Iran Israel Conflict Impact: मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल की जंग से पूरी दुनिया में उठा पटक का माहौल है. इस बीच कच्चे तेल की सप्लाई और बढ़ती कीमतों के बीच भारत ने अपनी स्थिति साफ की है. ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच चल रहे टेंशन की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वाले रास्ते में तनावपूर्ण माहौल है. भारत ने साफ कहा है कि वो कच्चा तेल जहां से भी सबसे सस्ती कीमत में मिलेगा, वहीं से खरीदता रहेगा, चाहे वह कोई भी देश हो.
#HormuzRoute पर बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित और स्थिर है।
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) March 7, 2026
भारत ने अपने कच्चे तेल के स्रोत 27 से बढ़ाकर 40 देशों तक विविधीकृत किए हैं, जिससे आपूर्ति के कई वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित हुए हैं।
राष्ट्रीय हित में भारत वहीं से तेल खरीदता है जहाँ सबसे प्रतिस्पर्धी… pic.twitter.com/N9Dmy05puz
'भारत को तेल मिलने में कोई दिक्कत नहीं है'
सरकार ने कहा, "स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत को तेल मिलने में कोई दिक्कत नहीं है. भारत अब पहले की तुलना में ज्यादा देशों से तेल खरीद रहा है. पहले 27 देशों से खरीदता था, अब 40 देशों से खरीदता है. इसलिए हमारे पास कई विकल्प हैं. भारत हमेशा वहीं से तेल खरीदता है जहां यह सबसे सस्ता मिलता है. अमेरिका ने जो अस्थायी छूट दी है, उसके बावजूद भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा. यह छूट इसलिए दी गई थी क्योंकि मध्य पूर्व में युद्ध चल रहा है. भारत को अपने लिए तेल खरीदने के लिए किसी भी देश से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है."
हाल ही में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा कि वह भारतीय कंपनियों को समुद्र में फंसे रूसी कच्चे तेल को खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट दे रहा है. इसके पीछे तर्क दिया गया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव की वजह से वैश्विक तेल की सप्लाई रुक सकती है.
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को युद्ध का अखाड़ा बना दिया है. दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है. ऐसे में रूस से मिलने वाला सस्ता तेल भारत के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं है.
लगातार बढ़ रहीं कच्चे तेल की कीमतें
शुक्रवार को दुनिया भर में तेल की कीमतें 8.5% बढ़ गईं. पिछले हफ्ते के मुकाबले कुल मिलाकर अभी तक 30% दामों में इजाफा हो चुका है. यह बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव तभी खत्म होगा जब ईरान बिना किसी शर्त के आत्मसमर्पण कर देगा.
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