- योगी सरकार ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के बाद न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन किया है.
- श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि विवाद को खत्म करने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई थी.
- 3 श्रेणियों में बांटकर अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई है.
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. योगी सरकार ने न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन का निर्णय लिया और राज्यपाल की मंजूरी के बाद नयी दरें को लागू भी कर दिया गया है. राज्यपाल की मुहर लगने के साथ ही अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसके बाद नई न्यूनतम मजदूरी दरें कानूनी रूप से प्रभावी हो गई हैं.
समिति ने अपनी सिफारिशों के बाद लिया गया फैसला
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कामगारों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर जारी गतिरोध को खत्म करने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी. समिति ने अपनी सिफारिशों में मजदूरी दरों को तीन श्रेणियों में विभाजित करने का प्रस्ताव दिया, जिसे सरकार ने अंतरिम राहत के रूप में स्वीकार करते हुए लागू कर दिया.

सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, ‘‘प्रदेश को तीन श्रेणियों में बांटा गया है. प्रथम श्रेणी में गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद को शामिल किया गया है, जहां जीवन-यापन की लागत अपेक्षाकृत अधिक है. यहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये मासिक न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई है.''
कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय
इसमें कहा गया, ‘‘द्वितीय श्रेणी में नगर निगम वाले अन्य जिलों को रखा गया है. यहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय किए गए हैं.'' बयान में कहा गया, ‘‘तृतीय श्रेणी में शेष जिलों को शामिल किया गया है, जहां अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल श्रमिकों के लिए क्रमशः 12,356 रुपये, 13,590 रुपये और 15,224 रुपये मासिक न्यूनतम मजदूरी निर्धारित की गई है.''
इसमें कहा गया कि इन सभी दरों में मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (वीडीए) शामिल है. दरअसल, 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन लागू नहीं हो पाए थे, जिससे वेतन में अंतर बढ़ता गया. अब उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर लंबित पुनरीक्षण को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है.
सरकार का कहना है कि यह निर्णय श्रमिकों को राहत देने के साथ-साथ औद्योगिक शांति बनाए रखने और उत्पादन चक्र को सुचारु रखने के लिए भी आवश्यक है. यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया जब श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच वेतन वृद्धि को लेकर गतिरोध की स्थिति बन गई थी और औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित होने लगी थीं.
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