तमिलनाडु स्थित भारत के सबसे बड़े कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़ा बेहद संवेदनशील डेटा लीक होने का गंभीर मामला सामने आया है. 'वर्ल्ड लीक्स' नाम के हैकर ग्रुप ने दावा किया है कि उसने प्लांट में कॉन्ट्रैक्टर के रूप में काम कर रहे अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप की करीब 8,58,000 फाइलें चुराई हैं. इनमें से लगभग 19,000 दस्तावेज बेहद सीक्रेट और संवेदनशील हैं, जिनमें प्लांट के ब्लूप्रिंट (नक्शे), सप्लायर्स की जानकारी, इंस्पेक्शन रिकॉर्ड्स और इंश्योरेंस पॉलिसी शामिल हैं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस ग्रुप ने स्वीकार किया है कि थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर सर्विस प्रोवाइडर 'योट्टा' के सर्वर पर होस्ट किए गए उनके डेटा में आंशिक सेंधमारी हुई है. रिलायंस ने इस सुरक्षा उल्लंघन की जानकारी भारत सरकार को दे दी है, हालांकि लीक हुए विशिष्ट डेटा की प्रकृति स्पष्ट नहीं की है. लीक हुई फाइलें 2016 से 2025 के बीच की बताई जा रही हैं.
कौन है हैकर ग्रुप और क्या है खतरा?
'वर्ल्ड लीक्स' एक ऐसा फिरौती वसूलने वाला हैकर ग्रुप है जो डेटा चुराकर पैसे न मिलने पर उसे लीक कर देता है. यह ग्रुप इससे पहले टाटा ग्रुप (जून में एप्पल-टेस्ला के डिजाइन लीक) और नाइकी को भी निशाना बना चुका है.
न्यूक्लियर थ्रेट इनिशिएटिव के सीनियर डायरेक्टर निकोलस रोथ ने चेतावनी दी है कि इस तरह के संवेदनशील डेटा लीक होने से देश के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र की सुरक्षा को बेहद गंभीर खतरा पैदा हो सकता है.
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