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'देर से शादी बनती है रेप का कारण ', मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर बवाल, अब दी ये सफाई

18 साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले से शुरू हुई बहस के बीच इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष साजिद रशीदी के बयान पर बवाल मचा है. रशीदी ने देर से शादी को रेप का कारण बताया, जिसकी कई बीजेपी नेताओं ने आलोचना की है.

'देर से शादी बनती है रेप का कारण ', मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर बवाल, अब दी ये सफाई
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी.
  • इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के निकाह को कानूनन गलत बताया है.
  • अदालत के इस फैसले पर बहस जारी है, इस बीच इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलान साजिद रशीदी का एक बयान आया है.
  • मौलान साजिद रशीदी ने देर से शादी को रेप का कारण बताया, जिसकी आलोचना की जा रही है.
नई दिल्ली:

'रेप इसलिए हो रहे हैं क्योंकि शादियों में देरी हो रही है. अगर आप अपनी बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं, तो उनकी शादी जल्दी कर दें.' यह कहना है ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी का. हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक फैसले में कहा कि मुस्लिमों में भी यदि 18 साल से कम उम्र की लड़कियों का निकाह होता है, तो यह कानूनन गलत माना जाएगा. ऐसे मामलों में POSCO के तहत कार्रवाई होगी. हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर सवाल उठने लगे. इस बीच साजिद रशीदी ने यह बयान दिया कि देर से शादी रेप का कारण बनती है. उनके बयान की भाजपा के कई नेताओं ने आलोचना की है.  झारखंड विधानसभा में नेता विपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जो लोग संविधान के अनुसार नहीं रहना चाहते, उन्हें देश छोड़ देना चाहिए.

बीजेपी नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने रशीदी के बयानों पर कहा, "उनका बयान बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं. ऐसे बयान देकर वे पूरे समुदाय को बदनाम कर रहे हैं. उन्हें ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए."

सफाई में रशीदी बोले- अभी के हालात ही ऐसे

रशीदी के इस विवादित बयान से बवाल मचा है. इस बीच रशीदी की सफाई भी सामने आई है. लड़कियों की शादी के बारे में अपने बयान पर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, 'मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि मौजूदा हालात ऐसे हैं- जहां ऐसे कानून लाए जा सकते हैं जिनसे एक महिला दूसरी महिला से या एक पुरुष दूसरे पुरुष से शादी कर सके, और जहां एक शादीशुदा महिला बिना किसी कानूनी कार्रवाई के किसी दूसरे पुरुष के साथ रह सके. ऐसे कानूनों वाले देश में अगर कोई रेप या किसी बुरी घटना के जोखिम से बचने के लिए लड़की की जल्दी शादी करने का सुझाव देता है, तो यह निश्चित रूप से एक राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा. लोग इसका गलत मतलब निकालेंगे और ये लोग कौन हैं? मेरा बस यही कहना है. 

मैंने सामाजिक सुधार के हित में बात कीः रशीदी

उन्होंने आगे कहा कि शरीयत या किसी अन्य धर्म में बताई गई अच्छी बात को अपनाने में क्या बुराई है? रशीदी ने यह भी कहा कि मेरे बयान को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है.जो लोग कानून बनाते हैं, तोड़ने की क्षमता भी रखते हैं और तोड़ते भी हैं, वहीं लोग मेरे बयान पर बोल रहे हैं. ये लोग सामाजिक सुधार नहीं देखना चाहते. मैंने सामाजिक सुधार के हित में बात की; इस्लाम खुद कहता है कि लड़की के बालिग होने पर उसकी शादी कर देनी चाहिए.

बाल विवाह वाले राज्यों का रशीदी ने दिया उदाहरण

उन्होंने कई राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि मैं छह या सात राज्यों के नाम ले सकता हूं—जैसे झारखंड, असम, बिहार, त्रिपुरा, मध्य प्रदेश और राजस्थान—जहां अब भी बाल विवाह होता है. माता-पिता अक्सर कम उम्र में ही बिना पढ़ी-लिखी बेटियों की शादी कर देते हैं. समाज में यह सब हो रहा है. इस्लाम भी यही सलाह देता है कि लड़की के बालिग होने पर उसकी शादी कर देनी चाहिए.

अपनी सफाई में रशीदी ने आगे कहा कि मैंने ऐसा क्या गलत कहा जिससे इतना राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया—यह दावा किया जा रहा है कि रशीदी साहब ने अठारह साल से कम उम्र की लड़कियों की शादी की वकालत की? मैंने ऐसा कभी नहीं कहा.

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