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This Article is From Jan 23, 2026

AI में भारत 'सेकेंड टियर' नहीं, टॉप देशों में है- स्टैनफोर्ड की रिपोर्ट ही नहीं, ये 4 तथ्य भी कर रहे इशारा

India's AI power Explained: दावोस में वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (WEF) की सालाना बैठक में मॉडरेटर इयान ब्रेमर ने भारत को दूसरे स्तर (टियर) AI पावर करार दिया. फिर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उन्हें आईना दिखा दिया.

AI में भारत 'सेकेंड टियर' नहीं, टॉप देशों में है- स्टैनफोर्ड की रिपोर्ट ही नहीं, ये 4 तथ्य भी कर रहे इशारा
AI में भारत 'सेकेंड टियर' नहीं, टॉप देशों में है!

स्विट्जरलैंड के दावोस में 5 दिनों तक चले वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (WEF) की सालाना बैठक में एक मौका ऐसा भी आया जब एक चर्चा के दौरान मॉडरेटर इयान ब्रेमर के भारत को दूसरे स्तर (टियर) AI पावर करार दिया. मंच पर उस समय भारत के केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव मौजूद थे और उन्होंने इसपर आपत्ति जताई. इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्री वैष्णव ने वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के मोर्चे पर दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है. उन्होंने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी का हवाला दिखाया और बताया कि कैसे AI से जुड़ी तैयारियों के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है. चलिए जानते हैं कि पूरा विवाद क्या था, अश्विनी वैष्णव ने यहां क्या तर्क दिए और भारत कैसे AI के मोर्चे पर किसी भी तरह से दूसरे स्तर का देश नहीं है.

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दावोस में हुआ क्या था?

यह वाकया मंगलवार को दावोस में चल रहे WEF की सालाना बैठक में "AI पावर प्ले" नाम के पैनल डिस्कशन के दौरान हुआ. इस चर्चा में मॉडरेटर इयान ब्रेमर और भारतीय मंत्री के अलावा इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा, माइक्रोसॉफ्ट के अध्यक्ष ब्रैड स्मिथ और सऊदी अरब के निवेश मंत्री खालिद अल-फलीह भी शामिल थे.

चर्चा के दौरान, यूरेशिया समूह के अध्यक्ष इयान ब्रेमर ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शक्तियों के "दूसरे समूह" का हिस्सा बताया. यानी उन्होंने यह सुझाव दिया कि भारत AI के मोर्चे पर दुनिया के लीडर देशों से पीछे है.

अश्विनी वैष्णव ने क्या जवाब दिया?

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका विरोध करते हुए स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग का हवाला देते हुए कहा कि भारत AI देशों में विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर है.  उन्होंने कहा, "ROI सबसे बड़े मॉडल बनाने से नहीं आता है. वास्तविक दुनिया के लगभग 95 प्रतिशत AI उपयोग के मामलों में 20-50 बिलियन पैरामीटर रेंज के मॉडल का उपयोग होता है."

नोट- ROI मतलब रिटर्न ऑन इनवेस्टमेंट यानी निवेश पर रिटर्न. AI के मामले में ROI एक परफॉर्मेंस मीट्रिक है. इसका उपयोग AI के मोर्चे पर हुई पहलों और उनमें लगी लागत की तुलना करके वो कितनी किफायती और फायदेमंद है, इसे मापने के लिए किया जाता है.

अश्विनी वैष्णव ने साफ-साफ कहा कि भारत की AI को लेकर जो रणनीति है, वह केवल बड़े मॉडल बनाने के बजाय उसके आर्थिक रूप से टिकाऊ होने और वास्तविक दुनिया में उसके इस्तेमाल पर केंद्रित है. अश्विनी वैष्णव ने कहा, "मुझे नहीं पता कि IMF का मानदंड क्या है, लेकिन स्टैनफोर्ड AI तैयारियों के लिए भारत को दुनिया में तीसरे स्थान पर रखता है. मुझे नहीं लगता कि आपने जो क्लासिफिकेशन किया है (भारत को दूसरे टियर में रखना) ,वह सही है."

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भारत की उपलब्धियों पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्टैनफोर्ड AI पेनेट्रेशन और उससे जुड़ी तैयारियों में विश्व स्तर पर भारत को तीसरे स्थान पर रखता है. साथ ही भारत AI प्रतिभा में दूसरे स्थान पर है. उन्होंने बताया कि 38,000 से अधिक GPU को एक साझा राष्ट्रीय कंप्यूटिंग सुविधा (shared national compute facility) में लिस्ट किया गया है. इसतक छात्रों, रिसर्चर्स और स्टार्टअप की पहुंच के लिए इसे सब्सिडी दी गई है. साथ ही भारत के राष्ट्रव्यापी  AI कौशल कार्यक्रम का लक्ष्य 1 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करना है.

भारत AI में टॉप देशों में क्यों शामिल?

1- स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी

स्टैनफोर्ड  यूनिवर्सिटी का ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल रिसर्च, प्रतिभा, बुनियादी ढांचे, आर्थिक प्रभाव, नीति, जिम्मेदार AI और जनता की राय के आधार पर AI के मोर्चे पर देशों के बीच प्रतिस्पर्धात्मकता का आकलन करता है. इसने साल 2024 के डेटा का उपयोग करते हुए 2025 के लिए जो रैंकिंग की थी, उसमें अमेरिका को पहले, चीन को दूसरे और भारत को तीसरे स्थान पर रखा था.

