- स्काईरूट एयरोस्पेस शनिवार को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से विक्रम-1 रॉकेट का पहला परीक्षण मिशन लॉन्च करेगा
- विक्रम-1 भारत का पहला प्राइवेट कंपनी द्वारा विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल है जो सैटेलाइट को कक्षा में ले जाएगा
- यह रॉकेट पूरी तरह से हल्के और मजबूत कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर से बना है
विक्रम 1 रॉकेट का 'मिशन आगमन' लॉन्च के लिए तैयार हैं. भारत में पहली बार कोई प्राइवेट कंपनी अपने खुद के ऑर्बिटल रॉकेट से सैटेलाइट्स को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने जा रही है. प्राइवेट अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस शनिवार को अपने पहले ऑर्बिटल क्लास रॉकेट विक्रम-1 का पहला परीक्षण मिशन 'मिशन आगमन' लॉन्च करेगी. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह 11:30 बजे इसे लॉन्च किया जाएगा. देश के प्राइवेट स्पेस के सपने को ऑर्बिट तक ले जाने वाली 10 ऐतिहासिक उपलब्धियों के बारे में जानें
1-भारत का पहला प्राइवेट कंपनी का ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल
विक्रम 1 देश का पहला प्राइवेट तौर पर विकसित रॉकेट है, जिसे सैटेलाइट को ऑर्बिट में पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी लॉन्चिंग देश के सरकारी स्पेस मिशन से इंडस्ट्री-लेड स्पेस मिशन की ओर बढ़ने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है.
2-भारत में पहली बार प्राइवेट कंपनी द्वारा ऑर्बिट तक पहुंचने की कोशिश
यह 'मिशन आगमन' स्काईरूट एयरोस्पेस की पहली ऑर्बिटल टेस्ट फ्लाइट है. यह पहली बार होगा जब देश की कोई प्राइवेट कंपनी अपने रॉकेट से सैटेलाइट्स को ऑर्बिट तक पहुंचाने की कोशिश करेगी.
3-देश का पहला पूरी तरह से कार्बन कम्पोजिट से बना ऑर्बिटल रॉकेट
विक्रम 1 देश का पहला ऐसा ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल बताया जा रहा है, जो पूरी तरह से कार्बन कम्पोजिट स्ट्रक्चर से बना है. यह मटीरियल आम रॉकेट-ग्रेड स्टील की तुलना में हल्का और मजबूत है, जिससे परफॉर्मेंस बेहतर होती है.
4-ऑर्बिटल व्हीकल पर भारत का पहला 100% 3D प्रिंटेड इंजन
विक्रम 1 का ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल पूरी तरह से 3D प्रिंटेड लिक्विड इंजन से चलने वाला है. यह पहली बार है जब किसी भारतीय ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल में इस तरह के इंजन का इस्तेमाल किया जा रहा है.
5-भारत का सबसे लंबा मोनोलिथिक कार्बन कम्पोजिट रॉकेट स्टेज
विक्रम 1 का पहला स्टेज देश का सबसे लंबा मोनोलिथिक कार्बन कम्पोजिट रॉकेट स्टेज है. यह स्वदेशी कम्पोजिट मैन्युफैक्चरिंग और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में हुई तरक्की को दिखाता है.
6-देश में अपनी तरह का पहला अल्ट्रा-लो शॉक न्यूमैटिक सेपरेशन सिस्टम
विक्रम 1 रॉकेट स्टेज और पेलोड फेयरिंग को अलग करने के लिए एडवांस्ड न्यूमैटिक सिस्टम का इस्तेमाल करता है. कंपनी ने बताया कि भारतीय लॉन्च व्हीकल इकोसिस्टम में यह अपनी तरह की पहली टेक्नोलॉजी है.
7-निजी प्राइवेट ऑर्बिटल लॉन्च पर स्पेस मलबे को हटाने का पहला खास डेमोन्स्ट्रेशन
पेलोड में EMBRACE मिशन भी शामिल है, जिसमें भविष्य में स्पेस मलबे को हटाने के लिए डिजाइन की गई रोबोटिक आर्म टेक्नोलॉजी है. इससे 'आगमन' पृथ्वी के भीड़-भाड़ वाले ऑर्बिटल माहौल को साफ करने वाली टेक्नोलॉजी को टेस्ट करने का एक प्लेटफॉर्म बन जाता है.
8-साइंटिफिक आइकॉन को माइक्रो आर्ट ट्रिब्यूट ले जाने वाला पहला भारतीय निजी ऑर्बिटल लॉन्च
इस मिशन में सोने का एक छोटा रॉकेट है, जिसमें डॉ. विक्रम साराभाई, सर सी.वी. रमन और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की बहुत छोटी मूर्तियां लगी हैं. यह कला, विज्ञान और देश की वैज्ञानिक विरासत का एक अनोखा संगम है.
9-लैब में बने हीरे को अंतरिक्ष में ले जाने वाला पहला भारतीय प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट
विक्रम-1 लैब में बने हीरे 'कॉस्मिक ब्लूम' को ले जाएगा. इसे एक कलात्मक पेलोड के तौर पर ऑर्बिट में भेजा जा रहा है. यह मिशन अंतरिक्ष तक कमर्शियल पहुंच को सांस्कृतिक और रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ जोड़ने वाला है.
10-पीएम का संदेश अंतरिक्ष तक ले जाने वाला पहला ऑर्बिटल मिशन
'मिशन आगमन' एक ऐसा पोस्टकार्ड ले जाएगा, जिस पर पीएम नरेंद्र मोदी के हाथ से 'वंदे मातरम' लिखा है. साथ ही दुनिया भर के समर्थकों की सैकड़ों शुभकामनाएं भी होंगी. यह मैसेज भारत की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को उसके नागरिकों की उम्मीदों से प्रतीकात्मक रूप से जोड़ने वाला है. स्काईरूट के मुताबिक, ये यादगार चीजें 'मिशन आगमन' का हिस्सा हैं, जिसे कंपनी ने "कई हाथों से आगे बढ़ाया गया और लाखों लोगों द्वारा साझा किया गया एक उत्सव" बताया.
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