- डॉ. प्रीति अदाणी ने AVPN ग्लोबल कॉन्फ्रेंस 2026 में कहा कि आज सामाजिक चुनौतियां अधिक जटिल हो गई हैं.
- उन्होंने कहा, "ऐसे में किसी एक संस्था या संगठन के लिए इनका समाधान करना संभव नहीं है."
- अदाणी फाउंडेशन के 30 साल पूरे होने के मौके पर उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने के उपायों पर विस्तार से बात की.
अदाणी फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि युवाओं, महिलाओं और स्थानीय स्तर पर नए समाधान तैयार करने वाले लोगों में निवेश से न केवल स्थानीय समस्याओं का समाधान किया जा रहा है, बल्कि ऐसे विकास मॉडल भी तैयार हो रहे हैं, जिन्हें वैश्विक दक्षिण के दूसरे देश अपना सकते हैं. उन्होंने सामाजिक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग, अनुभव साझा करने और मजबूत साझेदारी की जरूरत पर जोर दिया.
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एवीपीएन ग्लोबल कॉन्फ्रेंस 2026 को संबोधित करते हुए डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि आज सामाजिक चुनौतियां पहले के मुकाबले ज्यादा जटिल हो गई हैं. ऐसे में किसी एक संस्था या संगठन के लिए इनका समाधान करना संभव नहीं है. अलग-अलग देशों, संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच ज्ञान, अनुभव और सफल प्रयोगों को साझा करना जरूरी है.
अदाणी समूह की सामाजिक विकास इकाई अदाणी फाउंडेशन इस सम्मेलन की रणनीतिक भागीदार है. फाउंडेशन ने भारत मंडपम में आयोजित स्वागत समारोह की मेजबानी की, जिसमें देश और विदेश से करीब 2,000 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

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डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि दुनिया भर से परोपकार और सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में काम करने वाले नेताओं का भारत में स्वागत करना सम्मान की बात है. उन्होंने कहा कि आज दुनिया भारत और एशिया को विकास और नए अवसरों के प्रमुख केंद्र के तौर पर देख रही है.
उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में अदाणी फाउंडेशन के अनुभव से यह स्पष्ट हुआ है कि स्थायी बदलाव तभी संभव है, जब समुदायों को अपने भविष्य को खुद आकार देने के लिए सक्षम बनाया जाए.
डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि सामाजिक चुनौतियां लगातार जटिल हो रही हैं, इसलिए अलग-अलग जगहों के सफल अनुभवों से सीखना और उन्हें साझा करना भी उतना ही जरूरी है. उनके मुताबिक, एवीपीएन जैसे मंच भारत के जमीनी अनुभवों को दुनिया के सामने रखने के साथ-साथ एशिया और दूसरे देशों में हो रहे अच्छे कामों से सीखने का मौका देते हैं.
उन्होंने कहा कि भारत के लगभग हर हिस्से में आज किसी न किसी रूप में नया प्रयोग और नवाचार हो रहा है. महानगरों से लेकर कृषि मंडियों, शैक्षणिक संस्थानों और छोटे शहरों तक, लोग स्थानीय समस्याओं के नए समाधान खोज रहे हैं.
डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि चाहे कचरा प्रबंधन हो, जलवायु परिवर्तन की चुनौती, सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं, बेहतर कृषि पद्धतियां या समाज के आखिरी व्यक्ति तक नई तकनीक और समाधान पहुंचाने की जरूरत, भारतीय स्टार्टअप और नवाचारकर्ता हर स्तर पर समाधान तलाश रहे हैं.

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यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब अदाणी फाउंडेशन अपनी स्थापना के 30 वर्ष पूरे कर रहा है. एवीपीएन एशिया को सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र का सबसे बड़ा मंच माना जाता है. इससे 43 देशों और बाजारों के 700 से अधिक संसाधन प्रदाता, नवाचारकर्ता और सहयोगी संस्थान जुड़े हैं. यह मंच सामाजिक विकास के लिए पूंजी और संसाधनों को एक साथ लाने का काम करता है.
अदाणी फाउंडेशन ने पिछले तीन दशकों में देश के 22 राज्यों के 7,200 से अधिक गांवों तक अपनी पहुंच बनाई है और 1.3 करोड़ से ज्यादा लोगों के जीवन को प्रभावित किया है. इसके अलावा, अदाणी समूह के अध्यक्ष गौतम अदाणी ने स्वास्थ्य सेवाओं, कौशल विकास और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में 60,000 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता भी जताई है.
डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा कि भारत जब विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तब यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का फायदा आम लोगों और स्थानीय समुदायों तक भी पहुंचे.
उन्होंने कहा कि विकास का असली मतलब तभी है, जब उससे लोगों को बेहतर अवसर मिलें, जीवन की गुणवत्ता सुधरे और वे आत्मनिर्भर बन सकें.
डॉ. प्रीति अदाणी ने भरोसा जताया कि युवाओं, महिलाओं, उद्यमियों और स्थानीय समुदायों को केंद्र में रखकर किए जा रहे निवेश भारत के साथ-साथ वैश्विक दक्षिण के दूसरे देशों के लिए भी ऐसे विकास मॉडल तैयार कर सकते हैं, जिनसे वे सीख सकें और उन्हें अपने स्थानीय हालात के अनुसार अपना सकें.
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