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यूके, साउथ कोरिया, सिंगापुर और जापान जैसे देशों को पीछे छोड़ते हुए भारत आगे आया है. 2024 में वो 7वें स्थान पर था और 2025 में वो सीधे तीसरे स्थान पर आ गया. इतना ही नहीं 21.59 के वाइब्रेंसी स्कोर के साथ, भारत कई एडवांस इकनॉमी वाले देशों से आगे है.इस स्टडी में AI प्रतिभा, रिसर्च आउटपुट, इनोवेशन और इकोसिस्टम गतिविधि में भारत की तीव्र वृद्धि को दर्शाया गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि अमेरिका और चीन की तुलना में निवेश स्तर और अत्याधुनिक AI विकास में भारत में अंतर बना हुआ है.

2- IMF क्या मानता

चर्चा के बाद पैनल में शामिल IMF की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा, "मुझे रिकॉर्ड पर यह बात रखने दें कि हम भारत की प्रशंसा करते हैं. वह सुधारों, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और अपनी IT-कुशल श्रम शक्ति के संबंध में कैसे विकसित हुआ है."

उन्होंने चर्चा में मॉडरेटर ब्रेमर की टिप्पणी को छोटी गलती बताया और कहा कि मॉडरेटर ने IMF के दृष्टिकोण को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है. उन्होंने कहा, "मॉडरेटर अनुमान लगा रहे थे. हमारा मानना ​​है कि भारत AI विकसित करने में प्रमुख शक्तियों में से एक है. हम AI की वजह से वैश्विक स्तर के विकास को 0.8 प्रतिशत तक बढ़ाने की क्षमता का आकलन करते हैं. AI के साथ, यह केवल बेहतर होगा. जिस तरह से भारत अलग-अलग रास्ते चुनने वाले दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए AI का रुख करता है, उससे मैं प्रभावित हूं."

3- ₹10,300 करोड़ से अधिक का निवेश और 38,000 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU)

भारत AI द्वारा संचालित एक नए युग के शिखर पर खड़ा है, जहां यह टेक्नोलॉजी जीवन बदल रही है और देश की प्रगति को आकार दे रही है. AI अब रिसर्च लैब या बड़े कॉर्पोरेशन तक सीमित नहीं है. यह हर स्तर पर नागरिकों तक पहुंच रहा है. यह समावेशी दृष्टिकोण नीति आयोग की रिपोर्ट, समावेशी सामाजिक विकास के लिए एआई (अक्टूबर 2025) में भी दिखता है. रिपोर्ट दिखाती है कि कैसे AI स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, कौशल और वित्तीय समावेशन तक पहुंच बढ़ाकर भारत के 4.90 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों को सशक्त बना सकता है. 

"भारत में AI बनाना और AI को भारत के लिए काम करना" के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, भारत सरकार की कैबिनेट ने मार्च 2024 में पांच वर्षों में ₹10,371.92 करोड़ के बजट परिव्यय के साथ भारत AI मिशन को मंजूरी दी थी. यह मिशन भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में ग्लोबल लीडर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम है. अपने लॉन्च के बाद से, मिशन ने देश के कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे के विस्तार में मजबूत प्रगति की है. 10,000 जीपीयू के प्रारंभिक लक्ष्य से, भारत ने अब 38,000 जीपीयू हासिल कर लिया है, जो विश्व स्तरीय AI संसाधनों तक किफायती पहुंच प्रदान करता है.

4- भारत में तेजी से बढ़ता AI इकोसिस्टम

IT मंत्रालय द्वारा 30 दिसंबर 2025 को जारी प्रेस नोट के अनुसार भारत का टेक क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है, इस वर्ष वार्षिक राजस्व 280 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार करने का अनुमान है. अभी भारत में टेक और AI इकोसिस्टम में 60 लाख से अधिक लोग काम करते हैं. देश में 1,800 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र (Global Capability Centres) हैं, जिनमें 500 से अधिक AI पर केंद्रित हैं।

भारत में लगभग 1.8 लाख स्टार्टअप हैं, और पिछले साल लॉन्च हुए लगभग 89% नए स्टार्टअप ने अपने उत्पादों या सेवाओं में AI का उपयोग किया है. NASSCOM AI एडॉप्शन इंडेक्स पर, भारत को 4 में से 2.45 अंक मिले हैं, जिससे पता चलता है कि 87% उद्यम सक्रिय रूप से AI समाधानों का उपयोग कर रहे हैं. AI अपनाने में अग्रणी क्षेत्रों में औद्योगिक और ऑटोमोटिव, उपभोक्ता सामान और खुदरा, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा और स्वास्थ्य सेवा शामिल हैं. साथ में वे AI के कुल मूल्य में लगभग 60 प्रतिशत का योगदान करते हैं. हाल ही में बीसीजी सर्वे के अनुसार, लगभग 26% भारतीय कंपनियों ने बड़े पैमाने पर AI परिपक्वता (मैच्यूरिटी) हासिल कर ली है.

यह भी पढ़ें: AI में भारत कितना दमदार, IMF चीफ ने अश्विनी वैष्णव से विवाद पर दी सफाई

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