Monsoon Rainfall Deficiency: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुरुवार को दिल्ली समेत राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के बाकी हिस्सों में आगे बढ़ गया. इसके साथ ही आज 09 जुलाई 2026 को मॉनसून ने पूरे देश को कवर कर लिया है. दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में कल रात से ही भारी बारिश रिकॉर्ड की गई. भारी बारिश के बीच देश में बारिश की कमी भी घट गई है. 1 जुलाई तक देश में बारिश की कमी 38 फीसदी दर्ज की गई थी, जो घटकर 13 फीसदी पर आ गई है.
दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश के बाद लोग परेशान
कल रात से जारी भारी बारिश के चलते पूरे दिल्ली-एनसीआर में कई जगह जलभराव की वजह से जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई और शहर के कई इलाकों में सुबह से भारी जाम लग गया. जहां एक तरह दिल्ली-एनसीआर में कई घंटों की बारिश से सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह से प्रभावित हुआ और आम शहरी लोगों को कई तरह की चुनौतियों से जूझना पड़ा, वहीं मॉनसून की बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे ग्रामीण भारत में लाखों किसानों ने जुलाई के दौरान मॉनसून की स्थिति में सुधार के बाद राहत की सांस ली है.
मॉनसून ने ऐसे समय पर पिछले एक हफ्ते के दौरान रफ्तार पकड़ी है जब खरीफ सीजन पीक पर है और देश के कई हिस्सों में औसत से कम बारिश की वजह से किसान महत्वपूर्ण खरीफ फसलों की बुआई उम्मीद के अनुसार नहीं कर पा रहे थे. लेकिन अब विशेषकर मॉनसून कोर जोन में बारिश में सुधार से खरीफ फसलों की बुआई की रफ्तार में सुधार की उम्मीद है.
कम बारिश वाले जिलों की संख्या घटी
कृषि मंत्रालय के मुताबिक, हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश की वजह से कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर 178 रह गई है. हालांकि महत्वपूर्ण खरीफ फसलों की बुआई को लेकर चिंता बनी हुई है. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को एक हाई लेवल समीक्षा बैठक कर मॉनसून पर अल नीनो और खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ रहे असर की समीक्षा की.
कृषि मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आकंड़ों के अनुसार, 3 जुलाई 2026 तक देशभर में खरीफ सीजन के दौरान कुल 350.85 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 91.96 लाख हेक्टेयर (- 20.77%) कम है. इस दौरान चावल की बुआई करीब 09.06 लाख हेक्टेयर (-13.08%), अहम दलहन फसलों की बुआई 10.35 लाख हेक्टेयर (- 21.79%) और तिलहन की फसलों की बुआई सबसे ज़्यादा 42.96 लाख हेक्टेयर (- 39.32%) इलाके में घट गई है.
किसानों पर पड़ रहा असर
मॉनसून में देरी का असर सोयाबीन और कपास की फसल पर भी पड़ा है. इसे देखते हुए कृषि मंत्रालय ने किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी कम अवधि और कम पानी वाली फसलों की बुवाई की सलाह दी गई है. कृषि मंत्रालय उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, गोवा और केरल जैसे राज्यों पर बारिश की स्थिति पर विशेष निगरानी रख रहा है.

कहां तक पहुंचा मॉनसून
Photo Credit: IMD
मॉनसून की कमी से जूझ रहे राज्य
1. बिहार: -53%
2. झारखंड: -42%
3. असम: -37%
4. पंजाब: -32%
5. उत्तर प्रदेश: -27%
6. गोवा: -27%
5. केरल: - 25%
भारत मौसम विभाग पहले ही इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सीजन के दौरान औसत से कम बारिश होने का पूर्वानुमान जारी कर चुका है. इसे देखते हुए कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर इसके असर से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है.

भारत सरकार की तैयारी
- बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए करीब 1.75 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार रखा गया है, जिससे बुवाई प्रभावित न हो.
- किसान क्रेडिट कार्ड अभियान के तहत 30 जून तक प्राप्त 1.14 लाख आवेदनों में से 94 हजार से अधिक को स्वीकृति दी जा चुकी है.
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, जिससे नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
- अल नीनो की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए अल-नीनो मॉनिटरिंग सेल, क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप, राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम लगातार मानसून, बुवाई, फसल और बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.

उम्मीद है कि जुलाई में बारिश और रफ्तार पकड़ेगी, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आएगी. भारत मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के इलाकों में बने स्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र के असर से 9 जुलाई को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में और 9-10 जुलाई 2026 को उत्तराखंड में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश होने की संभावना है.
हालांकि 9 जुलाई से देश के मध्य हिस्सों महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश सहित में और 10 जुलाई से दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियों में काफी कमी आने की संभावना है.
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