
Samudrayaan Mission: भारत स्पेस सेक्टर में लगातार काम कर रहा है और अब मिशन गगनयान से अंतरिक्ष की ऊंचाइयों को छूने जा रहा है. इसके अलावा भारत अब समंदर की गहराइयों को भी नापने जा रहा है, इसके लिए समुद्रयान मिशन की शुरुआत हो चुकी है और अगर ये सफल रहता है तो भारत ऐसा करने वाला दुनिया का छठा देश बन जाएगा. आइए जानते हैं कि ये मिशन क्या है और इससे भारत को क्या हासिल होने वाला है.
एस्ट्रोनॉट्स के बाद अब एक्वानॉट्स की बारी
अब तक आपने एस्ट्रोनॉट्स का नाम तो खूब सुना होगा, हाल ही में सुभांशु शुक्ला स्पेस स्टेशन होकर आए थे, जो मिशन गगनयान की तैयारी कर रहे हैं. अब एस्ट्रोनॉट्स के बाद भारत में एक्वानॉट्स की चर्चा भी होने वाली है, क्योंकि 2027 तक समुद्रयान मिशन पूरा होने का टारगेट रखा गया है. अगस्त के महीने की शुरुआत में ही भारत के दो एक्वानॉट्स ने फ्रांस के जहाज, नौटिल में सवार होकर अटलांटिक महासागर में हजारों मीटर की यात्रा की. भारत का टारगेट 2027 तक तीन इंसानों को 6,000 मीटर की गहराई तक भेजना है.
भारत के इस मिशन में कमांडर (रिटायर्ड) जतिंदर पाल सिंह ने 5,002 मीटर और आर रमेश ने 4,025 मीटर गहराई नाप डाली. ये समुद्र मंथन भारत को कई रत्न दे सकता है और दुनिया में एक नए मुकाम पर भी पहुंचाने का काम कर सकता है. समुद्र की गहराई में कई ऐसे राज हैं, जिनसे पर्दा उठ सकता है.
क्या है भारत का मिशन समुद्रयान?
- इस मिशन को भारत सरकार की तरफ से साल 2021 में मंजूरी दी गई थी.
- इस मिशन का मकसद समुद्र के संसाधनों का पता लगाने और उनका इस्तेमाल कैसे हो सकता है ये पता लगाना है. इससे भारत की ब्लू इकनॉमी को सपोर्ट मिलेगा.
- गहरे समंदर में खनन, पानी के अंदर चलने वाले व्हीकल्स और रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी विकसित की जाएगी. मैगनीज, कोबाल्ट, कॉपर और निकिल जैसे तत्वों को निकाला जा सकता है.
- समुद्र की जैव विविधता की खोज और संरक्षण के लिए तकनीकी रास्तों की तलाश की जाएगी. यहां के ईको सिस्टम को समझने की कोशिश होगी.
- समंदर की 6 हजार मीटर की गहराई को मापने के लिए एक खास पनडुब्बी डिजाइन की जा रही है, जिसका नाम मत्स्य 6000 रखा गया है.
- मत्स्य 6000 में तीन लोग आ सकते हैं और ये 12 घंटे के मिशन के लिए डिजाइन किया गया है. इमरजेंसी में 96 घंटे तक काम कर सकता है.
क्या हैं बड़ी चुनौतियां?
समुद्रयान मिशन में सबसे बड़ी चुनौती प्रेशर से निपटना होगी. 6 हजार मीटर की गहराई में प्रेशर सरफेस से 600 गुना ज्यादा होता है. ऐसे में लाइफ सपोर्ट सिस्टम को डिजाइन करना एक बड़ी चुनौती होती है. इतनी गहराई में पहुंचकर पनडुब्बी पूरी तरह से ठीक रहनी चाहिए और सभी उपकरण सही से काम करने जरूरी हैं. इतनी गहराई से कम्युनिकेशन करना भी एक बड़ी चुनौती है.
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