26 साल पहले 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमले को टीवी पर पूरी दुनिया ने देखा था, जब हाईजैक किए हुए दो विमानों ने न्यूयॉर्क के ट्विन टावर्स को धाराशायी कर दिया था. उसी तारीख को ऐसे ही हमले ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में भी किए जाने थे. यह खुलासा 9/11 हमले के महीनेभर बाद मुंबई पुलिस के हत्थे चढ़े एक शख्स ने किया था. मोहम्मद अफरोज नाम के इस शख्स का दावा था कि वह खुद भी इस साजिश का हिस्सा था. अफरोज के दावों की जांच के लिए मुंबई पुलिस की टीमें दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजी गई थीं. मामले की जांच के लिए खुद मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर एम. एन. सिंह ब्रिटेन गए थे.
एजेंसियों को कैसे हुआ शक?
अक्टूबर 2001 में मुंबई पुलिस को खुफिया जानकारी मिली कि चीता कैंप में रहने वाला अफरोज नाम का एक लड़का विमान उड़ाने की ट्रेनिंग लेने विदेश गया था. पुलिस को यह बात खटकी कि एक ऐसी झुग्गी-बस्ती में रहने वाला युवक विदेश जाकर विमान उड़ाने का खर्चीला कोर्स कैसे कर सकता है. अफरोज के पिता चीता कैंप में टेलर का काम करते थे. पुलिस को शक था कि जरूर किसी व्यक्ति या संगठन ने उसके लिए पैसों का प्रबंध किया होगा.
पूछताछ में हुए कई चौंकाने वाले खुलासे
अफरोज की खोज शुरू हुई. पता चला कि वह भारत लौट चुका था, लेकिन उसके घरवालों को उसका ठिकाना पता नहीं था. नवी मुंबई में वाशी के होटल एबॉट में उसके ठहरने का सुराग मिला. पुलिस ने होटल पर छापा मारकर अफरोज को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के मुताबिक, जब अफरोज से पूछताछ की गई तो उसने स्वीकार किया कि वह आतंकी संगठन अल कायदा की उस साजिश का हिस्सा था, जिसने अमेरिका में 11 सितंबर 2001 को हमले किए थे.
ब्रिटेन की संसद पर हमले का था प्लान
अफरोज उस दस्ते का सदस्य था, जिसे ब्रिटेन की संसद पर विमान गिराना था. प्लान के मुताबिक, 11 सितंबर को ही अफरोज को लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से मैनचेस्टर जा रहे एक विमान को हाईजैक करना था, लेकिन अमेरिका पर हमले की खबर आने के बाद दुनियाभर के हवाई अड्डों पर सुरक्षा बंदोबस्त चुस्त कर दिए गए और अफरोज साजिश पर अमल नहीं कर पाया. पुलिस का कहना था कि अफरोज को धर्मांध बनाकर उसे पायलट की ट्रेनिंग का कोर्स करवाने के लिए पैसा ब्रिटेन के अमीर व्यापारी मुबारक मुसलमान ने दिया था. अफरोज ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया नाम के शहर में मौलाना मंसूर इलियास नाम के आदमी ने उसे आतंकी बनने के लिए उकसाया था. अफरोज ने विमान उड़ाने की ट्रेनिंग तीन देशों में ली थी, जो ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका थे. अफरोज के मुताबिक, एक दस्ता ऑस्ट्रेलिया के रियाल्टो टावर पर भी हमला करने के लिए तैयार किया गया था.
अमेरिकी, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया गई पुलिस की टीम
मुंबई पुलिस ने पहले एक डकैती के आरोप में अफरोज को हिरासत में लिया और फिर पोटा कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया था. टाडा कानून खत्म होने के बाद उसकी जगह पोटा ने ले ली थी. अफरोज के दावों की सच्चाई जानने के लिए मुंबई पुलिस की टीमें अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया गई थीं, लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं लगा. अदालत में मुंबई पुलिस अफरोज के खिलाफ सबूत नहीं जुटा सकी. सरकारी पक्ष ने उस पर से पोटा कानून की धाराएं हटाने के लिए भी मंजूरी दे दी. अफरोज रिहा हो गया. रिहाई के बाद अफरोज ने अणुशक्तिनगर विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाया. अफरोज की दलील थी कि पुलिस ने उसे फंसाया था और उस पर लगे तमाम आरोप फर्जी थे.
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