- सुप्रीम कोर्ट ने आई-पैक रेड मामले में ईडी अधिकारियों के मौलिक अधिकारों की अनदेखी न करने को कहा है
- अदालत ने पूछा कि क्या ईडी के अधिकारी केवल नौकरी के कारण नागरिक अधिकारों से वंचित हो जाते हैं
- SC ने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किए बिना समय पर फैसला करने की बात कही और सुनवाई टालने से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने आई-पैक (I-PAC) रेड मामले में पश्चि बंगाल सरकार से तीखे सवाल पूछे. अदालत ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अधिकारियों के भी मौलिक अधिकार हैं. इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने पूछा कि क्या ईडी के अधिकारी केवल अपनी नौकरी के कारण नागरिक नहीं रह जाते.
सुनिए ममता सरकार के वकील की दलील
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में कुछ अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से याचिका दायर की है इसलिए उनके अधिकारों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है. वहीं सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि ईडी को अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट आने का अधिकार नहीं है.अगर किसी अधिकारी के काम में बाधा आती है तो उसके लिए कानून में अन्य उपाय मौजूद हैं. इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता.
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ED अधिकारियों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से पूरी तरह सहमति नहीं जताई. अदालत ने कहा कि मामले को केवल संस्थागत विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि उन अधिकारियों के अधिकारों को भी समझना होगा, जो कथित तौर पर प्रभावित हुए हैं. ममता बनर्जी की ओर से पेश वकील ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए सुनवाई टालने की मांग की. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे सख्ती से खारिज कर दिया और कहा कि अदालत किसी भी तरह चुनावी प्रक्रिया से प्रभावित नहीं होगी और समय पर फैसला करेगी.
I-PAC के दफ्तर में छापेमारी से जुड़ा है मामला
बता दें कि यह मामला 8 जनवरी की घटना से जुड़ा है, जब ईडी I-PAC के दफ्तर में छापेमारी कर रही थी. आरोप है कि उस समय ममता बनर्जी वहां पहुंचीं और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा इलेक्ट्रॉनिक सामग्री अपने साथ ले गईं. ईडी का कहना है कि यह छापेमारी 2020 के एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़ी थी, जिसमें कोयला तस्करी के आरोप हैं. एजेंसी ने इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है
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