- आंध्र प्रदेश के नागप्पा परिवार में छह पीढ़ियों के 83 सदस्य एक साथ रहते हैं और मिलकर काम करते हैं
- राजस्थान के अजमेर में माली परिवार भी छह पीढ़ियों वाला बड़ा संयुक्त परिवार है जिसमें करीब 185 सदस्य रहते हैं
- ऐसे परिवार आज के समय में जब लोग अकेले रहना चाहते हैं, समाज के लिए मिसाल हैं
1999 में आई फिल्म हम साथ-साथ हैं, में लोगों ने रामकिशन और ममता के भरे-पूरे परिवार को बहुत पसंद किया, विवेक, प्रेम, विनोद और संगीता का प्यार देखकर लोग भावुक हो उठे. जहां जश्न साथ मने, गम भी साथ बांटे गए. ये परिवार लोगों के लिए सपने जैसा था. 2 घंटे 57 मिनट में दर्शकों को लगा कि वे भी रामकिशन और ममता के परिवार का हिस्सा हैं, लेकिन फिल्म खत्म होते ही उन्होंने अपनी न्यूक्लियर फैमिली में खुद को अकेला पाया. भारत में प्राचीन समय से संयुक्त परिवार की परंपरा रही है. पूरा परिवार मिलकर एक साथ एक छत के नीचे रहता था. जहां महिलाएं मिलकर खाना बनाने से लेकर सभी रोजमर्रा के घर के कामकाज करती थीं. वहीं पुरुष बाहर जाकर पैसा कमाते थे.
लेकिन बदलते जमाने के साथ परिवार की यह व्यवस्था भी बदलती गई. अब ज्यादातर लोग एकल परिवार में विश्वास रखते हैं. शहरों में जॉइंट फैमिली बहुत ही मुश्किल से देखने को मिलती हैं. हालांकि देश से संयुक्त परिवार की प्रथा आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. कई जगहों पर आज भी ऐसे परिवार मौजूद हैं जो पीढ़ियों से साथ ही रहते आ रहे हैं.

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर का संयुक्त परिवार आजकल खूब चर्चा में है. यहां पर छह पीढ़ियों के 83 सदस्य एकसाथ एक घर में छत के नीचे रहते हैं. आज के समय में इस परिवार के बारे में जिसने भी सुना उसने जमकर इसकी तारीफ की. सोशल मीडिया पर लोग कह रहे हैं कि ऐसे परिवार को तो सम्मानित किया जाना चाहिए.

नागप्पा परिवार में 6 पीढ़ियों के 83 सदस्य
आंध्र के नागप्पा परिवार ने आज भी संयुक्त परिवार की परंपरा को जिंदा रखा हुआ है. इस परिवार में 83 सदस्य एक छत के नीचे रहते हैं, वे साथ खाना बनाते हैं और साथ ही खाते हैं. सभी काम इस घर के लोग मिल-जुलकर और साथ करते हैं. ये लोग रोजी रोटी के लिए पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं, साथ ही दूसरे काम भी करते हैं. आज के समय में जब भाई-भाई साथ नहीं रहना चाहते या बच्चे अपने सगे मां-बाप से पल्ला झाड़ लेते हैं, ऐसे में ये परिवार समाज के लिए मिसाल है.

महिलाएं साथ खाना पकाती हैं, पुरुष साथ काम पर जाते हैं
नागप्पा परिवार एक साथ बहुत ही खुशहाल जिंदगी जी रहा है. छह पीढ़ियों के 83 लोगों का एकसाथ रहना आज के शहरी मॉर्डन परिवारों के लिए तो सपने जैसा है. ये परिवार समाज के लिए मिसाल से कम नहीं है. हालांकि इतने ज्यादा सदस्य होने की वजह से एक घर में सभी का रहना संभव नहीं है. इसीलिए ये लोग चार घरों में आसपास ही रहते हैं. लेकिन पूरा परिवार एक घर की तरह ही काम करता है. खाना, कमाई और जिम्मेदारी सबकुछ बंटी हुई है.
VIDEO | Anantpur, Andhra Pradesh: Six generations, 83 members; Nagappa family in Andhra Pradesh keeps the joint family legacy alive.
— Press Trust of India (@PTI_News) July 11, 2026
In an age of shrinking families, the Nagappa family in Kurlapalli village in Anantpur district of Andhra Pradesh stands as a rare example of… pic.twitter.com/kesZ5zgMJN
संयुक्त परिवार के फायदे जानें
संयुक्त परिवार को आजकल लोग बेड़ी की तरह समझते हैं. लेकिन ऐसे परिवार बंधन नहीं होते. पुराने जमाने में देश में ऐसे ही परिवारों की परंपरा रही है. सब एक साथ मिलकर रहते थे, साथ हंसते थे साथ गम बांटते थे. कोई खुद को अकेला या डिप्रेशन का शिकार महसूस नहीं करता था. वहीं ऐसे परिवारों में बच्चे बहुत ही आसानी से पल जाते थे. आजकल माता-पिता काम पर जाते समय बच्चों के लिए आया रखते हैं. लेकिन ऐसे परिवारों में दादी, चाची, बुआ सब मिलकर बच्चों का ध्यान रखते थे. इससे बच्चों को अच्छे संस्कार मिलते थे. बच्चों का परिवार के साथ जुड़ाव होता था, जो आज कम होता जा रहा है. बच्चे हों या बड़े सभी बस मोबाइल में व्यस्त रहते थे. लेकिन ऐसे परिवारों में हंसी- मजाक और एक साथ समय बिताने से जीवन खुशहाल रहता था. कोई खुद को अकेला महसूस नहीं करते थे. जिम्मेदारियां बंटी होने से किसी एक पर खर्च का पूरा बोझ भी नहीं पड़ता था.

देश में 6 पीढ़ी वाले कई परिवार
आंध्र प्रदेश का नागप्पा परिवार भी आज के समय में मिसाल है. देश में 6 पीढ़ी वाले कई परिवार आज भी मौजूद हैं. राजस्थान के अजमेर का 'माली परिवार' सबसे ज्यादा फेमस है. अजमेर के रामसर गांव में रहने वाले इस संयुक्त परिवार में करीब 185 सदस्य एक साथ रहते हैं. इस घर में खाना बनाने के लिए हर दिन 13 चूल्हे जलते हैं.
PTI इनपुट के साथ
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं