्रेस की महिला सांसदों के पत्र के जवाब में अब आया बीजेपी की महिला सांसदों का पत्र, कड़ी कार्रवाई की मांग

संसद में अब चिट्ठी बनाम चिट्ठी की लड़ाई शुरू हो गई है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस की महिला सांसदों की चिट्ठी के जवाब में बीजेपी की भी महिला सांसदों ने चिट्ठी लिखी है.

कांग्रेस की महिला सांसदों के पत्र के जवाब में अब आया बीजेपी की महिला सांसदों का पत्र, कड़ी कार्रवाई की मांग
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के पक्ष में बीजेपी महिला सांसदों की चिट्ठी
  • बीजेपी की 11 महिला सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को लिखी है चिट्ठी
  • चिट्ठी में विपक्ष की महिला सांसदों पर निशाना साधा गया है, कार्रवाई की भी मांग
  • कुछ दिन पहले कांग्रेस की महिला सांसदों ने भी चिट्ठी लिखी थी
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नई दिल्ली:

बीजेपी की महिला सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिख कर विपक्षी महिला सांसदों के रवैये पर गंभीर आपत्ति की है। 11 सांसदों ने साझा पत्र लिख कर ओम बिरला पर पूरा विश्वास भी व्यक्त किया है. यह पत्र ऐसे समय लिखा गया है जब कांग्रेस समेत कुछ विपक्षी सांसद बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे हैं. यह पत्र  4 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान हुई घटनाओं के संदर्भ में लिखा गया है.

घटना को बताया खेदजनक 

पत्र में सांसदों ने अध्यक्ष की भूमिका की सराहना करते हुए कहा है कि उन्होंने उस दिन “लोकसभा की गरिमा, मर्यादा और पवित्रता” को बनाए रखने के लिए धैर्य और दृढ़ता का परिचय दिया. सांसदों के अनुसार, उस दिन सदन के भीतर ऐसी घटनाएं हुईं जिन्हें उन्होंने “दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक” बताया.

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विपक्ष की महिला सांसदों पर निशाना 

पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ विपक्षी सदस्यों ने न केवल सदन के ‘वेल' में आकर नारेबाजी की, बल्कि टेबलों पर चढ़ गए, कागज फाड़े और उन्हें अध्यक्ष की ओर उछाला. साथ ही यह भी कहा गया है कि कुछ महिला सांसद हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर आगे बढ़ीं और प्रधानमंत्री की सीट के आसपास तक पहुंच गईं, यहां तक कि ट्रेजरी बेंच की ओर भी गईं, जहां वरिष्ठ मंत्री बैठे थे.

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लोकतंत्र का काला क्षण 

सांसदों ने लिखा है कि इन घटनाओं से वे “उत्तेजित और आक्रोशित” थे, लेकिन अपने वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर उन्होंने संयम बनाए रखा और किसी तरह की जवाबी कार्रवाई नहीं की. उनका कहना है कि यदि संयम नहीं बरता जाता तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी. पत्र में यह भी उल्लेख है कि बाद में कुछ विपक्षी सांसद अध्यक्ष के कक्ष की ओर भी गए और वहां से तेज आवाजें सुनी गईं. पत्र में कहा गया है कि लोकसभा के “पवित्र परिसर” में घटनाओं के इस खतरनाक मोड़ ने सभी को चिंतित किया है और इसके गंभीर और अप्रिय परिणाम हो सकते थे. इसे संसदीय लोकतंत्र के इतिहास के “सबसे काले क्षणों में से एक” बताया गया है.

विपक्षी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग 

सांसदों ने अध्यक्ष से आग्रह किया है कि नियमों के तहत उन विपक्षी सांसदों के खिलाफ “कड़ी से कड़ी कार्रवाई” की जाए, जिन्होंने कथित रूप से सदन के भीतर अनुशासनहीन और आपत्तिजनक व्यवहार किया तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की छवि को नुकसान पहुंचाया.

अध्यक्ष की तारीफ 

पत्र के अंत में सांसदों ने अध्यक्ष के अब तक के कार्यकाल की भी सराहना की है. उन्होंने लिखा है कि पीठासीन अधिकारी के रूप में अध्यक्ष ने लगभग सात वर्षों में सदन की प्रतिष्ठा और प्रभावशीलता बढ़ाने का प्रयास किया है तथा सदस्यों को दलगत भेदभाव से ऊपर उठकर समान अवसर दिए हैं. सांसदों ने अध्यक्ष के नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए कहा कि लोकसभा उनके मार्गदर्शन में भाग्यशाली है.
 

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