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50 साल का हो गया नोएडा, कभी छोटे कारखाने थे, आज 12 लाख मजदूर, 15 हजार फैक्ट्रियों के साथ कैसे बना यूपी का पावरहाउस

Noida Foundation Day: नोएडा की स्थापना के 50 साल पूरे हो रहे हैं. कभी ऊबड़ खाबड़ जमीन वाला ये इलाका आज यूपी ही नहीं देश के सबसे चमकते सितारों में से एक है. आईटी हब के साथ ये बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के तौर पर विकसित हो रहा है.

50 साल का हो गया नोएडा, कभी छोटे कारखाने थे, आज 12 लाख मजदूर, 15 हजार फैक्ट्रियों के साथ कैसे बना यूपी का पावरहाउस
Noida Foundation Day
नोएडा:

Noida Foundation Day: मजदूरों के विरोध प्रदर्शन को लेकर नोएडा सुर्खियों में है. दिल्ली में बढ़ते दबाव के बाद राजधानी के नजदीक न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (Noida) की 50 साल पहले बुनियाद रखी गई थी और आज ये न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के बड़े पावरहाउस में से एक बन चुका है. यूपी को 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने में बड़ा दारोमदार नोएडा पर है.  नोएडा की स्थापना 17 अप्रैल 1976 को विशेष औद्योगिक क्षेत्र के तौर पर हुई थी और दो दिन बाद वो अपनी गोल्डन जुबली मना रहा होगा. उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 के तहत नोएडा (New Okhla Industrial Development Authority) का खाका खींचा गया. 

नोएडा की स्थापना का इतिहास

दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया को बढ़ाते हुए यमुना किनारे इस जमीन को औद्योगिक विकास के लिए चुना गया. तब यहां छोटे गांव और ऊबड़-खाबड़ कृषि भूमि हुआ करती थी.1976 से 1980 के बीच चार सालों में सेक्टर 1 से लेकर सेक्टर 11 तक विकास हुआ, ताकि छोटे उद्योगों के साथ रोजगार के अवसर पैदा किया जा सकें. 1990 में आर्थिक उदारीकरण के बाद नोएडा तेजी से उभरा. यहां सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (STPI) बनाया गया और ये एक आईटी हब बना. 

नोएडा का क्षेत्रफल कितना है

नोएडा में नगर निगम चुनाव नहीं होते और पूरा कामकाज नोएडा अथॉरिटी देखती है.नोएडा मूल तौर पर गाजियाबाद और बुलंदशहर का हिस्सा था और 1997 में अलग कर गौतम बुद्ध नगर जिला बनाया गया. नोएडा का क्षेत्रफल लगभग 20 हजार हेक्टेयर में फैला है, जिसमें 80 से अधिक गांव और सैकड़ों सेक्टर शामिल हैं.

नोएडा में रियल एस्टेट बूम

नोएडा में कनेक्टिविटी और रियल एस्टेट की दिशा में बड़ा कदम 21वीं सदी आने के साथ शुरू हुआ. वर्ष 2001 में DND फ्लाईओवर खुलने से दिल्ली से नोएडा की दूरी सिर्फ 10 मिनट हो गई.नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे ने भी आर्थिक तरक्की के नए रास्ते खोले और बड़ी आवासीय परियोजना का आगाज हुआ. 2009 में दिल्ली मेट्रो उद्घाटन से नोएडा दिल्ली की तरह ग्लोबल सिटी बनने की राह में कुलांचे भरने लगी. 

नोएडा आईटी हब और इलेक्ट्रॉनिक्स सेंटर

वर्ष 2010 से नोएडा ने भारी उद्योगों और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में बड़ा निवेश किया है. पीएम मोदी ने नोएडा के सेक्टर 81 में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री का उद्घाटन किया. जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की घोषणा से ये नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा. नोएडा में भारत का सबसे बड़े डेटा सेंटर पार्क और ग्रेटर नोएडा में पहली इंटरनेशनल फिल्म सिटी बन रही है. जापानी सिटी और सिंगापुर सिटी भी बन रही है. नोएडा मोबाइल और इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफैक्चरिंग का भी बड़ा हब बन चुका है.पिछले एक दशक में मेक इन इंडिया नीति के तहत सैमसंग, वीवो और ओप्पो जैसी कंपनियों ने यहां दुनिया की सबसे बड़ी यूनिट लगाईं.

यूपी की जीडीपी में नोएडा का योगदान

इन्वेस्ट यूपी और निवेश मित्र पोर्टल के अनुसार, उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में नोएडा धुरी की भूमिका निभा रहा है. उत्तर प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, अकेले गौतम बुद्ध नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) जिला यूपी की जीडीपी में 10 से 11% का योगदान देता है.नोएडा की प्रति व्यक्ति आय यूपी के औसत से कई गुना अधिक है. यह जिला राज्य में इस सूची में सबसे ऊपर रहता है.

यूपी की कमाई में 25 फीसदी हिस्सा

यूपी बजट के अनुसार, उत्तर प्रदेश की कुल राजस्व यानी कमाई और निवेश का करीब 25 फीसदी हिस्सा यहां से आता है.भारत से होने वाले कुल मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात का करीब 40 फीसदी का योगदान उसका है. नोएडा की प्रति व्यक्ति आय औसतन 84 हजार रुपये के आसपास है. जबकि महीने के हिसाब से उत्तर प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 8 से 9 हजार रुपये के बीच है.

नोएडा में विरोध प्रदर्शन

नोएडा में न्यूनतम मजदूरी, पीएफ-पेंशन और ओवरटाइम जैसी सुविधाओं को लेकर हजारों मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन किया है. लेबर कोड लागू होने के बाद नोएडा में भी श्रमिक की स्थिति में बड़ा बदलाव आने की संभावना है. सरकार बाहर से आने वाले कर्मचारियों और कामगारों के लिए लेबर हॉस्टल और आवासीय क्लस्टर बनाने पर काम कर रही है. 

नोएडा में कहां कितनी इंडस्ट्री

नोएडा में कारखानों को सूक्ष्म, लघु और मध्यम (MSME) और भारी उद्योग में बांटा जा सकता है. नोएडा के विभिन्न सेक्टरों जैसे सेक्टर 1 से 11, 57 से 68, 80 से 88 और फेज-2 में लगभग 12 से 15 हजार छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं. यहां सबसे ज्यादा फैक्ट्रियां कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स (मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग), आईटी और ऑटोमोबाइल पार्ट्स से जुड़ी हैं.नोएडा के सेक्टर-81 में दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री है.

नोएडा में कितने मजदूर

नोएडा के इंडस्ट्रियल एरिया में लगभग 10 लाख से 12 लाख कामगार काम करते हैं. अगर सर्विस सेक्टर (IT) और असंगठित क्षेत्र को जोड़ा जाए तो संख्या 15 लाख के पार जाती है. गारमेंट और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में महिला कामगारों की हिस्सेदारी करीब 30 से 40% है.
 

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