जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए राष्ट्रीय ध्वज के रंगों वाले रिबन को काटने से इनकार कर दिया. यह घटना श्रीनगर के कश्मीर हाट, एग्जीबिशन ग्राउंड में आयोजित 'अपने कारीगर को जानें' कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान हुई. जब मुख्यमंत्री उद्घाटन स्थल पर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि रिबन तिरंगे के रंगों (केसरिया, सफेद और हरे) का बना हुआ है. इसे देखते ही उन्होंने रिबन काटने से मना कर दिया. इसके बजाय उन्होंने आयोजकों को निर्देश दिया कि रिबन को एक तरफ से खोल दिया जाए, जिसके बाद कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया.
डिप्टी सीएम समेत कई बड़े नेता थे मौजूद
इस मौके पर उनके साथ उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी, मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी, कई विधायक और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे. मुख्यमंत्री के इस कदम को राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और प्रोटोकॉल के पालन के रूप में देखा जा रहा है. माना जाता है कि तिरंगे से जुड़े नियमों और मर्यादाओं का पालन करना बेहद जरूरी है और सीएम उमर अब्दुल्ला ने उसी का ध्यान रखते हुए यह फैसला लिया.
#WATCH | Srinagar | Jammu & Kashmir CM Omar Abdullah refuses to cut a tricoloured inaugural ribbon to mark the official opening of the two-day Handicrafts & Handloom Exhibition, instead asks the organisers to remove it and keep it safely pic.twitter.com/d2o6kYzKH2
— ANI (@ANI) April 15, 2026
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो
इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. उमर अब्दुल्ला को पहले भी राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगान और प्रोटोकॉल से जुड़े मामलों में संवेदनशील और सतर्क नेता के रूप में जाना जाता रहा है. वे अपने राजनीतिक सफर में हमेशा मर्यादा और सम्मान का ध्यान रखते हैं और विरोधियों के खिलाफ भी संयमित भाषा का इस्तेमाल करते हैं.
वहीं, उनके पिता फारूक अब्दुल्ला की शैली उनसे कुछ अलग रही है. फारूक अब्दुल्ला अपने मुखर और आक्रामक अंदाज के लिए जाने जाते हैं और अक्सर राजनीतिक विरोधियों पर खुलकर निशाना साधते हैं. हालांकि, उनके बयान भी हमेशा सोचे-समझे और रणनीतिक माने जाते हैं. चाहे फारूक अब्दुल्ला हों या उमर अब्दुल्ला, दोनों नेताओं की देशभक्ति और धर्मनिरपेक्ष विचारधारा पर हमेशा भरोसा जताया गया है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उन्होंने देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती से रखा है.
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