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This Article is From Oct 02, 2025

नितिन गडकरी ने NDTV के 'बनेगा स्वस्थ इंडिया' मुहिम में दिया ग्रीन और आत्मनिर्भर भारत का मंत्र

पर्यावरण अगर अच्छा होगा तो इंसान स्वस्थ रहेगा. पर्यावरण खराब होने का मतलब है कि हेल्थ खराब होगी ही. पर्यावरण को बिगाड़ने में परिवहन सेक्टर का भी योगदान माना जाता है. भारत इस बारे में क्या सोच रहा है केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया...

  • केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रिन्यूएबल एनर्जी को स्वस्थ भारत के लिए आवश्यक और रोजगार सृजन का माध्यम बताया.
  • भारत में फॉसिल फ्यूल का भारी आयात होता है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.
  • आत्मनिर्भर भारत के लिए प्रदूषणमुक्त, लागत प्रभावी और स्वदेशी तकनीकों पर जोर देना आवश्यक बताया गया.

NDTV के 'बनेगा स्वस्थ इंडिया' मुहिम में कई मेहमान जुड़े और भारत को स्वस्थ रखने के उपाय बताए. एनडीटीवी के सीईओ और एडिटर इन चीफ राहुल कंवल ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से इस मौके पर एक्सक्लूसिव बात की और रिन्यूएबल एनर्जी के संबंध में भारत के अब तक किए काम और आगे के विजन के बारे में जानना चाहा. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि रिन्यूएबल एनर्जी के जरिए स्वस्थ भारत बिल्कुल संभव है.

इलेक्ट्रिक पर नितिन गडकरी का जोर

रिन्यूएबल एनर्जी के बारे में बताते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में प्रूवन टेक्नोलॉजी, इकोनॉमिक वायाबिलिटी, एविबिलिटी ऑफ रॉ मैटेरियल और मारेकेटिबिलिटी ऑफ फिनिश प्रोडक्ट मुख्य बाते हैं. हमारे देश में 22 लाख करोड़ रुपये का फॉसिल फ्यूल का इम्पोर्ट होता है. ये एक बड़ी समस्या है. अगर यही पैसा भारत में रहेगा तो करोड़ों रोजगार निर्माण होंगे. देश की वेल्थ क्रिएट होगी और देश का विकास होगा. अब मैं आपको बताना चाहता हूं कि जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल है, अब इलेक्ट्रिक स्कूटर, इलेक्ट्रिक कार के साथ-साथ इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट भी आने लगे हैं. इलेक्ट्रिक ट्रक भी आ रहा है. इलेक्ट्रिक बसें भी आई हैं. हमारे देश की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री सातवें नंबर से आज तीसरे नंबर पर पहुंची है. इस क्षेत्र में अब तो भारत ने जापान को भी पीछे छोड़ दिया है.

नितिन गडकरी का मंत्र

नितिन गडकरी ने ग्रीन और आत्मनिर्भर भारत का मंत्र देते हुए कहा कि दो ही फिलॉसफी है. एक है नॉलेज टू वेल्थ. इनोवेशन, एंटरप्रेनरशिप, साइंस, टेक्नोलॉजी, रिसर्च स्किल एंड सक्सेसफुल प्रैक्टिसेज को हम नॉलेज कहते हैं और कन्वर्सेशन ऑफ नॉलेज ही वेल्थ है और यही देश का भविष्य है. दूसरी बात मैं कहूंगा कि नो मैटेरियल इज वेस्ट. हम वेस्ट में वैल्यू क्रिएट करें. वेस्ट टू वेल्थ से पर्यावरण की भी रक्षा होगी, प्रदूषण भी समाप्त होगा. नये रोजगार के भी निर्माण होंगे. देश का इम्पोर्ट भी बचेगा. विन-विन सिचुएशन में ग्राहकों का भी फायदा होगा. सस्ते में फ्यूल मिलेगा. तो मुझे लगता है कि आने वाले समय में सस्टेनेबल डेवलपमेंट में इथिक्स, इकोनॉमी और इकोलॉजी एनवायरमेंट में हम प्रदूषणमुक्त देश बनाएं. इम्पोर्ट सबस्टिट्यूट, कॉस्ट इफेक्टिव और पॉल्यूशन फ्री और इंडिजिनस. यही भाव रखकर हम जाएंगे तो देश आत्मनिर्भर भारत बनेगा. ये मेरा विश्वास है.     

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