- आईएनएस नीलगिरि ऑस्ट्रेलिया के सिडनी पहुंचकर बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास काकाडू के पहले चरण में भाग ले चुकी है
- अभ्यास का उद्देश्य विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच सहयोग और समुद्री निगरानी तथा आपदा राहत को बढ़ावा देना है
- INS नीलगिरि प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित स्वदेशी स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है, जिसमें ब्रह्मोस लगी है
इंडियन नेवी का मॉडर्न फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरि ऑस्ट्रेलिया के सिडनी पहुंच गया है. इससे पहले आईएनएस नीलगिरि ने एक्सरसाइज काकाडू के पहले चरण में हिस्सा लिया था. यह बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास ऑस्ट्रेलिया की रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी की ओर से आयोजित किया जाता है और हर दो साल में आयोजित होता है. इस वर्ष यह अभ्यास ऑस्ट्रेलियन नेवी के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है, जिसमें आईएनएस नीलगिरि इंडियन नेवी का प्रतिनिधित्व कर रहा है.

बहुपक्षीय अभ्यास का उद्देश्य
काकाडू अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच तालमेल और सहयोग को बेहतर बनाना है. ऐसे समुद्री अभ्यासों में केवल युद्ध से जुड़े अभ्यास ही नहीं, बल्कि समुद्री निगरानी, आपदा राहत और अन्य ऑपरेशंस से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया जाता है. इस बार के अभ्यास में करीब 19 देशों की नेवी हिस्सा ले रही हैं, जिनमें 20 से अधिक युद्धपोत, विमान और 6,000 से ज्यादा नौसैन्य कर्मी शामिल हैं. यह अभ्यास ऑस्ट्रेलिया के डार्विन से लेकर कैर्न्स और जर्विस बे तक फैले समुद्री क्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है.
INS नीलगिरि: स्वदेशी ताकत का प्रतीक
आईएनएस नीलगिरि की यह विदेश तैनाती इंडियन नेवी के लिए एक अहम कदम मानी जा रही है और यह भारत‑ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते समुद्री सहयोग को दर्शाती है. यह नेवी का एक अत्याधुनिक स्वदेशी स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है, जो प्रोजेक्ट 17A के तहत निर्मित पहला युद्धपोत है. आईएनएस नीलगिरि का वजन करीब 6,670 टन है और इसकी लंबाई 149 मीटर है. इसमें ब्रह्मोस मिसाइलों के साथ‑साथ बराक मिसाइल सिस्टम भी तैनात हैं.
वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों की भागीदारी
इस अभ्यास के दौरान ईस्टर्न नेवल कमांड के प्रमुख वाइस एडमिरल संजय भल्ला भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे. वहीं ईस्टर्न फ्लीट के प्रमुख रियर एडमिरल आलोक आनंदा फ्लीट कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में इंडियन नेवी का प्रतिनिधित्व करेंगे. इस दौरान कई बैठकें और गतिविधियां होंगी, जिनका उद्देश्य आपसी समझ बढ़ाना और समुद्र में साथ मिलकर काम करने की क्षमता को मजबूत करना है.

भारत‑ऑस्ट्रेलिया समुद्री सहयोग का संकेत
इस साल फरवरी में विशाखापट्टनम में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में ऑस्ट्रेलिया की ओर से एचएमएस वाररामुंगा युद्धपोत ने हिस्सा लिया था. अब आईएनएस नीलगिरि का इस कार्यक्रम में शामिल होना एक रणनीतिक संकेत भी माना जा रहा है. दक्षिणी गोलार्ध और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में आईएनएस नीलगिरि की तैनाती यह दिखाती है कि भारत इंडो‑पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षित और सहयोगी समुद्री व्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है.
इंडो‑पैसिफिक में भारत का बढ़ता दबदबा
आईएनएस नीलगिरि की भागीदारी सिर्फ एक अभ्यास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इंडो‑पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक सोच को भी दर्शाती है. मौजूदा दौर में यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बन चुका है और भारत इस दिशा में अपनी सक्रियता लगातार बढ़ा रहा है. काकाडू जैसे अभ्यास भारत को अन्य देशों के साथ बेहतर तालमेल बनाने का अवसर देते हैं. इस अभ्यास में वियतनाम, मलेशिया, फिलीपींस और थाईलैंड जैसे आसियान देशों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि भारत क्षेत्रीय सहयोग को कितना महत्व देता है.
इसके साथ ही क्वाड देशों के बीच इस तरह के अभ्यास रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करते हैं. आईएनएस नीलगिरि की वेस्टर्न पैसिफिक में मौजूदगी यह भी दिखाती है कि इंडियन नेवी अब लंबी दूरी तक प्रभावी ऑपरेशन करने में सक्षम हो चुकी है, और इसी क्षमता के कारण इसे ब्लू वॉटर नेवी कहा जाता है.
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