
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी
नई दिल्ली:
केंद्रीय मंत्री एवं पूर्व अभिनेत्री स्मृति ईरानी का कहना है कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि उन्हें टीवी तथा राजनीति या सरकार में अपना दायित्व निभाते समय कभी भी किसी तरह के लैंगिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा.
लोकप्रिय टीवी धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी की भूमिका के चलते स्मृति ईरानी का नाम घर-घर में जाना जाने लगा था.
उन्होंने कहा, ‘‘मैं गर्व के साथ कहती हूं कि टीवी अभिनेता के रूप में मुझे कभी भी किसी तरह के लैंगिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा. टीवी में मैंने लेखक, निर्माता, सह निर्देशक, कई भूमिकाओं में काम किया है. राजनीति में मेरी संगठनात्मक भूमिकाओं के दौरान मुझे अपने संगठन में कभी भी लैंगिक पक्षपात का सामना नहीं करना पड़ा.’’
स्मृति ने कहा, ‘‘आज जब मैं मंत्री हूं, मुझे लगता है कि किसी महिला को अपमानित करने का बेहतरीन तरीका यह कहना है, ‘ओह आप महिला हैं’. यदि आप गुण-दोष के आधार पर उन्हें नहीं हरा सकते, तो मुझे यह लगता है कि या तो मैं महिला हूं या मैं कभी अभिनेत्री थी.’’
चालीस वर्षीय स्मृति ने टाइम्स लिटफेस्ट में ‘नो तुलसी इन आंगन-चेंजिंग जेंडर रोल्स इन फिल्म’ विषय पर अपनी बात रखी. स्मृति का कहना है कि यद्यपि कुछ लोगों ने उन्हें अपमानित करने की कोशिश की, लेकिन बड़े पैमाने पर लोगों ने लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई.
अभिनेत्री से राजनीतिक नेता बनीं स्मृति का मानना है कि यह देश की खासियत है कि कुछ लोगों द्वारा महिलाओं को नीचा गिराने की कोशिश किए जाने के बावजूद महिलाओं, महिला नेताओं ने महत्वपूर्ण स्थान हासिल किए हैं.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
लोकप्रिय टीवी धारावाहिक ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी की भूमिका के चलते स्मृति ईरानी का नाम घर-घर में जाना जाने लगा था.
उन्होंने कहा, ‘‘मैं गर्व के साथ कहती हूं कि टीवी अभिनेता के रूप में मुझे कभी भी किसी तरह के लैंगिक भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा. टीवी में मैंने लेखक, निर्माता, सह निर्देशक, कई भूमिकाओं में काम किया है. राजनीति में मेरी संगठनात्मक भूमिकाओं के दौरान मुझे अपने संगठन में कभी भी लैंगिक पक्षपात का सामना नहीं करना पड़ा.’’
स्मृति ने कहा, ‘‘आज जब मैं मंत्री हूं, मुझे लगता है कि किसी महिला को अपमानित करने का बेहतरीन तरीका यह कहना है, ‘ओह आप महिला हैं’. यदि आप गुण-दोष के आधार पर उन्हें नहीं हरा सकते, तो मुझे यह लगता है कि या तो मैं महिला हूं या मैं कभी अभिनेत्री थी.’’
चालीस वर्षीय स्मृति ने टाइम्स लिटफेस्ट में ‘नो तुलसी इन आंगन-चेंजिंग जेंडर रोल्स इन फिल्म’ विषय पर अपनी बात रखी. स्मृति का कहना है कि यद्यपि कुछ लोगों ने उन्हें अपमानित करने की कोशिश की, लेकिन बड़े पैमाने पर लोगों ने लैंगिक भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई.
अभिनेत्री से राजनीतिक नेता बनीं स्मृति का मानना है कि यह देश की खासियत है कि कुछ लोगों द्वारा महिलाओं को नीचा गिराने की कोशिश किए जाने के बावजूद महिलाओं, महिला नेताओं ने महत्वपूर्ण स्थान हासिल किए हैं.
(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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