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नरेंद्र मोदी सरकार अड़ने और तनकर खड़े रहने वाली सरकार है: RSS चीफ मोहन भागवत

Mohan Bhagwat: आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समान नागरिक संहिता का विचार अच्छा है. विविधता में भी हमारा कोई विरोध नहीं है. पर यदि समानता से देश की एकता मजबूत होती है तो हमारा उसे समर्थन है. उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता के संबंध में पहले प्रस्ताव किया, फिर लोगों के सुझाव मांगे, तीन लाख सुझाव आए. उसके बाद उन्होंने कानून बनाया. कानून बन जाना पर्याप्त नहीं है. कानून का पालन होना चाहिए.

नरेंद्र मोदी सरकार अड़ने और तनकर खड़े रहने वाली सरकार है: RSS चीफ मोहन भागवत
RSS के सर संघचालक मोहन भागवत.
  • RSS प्रमुख मोहन भागवत ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समझौते करना आवश्यक होता है.
  • उन्होंने ज्ञान को विश्व से लेने पर जोर दिया, लेकिन देश की परंपरा और किसानों के हितों को समझने पर जोर दिया.
  • भागवत ने बताया कि आय को 6 हिस्सों में बांटना चाहिए, जिनमें परिवार, स्वयं, भगवान, बचत, धर्म-समाज और सरकार है.
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मुंबई:

भारत-अमेरिका का ट्रेड डील बीते कुछ दिनों से लगातार चर्चा के केंद्र में बना है. विपक्ष इस डील पर कई सवाल उठा रहा है तो सत्ता पक्ष इसे विकसित भारत के रोडमैप का जरूरी कदम. इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने इस डील पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. मुंबई में आयोजित व्याख्यानमाला में RSS चीफ मोहन भागवत ने भारत अमेरिका ट्रेड डील पर कहा, "आज के दौर में कोई एकाकी नहीं रह सकता. अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर डील करनी ही पड़ती है. उसमें कुछ लेना पड़ता है तो कुछ छोड़ना भी पड़ता है. अपने हित में क्या है? इसका ध्यान रखना ही चाहिए. हमें विश्वास है कि वर्तमान समय में उसका ध्यान रखा ही गया होगा. पिछले 10 वर्षों का जो एडमिनिस्ट्रेशन है, वह अडने वाला और तन कर खड़ा रहने वाला है."

संघ प्रमुख ने आगे कहा, ज्ञान तो सारी दुनिया से आना चाहिए, परंतु जो लेना है, परीक्षण करके लेना चाहिए. बिना अपने देश की आकांक्षा, परंपरा और किसानों के हित को जाने, नया है इसलिए बराबर स्वीकार कर लेना ठीक नहीं. इसलिए हमारा संवेदनशील होना ठीक है.

उन्होंने अपने संबोधन में आय के 6 हिस्से भी बताए. डॉ. मोहन भागवत ने कहा, अपनी आय का 1/6 खुद के लिए रखना, 1/6 अपने परिवार के लिए, 1/6 भगवान के लिए रखना, 1/6 आड़े वक्त के लिए बचत करके रखना, 1/6 धर्म-समाज के लिए रखना और 1/6 राजा [सरकार] को देना. अपनी आय में ये छह हिस्से रहते हैं.

बुद्ध ने अपने धर्म को भी सनातन धर्म ही कहा हैः मोहन भागवत

मोहन भागवत ने आगे कहा कि बुद्ध ने अपने धर्म को भी सनातन धर्म ही कहा है. हिंदू अपने आप में कोई धर्म नहीं है. सनातन धर्म की दो शाखाएँ हैं—वैदिक धर्म और बौद्ध धर्म. इस्लाम और ईसाईयत के मानने वालों को समझाने से पहले दोस्ती कीजिए. आज का इस्लाम और ईसाइयत पैगंबर और क्राइस्ट के नहीं हैं. अब इनमें राजनीति का वर्चस्व है. आज का इस्लाम और ईसाइयत उनकी आध्यात्मिक अवधारणा को छोड़कर राजनीतिक वर्चस्व के रास्ते पर चल निकले हैं. वे सच्चे इस्लाम और सच्ची ईसाइयत की ओर लौटें, इसकी आवश्यकता है.

आरएसएस चीफ ने यह भी कहा कि हिंदू को सबको अपनेपन और शांति की बात करनी है. हिंदू के बारे में बस इतना हो जाए कि इनका कोई बाल-बाँका नहीं कर सकता.

हमारी नीति को चुनावी राजनीति में मानने वालों को फायदा मिलता हैः आरएसएस चीफ

सावरकर जी सावरकर जी को 'भारतरत्न' सम्मान मिला तो उस सम्मान का गौरव बढ़ेगा. भारत को अपनी मातृभूमि मानने वाला एक भी हिंदू इस भारत भूमि पर है तब तक यह हिन्दूराष्ट्र है – ऐसा डॉ. हेडगेवार कहा करते थे. भाजपा के सत्ता में आने से हमारे अच्छे दिन शुरू नहीं हुए, ऐसा उल्टा है. हम एक विचार और नीति लेकर चलते हैं. जैसे-जैसे हमारी शक्ति बढ़ती है, हम उसका प्रचार और प्रतिपादन करते हैं, लोग उसे मानने लगते हैं. जो चुनावी राजनीति में इस नीति का पुरस्कार करते हैं, उन्हें उसका लाभ मिलता है. हम राम मंदिर के पक्ष में थे, तो जो लोग उसके पक्ष में आए, उन्हें उसका लाभ मिला.

