- मध्यपूर्व एशिया में युद्ध के कारण फरवरी से मई तक कच्चे तेल की कीमत 57 प्रतिशत बढ़ी है
- भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात पर निर्भर होने के कारण महंगे तेल से प्रभावित हो रहा है
- पेट्रोलियम उत्पादों पर राज्यों में VAT की दरें 30% तक पहुंचती हैं, जिससे GST में शामिल करने की मांग बढ़ी है
मध्यपूर्व एशिया में जारी संकट और तनाव की वजह से कच्चा तेल महंगा होता जा रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय की Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक मध्यपूर्व एशिया में युद्ध शुरू होने से फरवरी, 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की कीमत 69.01/बैरल थी, जो 77 दिनों से जारी युद्ध और टकराव की वजह से 14 मई, 2026 को बढ़कर 108.36/बैरल तक पहुंच गई है.
मध्यपूर्व एशिया में युद्ध की वजह से कच्चा तेल फरवरी, 2026 की औसत कीमत के मुकाबले 14 मई, 2026 तक 39.35 डॉलर प्रति बैरल महंगा हुआ, यानी कुल 57.02% महंगा.
- भारत अपनी जरूरत का 85% से ज़्यादा कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल के आयात पर कुल खर्च भी करीब 60% से ज़्यादा बढ़ चुका है.
- सरकारी तेल कंपनियों पर तेल आयात के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए भारत सरकार ने 27 मार्च, 2026 को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाने का फैसला किया था.
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पूरी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर ट्वीट कर कहा था, "मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे- या तो भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करें जैसा कि अन्य सभी देशों ने किया है या भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से बचाने के लिए सरकार इसका वित्तीय बोझ खुद उठाये. सरकार ने इस आसमान छूती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के समय तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे (पेट्रोल के लिए लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल के लिए 30 रुपये प्रति लीटर) को कम करने के लिए taxation revenues छोड़ने का फैसला किया."

लेकिन ये महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी तो घटा दिया है, लेकिन बढ़ते तेल संकट के बावजूद राज्यों ने VAT/Sales Tax में कोई कमी नहीं की.
दरअसल राज्य सरकारों को पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले VAT/Sales Tax से हर साल लाखों करोड़ रुपये की कमाई होती है. इसीलिए, संकट के बावजूद राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर VAT/Sales Tax घटाने के लिए तैयार नहीं हैं.

इंडियन ऑयल के आंकड़ों के मुताबिक, 1 अप्रैल, 2026 को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 प्रति लीटर थी. इसमें राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले VAT की हिस्सेदारी 15.40 रूपया/लीटर है. यानी, दिल्ली में बिकने वाले हर एक लीटर पेट्रोल पर VAT का शेयर 16.24% था. 1 अप्रैल, 2026 को दिल्ली में डीजल की कीमत 87.67 प्रति लीटर थी. इसमें राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले VAT की हिस्सेदारी 12.83 रूपया/लीटर है. यानी, दिल्ली में बिकने वाले हर एक लीटर डीजल की कीमत पर VAT का शेयर 14.63 % था.
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर सबसे ज़्यादा VAT लगाने वाले राज्य हैं:
- तेलंगाना - 35.20% VAT
- आंध्र प्रदेश - 31% VAT + Rs.4/litre VAT+Rs.1/litre Road Development Cess and Vat thereon
- केरल - 30.08% sales tax+ Rs.1/litre additional sales tax + 1% cess , Social security cess Rs.2 per litre
- कर्नाटक - 29.84% sales tax
- मध्य प्रदेश - 29% VAT + Rs.2.5/litre VAT+1%Cess
- ओडिशा - 28% VAT
- महाराष्ट्र - 25% VAT+ Rs.5.12/Litre additional tax
- पश्चिम बंगाल - 25% or Rs.13.12/litre whichever is higher
- बिहार - 23.58% or Rs 16.65/Litre whichever is higher
जबकि कुछ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं जहां VAT/Sales टैक्स कुछ कम है:
- हरियाणा - 18.20% or Rs.14.50/litre whichever is higher
- हिमाचल प्रदेश - 17.5% or Rs 13.50/Litre- whichever is higher
- उत्तराखंड - 16.97% or Rs 13.14 Per Ltr whichever is greater
- अरुणाचल प्रदेश - 14.50%
- गुजरात - 13.7% VAT+ 4% Cess on Town Rate & VAT
ज़ाहिर है, देश में अलग-अलग राज्य अपनी वित्तीय ज़रूरतों के हिसाब से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर VAT और सेल्स टैक्स लगाती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पेट्रोल-डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST के दायरे में शामिल करने पर नए सिरे से विचार होना चाहिए?

सितम्बर, 2021 में लखनऊ में आयोजित GST काउंसिल की बैठक में पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने को लेकर केरल हाईकोर्ट के 21 जून 2021 के निर्देश पर चर्चा हुई थी. लेकिन कई राज्यों के विरोध की वजह से इस प्रस्ताव पर कोई सहमति नहीं बन सकी.
GST व्यवस्था में पेट्रोल-डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को शामिल करने से देश में सभी पेट्रोलियम पदार्थों पर एक सामान GST लगाना संभव हो सकेगा और संकट के इस दौर में उनपर एक समान कटौती करना भी संभव होगा.
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