- राहुल गांधी ने बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक संसद मार्ग थाने जाकर धरना दिया, जिससे कांग्रेस नेता भी हैरान थे
- राहुल गांधी ने साहिल के पेलेट गन प्रकरण में FIR दर्ज करवाने के लिए पार्टी के कानून विशेषज्ञों से सलाह ली थी
- साहिल ने 14 अगस्त को शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उसकी आंख की रोशनी को खतरा पहुंचाने वाले पेलेट गन का जिक्र था
कांग्रेस कवर करने वाले पत्रकारों को कांग्रेस के मीडिया विभाग से शुक्रवार को एक मैसेज आता है कि राहुल गांधी संसद मार्ग के डीसीपी कार्यालय जा रहे हैं कृपया वहां जल्दी से जल्दी पहुंचे.सभी मीडियाकर्मी भागते हैं संसद मार्ग थाने की ओर. वहां राहुल गांधी एक कुर्सी पर बैठे थे उनके बगल में साहिल और उसके बगल में उसकी मां बैठी थी. यह सब इतना अचानक हुआ कि कांग्रेस नेताओं को भी नहीं मालूम था. यहां तक कि प्रियंका गांधी भी देर से संसद मार्ग थाने पहुंची.
राहुल गांधी अचानक पहुंचे संसद मार्ग थाना?
एक कांग्रेस नेता ने बताया कि कांग्रेस के नए दफ्तर इंदिरा भवन में राजीव गांधी पंचायती राज मिशन की बैठक थी और हम लोग वहीं जा रहे थे. इंदिरा भवन में काम करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि हम लोग राहुल जी का इंतजार कर रहे थे वो आऐगें तो बैठक शुरू होगी. लेकिन जैसे ही हमें मालूम हुआ कि वो संसद मार्ग थाने आ गए तो हम लोग भी भागे भागे यहीं आ गए. कहने का मतलब है कि राहुल गांधी संसद मार्ग थाने जाएंगे यह बात उन्होंने किसी अन्य कांग्रेसी नेता को बताई ही नहीं थी, हां ये हो सकता है सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल की टीम को यह बात मालूम हो.
कांग्रेस नेताओं से बात करने पर इतना जरूर पता चलता है कि राहुल ने पार्टी में कानून के जानकार नेताओं से इस बात पर जरूर चर्चा की थी कि साहिल को जो पेलेट गन लगे हैं उस पर एफआईआर हो सकता है कि नहीं. इस मुद्दे पर राहुल गांधी को यह राय दी गई कि भले ही इस मामले को सुप्रीम कोर्ट देख रहा है मगर इस मामले में एफआईआर की गुंजाइश है. हालांकि इस बात पर जरूर चर्चा हुई कि सुप्रीम कोर्ट ने एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है जो पेलेट गन से लेकर महिलाओं से छेड़छाड़ तक के मुद्दे शामिल हैं.
राहुल ने कब बनाया धरने का मन?
मगर राहुल को यह बताया गया कि साहिल ने अपनी शिकायत 14 अगस्त को ही करा दी थी इसलिए इस मामले पर एफआईआर दर्ज हो सकती है क्योंकि इस मामले में पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ है जिसकी वजह से उसके आंख की रोशनी पर फर्क पड़ा है और यह जान को खतरा है की श्रेणी में आता है. इसके बाद राहुल ने मन बनाया कि संसद मार्ग थाने जा कर वो धरना करेंगे मगर कब ये नहीं बताया.सबको लगता था कि राहुल पुणे में होने वाले छात्रों की गूंज कार्यक्रम के बाद ये करेंगे क्योंकि यह प्रोग्राम शनिवार को होना है.
छापामार पॉलिटिक्स कांग्रेस की नई रणनीति?
यह दूसरा मौका है जब राहुल गांधी ने छापामार पॉलिटिक्स का सहारा लिया है. करीब एक महीने पहले भी राहुल गांधी प्रधानमंत्री के निवास पर धरने पर बैठ गए थे. प्रधानमंत्री के निवास वाले धरने और शुक्रवार के संसद मार्ग थाने के धरने में यह फर्क था कि उस धरने की योजना मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर बनी थी और वहां खरगे जी को जन्मदिन की बधाई देने के बहाने दिल्ली में मौजूद सांसदों और मुख्यमंत्रियों को भी बुला लिया गया था. प्रधानमंत्री के घर के बाहर हुए धरने में खरगे जी और ढेरों सांसद भी शामिल हुए थे. फिर जब इंडिया गठबंधन ने राहुल गांधी के घर से गांधी स्मृति तक बस यात्रा की थी तो सौ से ज्यादा सांसद थे. मगर शुक्रवार को संसद मार्ग थाने पर धरने में दर्जन भर सांसद ही थे .राहुल और प्रियंका के अलावा कोई बड़ा चेहरा नहीं आज नहीं दिखा.मगर कांग्रेस के नेता इस बात से खुश हैं कि राहुल गांधी के धरने के बाद एफआईआर हो गई और यह एक और जीत है. यानि राहुल की यह छापामार पॉलिटिक्स काम कर रही है.
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