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ईरान से तेल लेकर भारत आ रहे ऑयल टैंकर ‘PING SHUN’ ने बदला रास्ता, अब चीनी पोर्ट की ओर बढ़ा

ईरानी कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा ऑयल टैंकर ‘PING SHUN’ अचानक अपना रास्ता बदलकर चीन के डोंगयिंग पोर्ट की ओर बढ़ गया है. शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक यह टैंकर पहले 4 अप्रैल को वाडिनार पोर्ट पहुंचने वाला था.

ईरान से तेल लेकर भारत आ रहे ऑयल टैंकर ‘PING SHUN’ ने बदला रास्ता, अब चीनी पोर्ट की ओर बढ़ा
ऑयल टैंकर ‘PING SHUN’ अचानक रास्ता बदल चीन की ओर बढ़ा
  • ईरानी कच्चे तेल से लदे टैंकर पिंग शुन ने भारत की जगह चीन के डोंगयिंग बंदरगाह की ओर रुख किया है
  • शिप ट्रैकिंग वेबसाइट marinetraffic.com के अनुसार टैंकर की दिशा और मंजिल चीन की तरफ दिख रही है
  • टैंकर 4 अप्रैल को वाडिनार पोर्ट पहुंचने वाला था लेकिन रास्ता बदलने से भारत की डिलीवरी की संभावना समाप्त
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ईरान संकट के बीच जब तेल से लदा कोई जहाज होर्मुज से निकलता है तो कई देशों को राहत की सांस मिलती है. इस बीच ईरानी कच्चे तेल से जुड़े एक अहम शिपमेंट को लेकर नया घटनाक्रम सामने आया है. दरअसल कथित तौर पर भारत की ओर आ रहा एक ऑयल टैंकर अचानक अपना रास्ता बदल चुका है, जिससे उसकी मंजिल को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. शिप ट्रैकिंग से जुड़ी वेबसाइटों पर मौजूद जानकारी के अनुसार, यह टैंकर अब भारत की जगह चीन के एक बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है. यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पहले से ही दबाव में है.

भारत की ओर आ रहा था टैंकर, बीच रास्ते बदली दिशा

कथित तौर पर ईरानी कच्चा तेल लेकर भारत की तरफ आ रहे ऑयल टैंकर “पिंग शुन” (PING SHUN) ने बीच रास्ते में ही अपना रास्ता बदल लिया है. इस टैंकर को पहले भारत के लिए रवाना माना जा रहा था, लेकिन ताजा ट्रैकिंग जानकारी कुछ और ही इशारा कर रही है. टैंकर के रास्ता बदलने से इसके कार्गो और डिलीवरी को लेकर भी तमाम अटकलें तेज हो गई हैं. इस बदलाव ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और तेल आपूर्ति से जुड़े हलकों का भी ध्यान खींचा है.

शिप ट्रैकिंग साइट ने दी चीन की ओर बढ़ने की जानकारी

शिप ट्रैकिंग साइट marinetraffic.com के मुताबिक, ऑयल टैंकर “पिंग शुन” अब चीन के बंदरगाह डोंगयिंग की ओर जा रहा है. वेबसाइट पर उपलब्ध डेटा में टैंकर की मौजूदा दिशा और मंजिल को चीन की तरफ दिखाया गया है. डोंगयिंग, चीन के शेडोंग प्रांत में स्थित है और इसे उत्तरी बोहाई सागर के तट पर एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर माना जाता है. मौजूदा जानकारी में भारत की ओर किसी आगे की मूवमेंट का संकेत नहीं दिया गया है.

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4 अप्रैल को वाडिनार पोर्ट पहुंचने की थी संभावना

इससे पहले ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि ये ऑयल टैंकर “पिंग शुन” 04 अप्रैल की सुबह करीब 11 बजे वाडिनार पोर्ट पहुंचेगा. इसी आधार पर माना जा रहा था कि यह शिपमेंट भारत के लिए है. हालांकि, अब टैंकर के रास्ता बदलने के बाद यह संभावना खत्म हो गई है. वाडिनार पोर्ट पहुंचने से पहले ही टैंकर का चीन की ओर मुड़ जाना पूरे मामले को और जटिल बना रहा है.

शिपिंग मंत्रालय को नहीं थी कार्गो की जानकारी

गुरुवार को शिपिंग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी मुकेश मंगल ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस कार्गो ऑयल टैंकर के बारे में कोई खास जानकारी नहीं है. अधिकारी के बयान से यह साफ होता है कि मंत्रालय स्तर पर भी इस शिपमेंट को लेकर कोई विस्तृत सूचना उपलब्ध नहीं थी. इससे यह संकेत मिलता है कि यह टैंकर किसी आधिकारिक भारतीय आयात प्रक्रिया का हिस्सा नहीं भी हो सकता है.

इस्वातिनी के झंडे के नीचे चल रहा है ‘PING SHUN'

ऑयल टैंकर “पिंग शुन” इस्वातिनी (ESWATINI) के झंडे के नीचे संचालित हो रहा है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस टैंकर पर करीब 6 लाख बैरल कच्चा तेल लोड किया गया है. टैंकर का फ्लैग और कार्गो दोनों ही इसे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग नेटवर्क का हिस्सा बनाते हैं. इतनी बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की ढुलाई अपने आप में इसे अहम बनाती है.

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अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी राहत का असर

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका ने 21 मार्च को एक अहम फैसला लिया था. जब अमेरिका ने वैश्विक तेल आपूर्ति की स्थिति में सुधार और बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने के उद्देश्य से, टैंकरों पर पहले से लोड किए गए ईरानी कच्चे तेल पर लगे प्रतिबंधों को एक महीने के लिए निलंबित कर दिया था. इस फैसले को मौजूदा शिपमेंट से जोड़कर भी देखा जा रहा है.

2019 से भारत ने बंद कर रखा है ईरानी तेल आयात

आपको बता दें कि तेहरान पर अमेरिकी प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत ने मई 2019 से ईरानी कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया था. इसके बाद से भारत ने ईरान से सीधे तौर पर कच्चा तेल नहीं खरीदा है. मौजूदा टैंकर को लेकर उठे सवाल इसी पृष्ठभूमि में और अहम हो जाते हैं, क्योंकि भारत की आधिकारिक नीति में ईरानी तेल आयात शामिल नहीं है.

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