- नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव कार्य सामाजिक संस्थाओं द्वारा लगातार जारी है
- ग्लोबल वार्मिंग और औद्योगीकरण के कारण हिमताल फटने से नेपाल में बाढ़ आई है, यह मुख्य वजह है
- नेपाल के मजदूर संघ के सदस्य बाढ़ प्रभावित इलाकों में सिल्ट हटाने और राहत कार्यों में सक्रिय हैं
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव का काम लगातार जारी है. कई सामाजिक संस्थाएं प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद कर रही हैं. इन्हीं में से एक मजदूर संघ भी है, जिसके सदस्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सिल्ट हटाने और राहत कार्यों में जुटे हुए हैं. इसी संस्था से जुड़े योगेन्द्र शर्मा ने एनडीटीवी से बातचीत के दौरान नेपाल की त्रासदी को लेकर अपनी पीड़ा साझा की.
ग्लोबल वार्मिंग को बताया बाढ़ की बड़ी वजह
योगेन्द्र शर्मा ने कहा कि नेपाल एक गरीब देश है, लेकिन बड़े देशों में हो रहे औद्योगीकरण का असर नेपाली जनता को झेलना पड़ रहा है. उन्होंने कहा, "इस बाढ़ की वजह यह है कि दुनिया में इस समय क्लाइमेट चेंज हो रहा है. बड़े-बड़े देश अपने उद्योग चला रहे हैं. ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमताल फट रहे हैं, जिससे यह बाढ़ आ रही है. हम लोग एक गरीब देश हैं, इसलिए अमीर देशों को इस पर ध्यान देना चाहिए."
भावुक होकर बोले, हमारी पीड़ा बहुत बड़ी है
बातचीत के दौरान योगेन्द्र शर्मा भावुक हो गए. उन्होंने कहा, "हमें बहुत पीड़ा हुई है. बड़े-बड़े देश कमा रहे हैं और हम गरीबों को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है. हम अपने देश को बचाने के लिए क्लाइमेट चेंज पर काम कर रहे हैं." उनकी आंखों में आंसू थे और आवाज में दर्द साफ महसूस किया जा सकता था.
बड़े देशों से मांगी जिम्मेदारी और मदद
योगेन्द्र शर्मा ने आगे कहा, "अमेरिका, यूरोप, चीन, ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देश बड़े-बड़े उद्योग चला रहे हैं और उनसे कमाई कर रहे हैं. इन देशों को नेपाल को हर्जाना देना चाहिए. हमारे देश में बार-बार ऐसी घटनाएं हो रही हैं. इससे बचाने के लिए बड़े देशों को कुछ करना चाहिए."
"सामान्य हालात में लौटने में लगेगा समय"
बाढ़ के बाद की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "हम इतनी पीड़ा में हैं कि कुछ कह नहीं सकते. लोग मारे गए हैं, बेघर हो गए हैं. उनके पास खाने-पीने का सामान नहीं है और रहने के लिए घर भी नहीं है. जिस स्थिति में हम पहुंच गए हैं, उससे बाहर निकलने और सामान्य हालात में लौटने में हमें अभी काफी समय लगेगा."
1,252 लोगों की हुई मौत
इसके साथ ही ताजा आंकड़ों के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या बढ़कर करीब 1,252 पहुंच गई है, जबकि 5,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं. इसके अलावा 4,216 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. राहत एजेंसियों का कहना है कि कई लोग अब भी जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों और मलबे से ढके इलाकों में फंसे हो सकते हैं.
बचाव अभियान बड़े स्तर पर जारी है. नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के करीब 21,500 जवान राहत और खोज अभियान में जुटे हैं. अब तक करीब 12,000 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है. संचार सेवाएं काफी हद तक बहाल कर दी गई हैं और दूरदराज के इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है.
भारत समेत कई देशों की टीमें भी बचाव और राहत कार्य में सहयोग कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि अब राहत और खोज अभियान के साथ-साथ पुनर्वास पर भी जोर दिया जा रहा है, क्योंकि हजारों परिवार अपना घर खो चुके हैं.
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