आपातकाल, गुरूजी जन्मशती, राम मंदिर आंदोलन आदि के माध्यम से आप सभी के सहयोग और स्वयंसेवकों के पुरूषार्थ से ही हमारे अच्छे दिन आए हैं. उसका लाभ हमारा समर्थन करने वालों को मिला है.

राजनीति पर संघ का नहीं, मतदाताओं का दवाब होता हैः मोहन भागवत

मोहन भागवत ने आगे कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी का 100 वर्षों में विस्तार नहीं हुआ, यह प्रश्न उनसे पूछना चाहिए. अगर वे हमसे आकर पूछते हैं, तो हम उनका मार्गदर्शन करने को तैयार हैं. सिद्धांतहीन राजनीति चल जाती है, इसलिए चलाते हैं. जब पता चलेगा कि नहीं चलेगी तो वे करना बंद कर देंगे. राजनीति पर संघ का नहीं, मतदाताओं का दबाव होता है.

समान नागरिक संहिता का विचार अच्छा हैः आरएसएस चीफ

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि समान नागरिक संहिता का विचार अच्छा है. विविधता में भी हमारा कोई विरोध नहीं है. पर यदि समानता से देश की एकता मजबूत होती है तो हमारा उसे समर्थन है. उसके लिए संघर्ष की स्थिति पैदा न हो. उत्तराखंड राज्य ने समान नागरिक संहिता के संबंध में पहले प्रस्ताव किया, फिर लोगों के सुझाव मांगे, तीन लाख सुझाव आए. उसके बाद उन्होंने कानून बनाया. कानून बन जाना पर्याप्त नहीं है. कानून का पालन होना चाहिए. इस सबके बावजूद हम विविधता में एकता के पक्षधर हैं.

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अलग-अलग मुद्दों पर क्या कुछ कहा, पढ़ें

  1. संघ प्रमुख ने आगे कहा कि हम एक समाज हैं. अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक मानकर विचार नहीं करना चाहिए. अलग-अलग होने पर हम सब अल्पसंख्यक ही हैं.फास्डफूड खाने के लिए कोई कानून नहीं लाया गया, तो उसे बैन करने के लिए कानून क्यों लाना चाहिए? फास्डफूड लालच के चलते आया. खुद पर संयम रखकर उससे दूर रहना ही उससे बचने का उपाय है. 
  2. हर काम संघ को ही करना चाहिए, ऐसा नहीं है. चरित्रवान समाज के निर्माण का हमारा काम हम पूरा समय देकर भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं. पेरिस समझौते के वादों को सबसे पहले पूरा करने में भारत सर्वप्रथम है. पर्यावरण के बारे में केवल संघ को विचार नहीं करना है. सारे समाज को विचार करना चाहिए. हालांकि पर्यावरण संरक्षण हमारी गतिविधियों में से एक है. 
  3. संघ चिरतरुण संगठन है, उसमें सभी पीढ़ियाँ काम करती हैं, और नई पीढ़ी को जल्दी आगे लाने का काम होता है. इसलिए पुरानी पीढ़ी जगह बना देती है. यह काम पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता है. संघ की औसत आयु आज की तारीख में 28 साल है. हम चाहते हैं कि यह 25 साल के भीतर आ जाए. रेव पार्टी के स्थान पर सत्संग पार्टी का चलन शुरू हुआ, यह हमने नहीं किया, सहजता से यह परिवर्तन हुआ है.
  4. संस्कृत बोलनी चाहिए. भाषा वही जीवित रहती है जो चलन में रहती है. संघ केवल शाखा चलाने का कार्य करता है. संघ कोई गुरूकुल नहीं चलाता, चलाएगा भी नहीं. संघ के स्वयंसेवक गुरुकुल चलाते हैं, समाज के लोग गुरूकुल चलाते हैं तो संघ उनकी सहायता करता है. भारतीय शिक्षण मंडल के माध्यम से देशभर में गुरूकुल आदि का संचालन किया जाता है. मातृभाषा में उत्तम शिक्षा देने का कार्य विद्या भारती के माध्यम से किया जा रहा है.
  5. सरकार के माध्यम से भी शिक्षा क्षेत्र में परिवर्तन के प्रयास किए जा रहे हैं. वैचारिक और राजनीतिक विरोध के चलते राज्य स्तर पर उसमें अवरोध पैदा नहीं किये जाने चाहिए. कला के क्षेत्र में संस्कार भारती और खेल के क्षेत्र में क्रीड़ा भारती के माध्यम से बहुत सारे कार्यक्रम चल रहे हैं. ध्येय के लिए आत्मीयतापूर्ण वातावरण से स्व अनुशासन ही संघ के कार्य का आधार है.
  6. संघ का कार्य पहुंचाने के लिए संघ के स्वयंसेवक को ही वहां पहुंचना होता है. संघ को समझना है तो परसेप्शन या प्रोपेगेंडा से नहीं, खुद के अनुभव के आधार पर समझिए. साम्यवादी लेखिका रजनी पामदत्त ने अपनी पुस्तक में ब्रिटिशों को सुनाया है कि भारत में आपकी वजह से नहीं, बल्कि भारत की परंपरा से राष्ट्र संकल्पना स्थापित हुई है. अपने बारे में, अपनी पहचान के बारे में, अपने देश के बारे में स्पष्ट कल्पना कर सक्रिय हो जाइए, यही मेरा आप सभी से आह्वान है.

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