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"POK को कब्रिस्तान बना दिया... UN में कश्मीरी लड़की तस्लीमा अख्तर ने खोली पाकिस्तान की पोल

बारामूला की सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के मंच से पाकिस्तान को जमकर लताड़ा है.

"POK को कब्रिस्तान बना दिया... UN में कश्मीरी लड़की तस्लीमा अख्तर ने खोली पाकिस्तान की पोल
तस्लीमा अख्तर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के मंच से पाकिस्तान को जमकर लताड़ा है.

जम्मू-कश्मीर के बारामूला की एक युवा महिला ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के झूठ का पर्दाफाश किया है. जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 63वें सत्र में तस्लीमा अख्तर ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थानीय लोगों पर हो रहे अत्याचारों की आवाज उठाई. तस्लीमा 'एसोसिएशन ऑफ टेरर विक्टिम्स इन कश्मीर' (ATVK) से जुड़ी एक सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता हैं. उन्होंने बिना किसी डर के संयुक्त राष्ट्र के मंच से इस्लामाबाद के क्रूर चेहरे को दुनिया के सामने रखा और इसके बाद जेनेवा से विशेष रूप से एनडीटीवी से बातचीत की.

"आजाद कश्मीर" कहना पाकिस्तान का सबसे बड़ा झूठ

तस्लीमा ने पाकिस्तान के उस खोखले दावे को खारिज कर दिया जिसमें वह इस क्षेत्र को स्वायत्त बताता है. एनडीटीवी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "पाकिस्तान का सबसे बड़ा झूठ पीओजेके को 'आजाद कश्मीर' कहना है. किसी स्वतंत्र राष्ट्र के लोगों पर उनके मौलिक अधिकार मांगने के लिए गोलियां नहीं बरसाई जातीं." उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान कभी भी कश्मीरियों के हित में काम नहीं कर सकता. उन्होंने आरोप लगाया, "पहले उन्होंने आतंकवादियों को भेजकर जम्मू-कश्मीर को कब्रिस्तान में बदलने की कोशिश की और अब निर्दोष निहत्थे प्रदर्शनकारियों को मारकर पीओजेके को कब्रिस्तान में बदल दिया है."

लंदन से बुलाए नकली प्रतिनिधि, असल आवाजों को दबाया

तस्लीमा ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की चालाकी को उजागर करते हुए बताया कि वहां पीओके के असली लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई मौजूद नहीं था. उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने असल कश्मीरी आवाजों को दबाने के लिए लंदन से कुछ खास लोगों को लाकर खड़ा किया ताकि वे दुनिया के सामने एक झूठी और मनगढ़ंत कहानी पेश कर सकें.

इंटरनेट बंद किया और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को जेल में डाला

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में बोलते हुए तस्लीमा ने हाल ही में 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी' और नागरिक समाज समूहों के नेतृत्व में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि किस तरह बुनियादी अधिकारों और आर्थिक मुद्दों को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने हिंसक तरीके से दबाया. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान सरकार ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया, प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया, इंटरनेट बंद कर दिया और हिंसक झड़पों का सहारा लिया, जिसमें दर्जनों लोगों की जान चली गई, जिससे पीओके में राजनीतिक अस्थिरता और जनता का असंतोष उजागर हुआ."

नागरिकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की मांग

तस्लीमा ने पीओके में पूरी तरह से खत्म हो चुके नागरिक अधिकारों पर गहरी चिंता व्यक्त की और यूएनएचआरसी से तुरंत कदम उठाने की मांग की. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, "पीओके में कोई नागरिक अधिकार नहीं है. पाकिस्तानी सेना द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही बदले की कार्रवाई और निर्दोष नागरिकों की हत्या तुरंत रोकी जानी चाहिए. नागरिक अधिकारों और संचार को बहाल किया जाना चाहिए तथा प्रत्येक हत्या की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए." उन्होंने मांग रखी कि सूचनाओं तक स्वतंत्र पहुंच के साथ हर मौत की निष्पक्ष जांच कराई जाए.

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