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हर दिन बिक रहीं 1.90 लाख बोतलें, कश्मीर से 10 गुना ज्यादा रेवेन्यू जम्मू से... J-K में शराब का खेल

जम्मू-कश्मीर में शराबबंदी की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का कहना है कि जिनका धर्म इजाजत दे, वे पिएं. ऐसे में जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर में शराब का खेल कितना बड़ा है?

हर दिन बिक रहीं 1.90 लाख बोतलें, कश्मीर से 10 गुना ज्यादा रेवेन्यू जम्मू से... J-K में शराब का खेल
सांकेतिक तस्वीर.
PTI
  • जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शराब पीने को व्यक्तिगत इच्छा और धार्मिक अनुमति से जोड़ा है
  • मुख्यमंत्री ने शराब पर प्रतिबंध न लगाने की वजह धार्मिक विविधता और स्थानीय लोगों की सीमित पहुंच बताया है
  • उमर अब्दुल्ला के बयान पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है और शराबबंदी की मांग फिर से जोर पकड़ रही है
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नई दिल्ली:

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शराब को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उनसे जब पूछा गया कि शराब पीकर युवा बर्बाद हो रहे हैं, शराबबंदी क्यों नहीं करते? इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, 'किसी ने मजबूर किया है पीने पर? मजबूर किया? अपनी मर्जी से आप लोग दुकान पर जा रहे हो. हम आपको घसीटकर नहीं ले जा रहे. हम इसका विज्ञापन नहीं कर रहे. हमने इसकी तादाद नहीं बढ़ाई.'

उनका यह बयान सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुआ. इसके बाद उन्होंने एक और बयान देते हुए कहा कि 'ये दुकान उन लोगों के लिए है जिनका मजहब उन्हें शराब पीने की इजाजत देती है. जम्मू-कश्मीर में अभी तक किसी हुकूमत ने इन दुकानों पर पाबंदी नहीं लगाई. इसका मतलब ये नहीं है कि हम चाहते हैं कि ये और ज्यादा इस्तेमाल हो. सिर्फ ये कि जिन लोगों को मजहब शराब पीने की इजाजत देता है, वे पिएं. हमारा मजहब इसकी इजाजत नहीं देता. न हम चाहते हैं कि लोग इस तरफ जाएं.' 

उन्होंने आगे कहा कि 'हमारी हुकूमत ने इसके लिए दो-तीन चीजें कीं. पहला तो हमने कोई नई दुकान नहीं खोली. दूसरा- हमारी कोशिश रही कि कोई दुकान ऐसी जगह न हो जहां हमारे नौजवान गलत रास्ता अपनाएं. हमारे मुखालिफ अपनी गलतियों को छिपाने की कोशिश करते हैं.'

अब्दुल्ला ने अपने पिछले बयान का बचाव देते हुए कहा कि 'अगर मेरा बयान इतना ही गलत था, तो जब उनकी हुकूमत थी तब उन्होंने क्या किया? क्योंकि ठीक जो बात मैंने गांदरबल में की, वही बात असेंबली के रिकॉर्ड पर पीडीपी के वित्त मंत्री ने की. मैं फिर बात दोहराता हूं. ये दुकान सबके लिए नहीं है. जम्मू-कश्मीर कई तरह की सोच रखने वाले लोग रहे हैं. कई धर्मों के लोग रहते हैं. जो बाहर से लोग आते हैं, ये उनके लिए है. ये लोकल लोगों के नहीं है.'

अब उमर अब्दुल्ला शराब को लेकर जो बयान और सफाई दे रहे हैं, उस पर तो सियासी बखेड़ा खड़ा हो गया है. उनके बयान के बाद जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर शराबबंदी की मांग शुरू हो गई है. सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि उनकी पार्टी के लोग भी नाराज हो गए हैं. नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा रुहुल्ला ने कहा कि शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना चाहिए. 

एक तरफ उमर अब्दुल्ला की टिप्पणी को लेकर बवाल हो रहा है तो दूसरी तरफ आंकड़े हैं जो बताते हैं कि जम्मू-कश्मीर में शराब की खपत बढ़ती जा रही है. इससे सरकार को भी फायदा हो रहा है. शराब की बिक्री से सरकार को मिलने वाला रेवेन्यू लगातार बढ़ता जा रहा है.

जम्मू-कश्मीर में शराब की कितनी बिक्री?

जम्मू-कश्मीर में शराब की ज्यादातर दुकानें जम्मू में ही हैं. कश्मीर में सिर्फ कुछ ही दुकानें हैं. जम्मू-कश्मीर में शराब तीन जगहों से बिकती हैं. पहली- शराब की दुकान. दूसरी- कैंटीन स्टोर्स डिपार्टमेंट ऑफ शॉप. और तीसरी- पैरामिलिट्री फोर्स की दुकानों पर. 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में 2024-25 में शराब की 6.94 करोड़ बोतलें बिकी थीं. 2025-26 में जनवरी तक 5.63 करोड़ से ज्यादा बोतलें बिकीं. अगर इसका औसत निकाला जाए तो 2024-25 में ही हर दिन 1.90 लाख से ज्यादा बोतलें बिकीं. 

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कश्मीर से 10 गुना ज्यादा कमाई जम्मू में

हर सरकार के टैक्स रेवेन्यू में शराब की बिक्री का भी बड़ा हिस्सा होता है. जम्मू-कश्मीर की सरकार को भी करोड़ों रुपये का रेवेन्यू मिलता है. कश्मीर से ज्यादा कमाई जम्मू से होती है.

आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 और 2024-25 में सरकार को शराब की बिक्री से 2,200 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू मिला है. कश्मीर से लगभग 10 गुना ज्यादा रेवेन्यू जम्मू से आता है. 

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सबसे ज्यादा रेवेन्यू जम्मू जिले से आता है. 2024-25 में जम्मू जिले में शराब की बिक्री से 509 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू मिला था. 2023-24 में यहां से 483 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आया था. जबकि, कश्मीर में सबसे ज्यादा रेवेन्यू श्रीनगर से मिलता है. 2024-25 में श्रीनगर में शराब की बिक्री से सरकार को 65.57 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. 2023-24 में श्रीनगर से 54.89 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आया था. 

कुल मिलाकर, 2023-24 और 2024-25 में कश्मीर घाटी के जिलों से शराब की बिक्री के 188 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी. जबकि, इसी दौरान दो साल में जम्मू के 10 जिलों से 1,968 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला था. लगभग 10 गुना ज्यादा.

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