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सांसदों की सैलरी सिर्फ 1.24 लाख नहीं, 2.81 लाख बैठती है, ब्रेकअप समझिए

MPs Salary Hike: सासंदों की सैलरी आखिरी बार साल 2018 में बढ़ाई गई थी. तब सैलरी  50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई थी.  सरकार ने हर 5 साल में वेतन और भत्तों में संशोधन के लिए नियम लागू किया था.

संसद सदस्यों के वेतन में बढ़ोतरी.

नई दिल्ली:

देश के सांसदों की सैलरी अब बढ़ गई है. केंद्र सरकार ने संसद सदस्यों की सैलरी बढ़ा (MPs Salary Hike) दी है. संसदीय कार्य मंत्रालय ने सोमवार को इसकी अधिसूचना जारी की. 1 अप्रैल 2025 से उनको बढ़ी हुई सैलरी मिलने लगेगी. अब तक सांसदों को 1 लाख रुपए महीना वेतन मिलता था. लेकिन अब इसे बढ़ाकर 1.24 लाख रुपए कर दिया गया है. बता दें कि मोदी सरकार ने साल 2018 में एक नियम बनाया था कि हर पांच साल में सांसदों की सैलरी और भत्तों की समीक्षा की जाएगी. अब कोस्ट इन्फ्लेशन के आधार पर संसद सदस्यों की सैलरी में 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी गई है. 

बात अगर सन 1966 की करें तो तब संसद सदस्यों को वेतन के तौर पर 500 रुपए महीना मिलते थे. लेकिन जैसे-जैसे समय बदला और महंगाई बढ़ती गई सांसदों के वेतन में भी बढ़ोतरी होती गई. पिछले 70 सालों में संसद सदस्यों की सैलरी काफी बदल गई है. संसदीय कार्य मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि मौजूदा सासंदों के दैनिक भत्ता और जो पूर्व सांसद 5 साल से ज्यादा सेवाएं दे चुके हैं, उनकी सालाना पेंशन में अतिरिक्त बढ़ोतरी की गई है.

माननीयों की सैलरी का ब्रेकअप

  • सांसदों की सैलरी बस 1.24 लाख नहीं, 2.81 लाख बैठती है, ब्रेकअप समझिए
  • 1966 में सैलरी 500 रुपये  थी
  • कार्यालय खर्च के लिए 75,000 रुपये 
  • संसद या कमेटी की बैठक में जाने के लिए हर रोज अब 2 हजार की जगह ढाई हजार मिलेंगे
  • वन टाइम फर्नीचर अलाउंस-1 लाख 25 हजार रुपये
  • निर्वाचन क्षेत्र भत्ता-87,000 रुपए प्रति माह 
  • अपने या परिवार के लिए साल में 34 फ्री हवाई टिकट
  • फ्री रेल पास
  • 50,000 यूनिट फ्री बिजली, 4 लाख लीटर मुफ्त पानी
  • फोन-इंटरनेट भत्ता, लोकसभा सांसदों को साल में 1,50,000 मुफ्त कॉल, राज्यसभा सांसदों को सालाना 50,000 मुफ्त कॉल 
  • सड़क यात्रा के लिए भत्ता

मंत्रियों को क्या-क्या मिलेगा?

  •  सैलरी 1.24 लाख रुपये

  • निर्वाचन भत्ता 87 हजार रुपये

  • मासिक भत्ता  75 हजार रुपये

  • कुल मिलाकर 2.86 लाख रुपये का वेतन-भत्ता, पहले 2 लाख 30 हजार रुपये था

  • मंत्रियों को सांसदों की तरह कार्यालय भत्ता नहीं मिलता

  • वन टाइम फर्नीचर अलाउंस भी नहीं मिलता

सांसदों का वेतन और भत्ता कितना बढ़ा?

अधिसूचना में कहा गया है कि सांसदों का दैनिक भत्ता 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है, जबकि पूर्व सांसदों के लिए पेंशन 25,000 रुपये महीने से बढ़ाकर 31,000 रुपये हर महीने कर दी गई है. संसद सत्र और संसदीय समिति की बैठकों में हिस्सा लेने के दौरान सांसद दैनिक भत्ता ले सकेंगे. पांच साल से ज्यादा की सेवा के लिए प्रत्येक वर्ष के लिए अतिरिक्त पेंशन 2,000 रुपये महीने से बढ़ाकर 2,500 रुपये महीने कर दी गई है.सांसदों के निर्वाचन क्षेत्र भत्ते और ऑफिस खर्च में भी बढ़ोतरी की गई है. 

  •  सांसदों को 1.24 लाख रुपये महीने सैलरी मिलेगी
  • निर्वाचन क्षेत्र भत्ते के रूप में 87,000 रुपये हर महीने मिलेंगे
  • पहले यह भत्ता 70,000 रुपये था 
  • ऑफिस खर्च के लिए 75,000 रुपये मिलेंगे, जबकि पहले यह 60,000 रुपये था

आखिरी बार 2018 में बढ़ी थी सांसदों की सैलरी

बता दें कि सासंदों की सैलरी आखिरी बार साल 2018 में बढ़ाई गई थी. तब सैलरी  50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई थी.  सरकार ने हर 5 साल में वेतन और भत्तों में संशोधन के लिए नियम लागू किया था, मुद्रास्फीति के साथ जोड़ा गया था. इससे सैलरी तय करने के लिए सांसदों द्वारा की सिफारिशें का नियम खत्म हो गया. बता दें कि साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने एक साल के लिए सांसदों और मंत्रियों की सैलरी में 30% की कटौती की थी. अब एक बार फिर से सांसदों की सैलरी और भत्तों में बढ़ोतरी कर दी गई है.
 

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