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यूपी सरकार की इस चिट्ठी पर ध्यान देती नोएडा अथॉरिटी तो इंजीनियर युवराज की जान बच जाती 

Noida News: सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला गरमा गया है. नोएडा के सीईओ एम. लोकेश कुमार को हटाकर प्रतीक्षारत सूची में डाल दिया गया है. इस हादसे की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई है.

software engineer Yuvraj Mehta
नोएडा:

उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही की जांच के बीच नोएडा अथॉरिटी को लिखी सिंचाई विभाग की एक चिट्ठी सामने आई है. अगर सिंचाई विभाग की उस सलाह पर अमल हो गया होता तो शायद युवराज की जान नहीं जाती. सिंचाई विभाग ने नोएडा सेक्टर 150 के इस इलाके में 2023 में अतिरिक्त जल निकासी की आवश्यकता बताई थी, लेकिन परियोजना पर काम आगे नहीं बढ़ाया गया.

हेड रेगुलेटर का निर्माण नहीं किया गया

उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने नोएडा प्राधिकरण को पत्र लिखकर सेक्टर 150 नोएडा में जमा हुए बारिश के पानी को निकालने के लिए हेड रेगुलेटर के निर्माण की आवश्यकता जताई थी. यहीं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार पानी से भरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी. विरोध प्रदर्शन करने वाले स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रस्तावित हेड रेगुलेटर का निर्माण होने पर इस त्रासदी को टाला जा सकता था, क्योंकि जमा हुआ पानी घटनास्थल पर जमा होने के बजाय बह जाता.

नाले या नहर में गाद जमा होने से रोकना था

हेड रेगुलेटर से जल प्रवाह को काबू किया जाता है. इससे नाले या नहर में अतिरिक्त गाद जमा होने से रोका जा सकता है. सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें सिंचाई विभाग के उस पत्र की जानकारी नहीं है, जो पीटीआई के पास है. 27 साल के युवराज मेहता की शनिवार तड़के उस समय मौत हो गई थी, जब घने कोहरे में उनकी कार फिसल गई. नाले की सीमा को तोड़कर सेक्टर 150 में एक नाले के पास निर्माणाधीन व्यावसायिक परिसर के तहखाने के लिए खोदे गए गहरे, जलभराव वाले गड्ढे में गिर गई.

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दो बिल्डरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज

नोएडा पुलिस ने दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. यूपी सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है. इंजीनियर के पिता राज कुमार मेहता ने स्थानीय अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है. उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा 2023 में जारी एक आधिकारिक सूचना के अनुसार, अधिकारियों ने नोएडा प्राधिकरण को सेक्टर 150 में हेड रेगुलेटर लगाने की आवश्यकता के बारे में औपचारिक रूप से सूचित किया था ताकि अतिरिक्त बारिश के पानी और जल निकासी को हिंडन नदी में प्रवाहित करके उसका निपटान किया जा सके.

बजट के बावजूद काम नहीं 

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि प्रस्तावित कार्य के लिए बजट का प्रावधान किया गया था, लेकिन परियोजना कभी शुरू नहीं हुई. अधिकारियों ने बताया कि निर्माणाधीन बिल्डिंग के जिस तहखाने में मेहता की कार गिरी थी, वहां बारिश के साथ-साथ आसपास की आवासीय सोसाइटियों से जुड़े नालों से लगातार पानी निकलने के कारण भी पानी जमा हो गया था. हिंडन नदी में अतिरिक्त पानी छोड़ने पर प्रतिबंध के कारण उस स्थान पर जलस्तर समय के साथ बढ़ता रहा.

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अब नींद से जागा नोएडा प्रशासन

नोएडा प्रशासन ने शनिवार और रविवार को विरोध प्रदर्शन के बाद निर्माण स्थल पर बैरिकेड लगा दिए हैं. सेक्टर 150 के निवासियों का आरोप है कि निर्माण स्थल के आसपास उचित जल निकासी व्यवस्था और सुरक्षा उपायों की कमी के कारण ही यह दुर्घटना हुई. उन्होंने दावा किया कि जलभराव और नाले के पास बैरिकेड न होने के बारे में अधिकारियों से बार-बार शिकायतें की गई थीं.

50 फीट गहरा गड्ढा, झील में बदला इलाका

पुलिस ने इस मामले में दो रियल एस्टेट डेवलपर्स मेसर्स विशटाउन प्लानर्स और लोटस ग्रीन्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. यह एफआईआर तकनीशियन के पिता द्वारा नॉलेज पार्क पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है. शिकायत में उन्होंने कहा कि साइट पर लगभग 50 फीट गहरा गड्ढा खोदा गया था और यह एक झील या तालाब में बदल गया है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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