- दिल्ली HC ने उन्नाव रेप पीड़ित के पिता की हिरासत में मौत मामले में कुलदीप सेंगर को राहत देने से इनकार किया
- पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर को सुनाए गए दस साल के निलंबन आदेश को अदालत ने खारिज कर दिया
- अदालत ने कुलदीप सेंगर के खिलाफ चल रहे केस में राहत का दावा स्वीकार नहीं किया है
उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की मौत के मामले में कुलदीप सेंगर को अदालत से राहत नहीं मिली. दिल्ली हाई कोर्ट ने रेप पीड़ित के पिता की हिरासत में हुई मौत मामले में पूर्व बीजेपी विधायक को सुनाई गई 10 साल को निलंबित करने से इनकार किया है. अदालत ने कहा कि राहत देने का कोई आधार नहीं है और मामला गंभीर अपराध से जुड़ा है. सेंगर 2018 से इस मामले में जेल में है और इसके अलावा वह बलात्कार मामले में उम्रकैद की सजा भी काट रहा है.
इससे पहले बलात्कार के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाये सेंगर की सजा को हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा निलंबित किये जाने के बाद इस पर खासा विवाद हुआ था. बलात्कार पीड़िता ने इसके विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया था. इसी प्रदर्शन के दौरान कुछ लोग हाथों में तख्ती लेकर सेंगर के समर्थन में भी उतर आये थे.
इसके बाद इस मामले में CBI ने 'केंद्रीय जांच ब्यूरो बनाम कुलदीप सिंह सेंगर' मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा आरोपी की सजा निलंबित करने और उसे जमानत देने के आदेश को चुनौती देते हुए 26 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की थी. सेंगर की रिहाई पर रोक का फैसला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सजा के निलंबन के आदेश जारी होने के बाद आमतौर पर उनमें हस्तक्षेप नहीं किया जाता है, लेकिन कोर्ट ने यहां एक विशेष स्थिति पर गौर किया है, क्योंकि दोषी (कुलदीप सेंगर) एक अन्य मामले में अभी भी जेल में है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर उन्नाव रेप पीड़िता ने कहा, मैं इस फैसले से बहुत खुश हूं. मुझे उच्चतम न्यायालय से न्याय मिला है. मैं शुरू से ही न्याय के लिए आवाज उठाती रही हूं. मैं किसी भी अदालत के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाती. मुझे सभी अदालतों पर भरोसा है, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने मुझे न्याय दिया है और ऐसा करना जारी रखेगा."
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