- पिथौरागढ़ प्रशासन भारत-तिब्बत-चीन सीमा व्यापार को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है.
- प्रस्तावित सीमा व्यापार के लिए सड़क, सुरक्षा, संचार, चिकित्सा और व्यापारिक व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया गया.
- कोविड-19 के कारण 2020 में बंद हुआ व्यापार अब कपड़ा, मसाले, कृषि उपकरण सहित कई वस्तुओं के साथ फिर शुरू होगा.
भारत-तिब्बत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा व्यापार को लेकर पिथौरागढ़ जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है. आगामी 1 जून 2026 से प्रस्तावित सीमा व्यापार को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने जिला कार्यालय में संबंधित अधिकारियों के साथ अहम समीक्षा बैठक की. इस बैठक में गुंजी से धारचूला तक सड़क, सुरक्षा, संचार, चिकित्सा और व्यापारिक व्यवस्थाओं की तैयारियों का विस्तार से जायजा लिया गया.
भारत और तिब्बत के बीच व्यापार प्राचीन काल से होता आ रहा है. लेकिन 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह पूरी तरह ठप हो गया था. लंबे अंतराल के बाद यह व्यापार दोबारा शुरू हुआ. उत्तराखंड में मुख्य रूप से लिपुलेख दर्रा (पिथौरागढ़), नेलांग घाटी और गर्तांग गली (उत्तरकाशी) और माणा और नीति दर्रा (चमोली) के जरिए तिब्बत के साथ व्यापार होता था. लिपुलेख दर्रा आज भी कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है.
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कोविड के कारण 2020 में यह व्यापार बंद हो गया था
तिब्बत से होने वाले व्यापार में पहले नमक और जड़ी-बूटियां प्रमुख होती थीं, जबकि अब निर्यात में कपड़ा, मसाले, गुड़ और कृषि उपकरण शामिल होंगे. वहीं, आयात में जैकेट, तिब्बती जूते, पश्मीना, नमक और छिरबी जैसी वस्तुएं आएंगी. कोविड-19 के कारण 2020 में यह व्यापार बंद हो गया था, जिसे अब फिर से शुरू किया जा रहा है. व्यापार की अवधि जून से अक्टूबर तक निर्धारित की गई है.

मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश
बैठक में मोटर और पैदल मार्गों की स्थिति, गुंजी में अस्थायी ट्रेड कार्यालय की स्थापना, सुरक्षा व्यवस्था और व्यापारियों के लिए सुविधाओं पर भी चर्चा हुई. जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि व्यापार शुरू होने से पहले सभी व्यवस्थाएं हर हाल में पूरी कर ली जाएं. उन्होंने गुंजी स्थित भारतीय स्टेट बैंक में बैंकिंग सेवाएं सुनिश्चित करने, कस्टम चौकी पर पर्याप्त स्टाफ तैनात करने और व्यापारियों के लिए शौचालय व अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए. साथ ही पुलिस और आईटीबीपी के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया गया.

प्रस्ताव विदेश मंत्रालय को भेजा जा चुका है
अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने बताया कि धारचूला और गुंजी में अस्थायी व्यापार व कस्टम कार्यालय स्थापित करने की प्रक्रिया जारी है. बॉर्डर ट्रेड पास के लिए प्रस्ताव विदेश मंत्रालय को भेजा जा चुका है और बजट के लिए शासन से मांग की गई है. उपजिलाधिकारी धारचूला को अंतरराष्ट्रीय व्यापार अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जबकि लोक निर्माण, पशुपालन विभाग और कुमाऊं मंडल विकास निगम के अधिकारियों को सहायक व्यापार अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है.
सीमा व्यापार को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए सभी विभागों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं. अब 1 जून से शुरू होने वाले इस व्यापार पर सभी की नजरें टिकी हैं, जिससे सीमांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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