- नाथुला रास्ते से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले 44 तीर्थयात्रियों का पहला जत्था तिब्बत में प्रवेश कर गया
- यह समूह माउंट कैलाश और मानसरोवर झील की दस दिन की आध्यात्मिक यात्रा पर निकला है
- तीर्थयात्रियों ने यात्रा दिल्ली से शुरू की थी और गंगटोक में हंगू झील एक्लिमेटाइजेशन सेंटर में तैयारी की गई थी
नाथुला रास्ते से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों का पहला जत्था शनिवार को तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में दाखिल हुआ. वे माउंट कैलाश और मानसरोवर झील की 10 दिन की आध्यात्मिक यात्रा पर निकले हैं. इस जत्थे में 44 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिनमें तीन डॉक्टर और दो संपर्क अधिकारी भी हैं. तीर्थयात्रियों में 32 पुरुष और 12 महिलाएं हैं. यह ग्रुप भारत के अलग-अलग हिस्सों से आया है; इसमें मुख्य रूप से दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र के लोग शामिल हैं, साथ ही उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक और अन्य राज्यों के तीर्थयात्री भी हैं.
सभी तीर्थयात्रियों की उम्र करीब 30 से 70 वर्ष है. तीर्थयात्रियों ने 11 जून को नई दिल्ली से अपनी यात्रा शुरू की और 15 जून को गंगटोक पहुंचे. 16 जून से, वे नाथुला के पास स्थित हंगू झील एक्लिमेटाइजेशन सेंटर में ऊंचाई वाली इस यात्रा के लिए खुद को तैयार कर रहे थे.
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STDC ने की मेहमाननवाजी
पहले जत्थे को नाथुला में गवर्नर ओम प्रकाश माथुर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था. इस मौके पर पर्यटन मंत्री शेरिंग थेंडुप भूटिया, भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सिक्किम पर्यटन विकास निगम (STDC) के अधिकारी भी मौजूद थे. STDC सिक्किम में तीर्थयात्रियों के लिए लॉजिस्टिक्स और मेहमाननवाजी का इंतजाम कर रहा है.

इस साल, कुल 500 तीर्थयात्री नाथू ला रास्ते से यात्रा करेंगे. तीर्थयात्रियों को 50-50 लोगों के 10 समूहों में बांटा गया है. हिंदुओं, बौद्धों और जैन धर्म को मानने वालों के लिए कैलाश मानसरोवर यात्रा का बहुत धार्मिक महत्व है. माना जाता है कि माउंट कैलाश भगवान शिव का निवास स्थान है, जबकि मानसरोवर झील को दुनिया की सबसे पवित्र झीलों में से एक माना जाता है. तीर्थयात्रियों ने अलग-अलग सरकारी एजेंसियों और अधिकारियों द्वारा दी गई सुविधाओं की तारीफ की.
एक तीर्थयात्री ने बताया, "अब तक यह एक शानदार यात्रा रही है. उन्होंने (अधिकारियों ने) हम सभी के लिए इसे बहुत आसान बना दिया है. मैं भगवान शिव के दर्शन का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं"
सिक्किम के पर्यटन मंत्री ने मीडिया को बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए निकलते समय लोगों में बहुत जोश और उत्साह था. विदेश मंत्रालय हर साल जून से अगस्त/सितंबर के दौरान दो अलग-अलग रास्तों - लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथू ला दर्रा (सिक्किम) से कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन करता है. यह यात्रा उन योग्य भारतीय नागरिकों के लिए खुली है, जिनके पास वैध भारतीय पासपोर्ट है और जो धार्मिक उद्देश्यों से कैलाश-मानसरोवर जाना चाहते हैं.
(रिपोर्ट-पंकज धुंगेल)
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