पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस (PPAC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक मध्यपूर्व एशिया में युद्ध की वजह से 17 मार्च, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत बढ़कर US$ 146.09/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गए.इससे पहले ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 18 साल पहले, 2008 में 147 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंची थी.
कच्चा तेल महंगा होने की वजह से 01 मार्च से 17 मार्च, 2026 के बीच कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत बढ़कर US$ 111.39/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है.पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, फरवरी 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी.मध्य पूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से अब तक कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत फरवरी के औसत कीमत के मुकाबले 17 मार्च, 2026 तक 42.38 अमेरिकी डॉलर/बैरल तक बढ़ चुकी है, यानि 61.41% महंगी! पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से भारत सरकार वे तेल के आयात के लिए वैकल्पिक व्यवस्था को एक्टिवेट कर दिया है.
बुधवार को पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि सभी रिफाइनरियां पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ पूरी क्षमता से काम कर रही हैं. भारत में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त उत्पादन है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आयात की आवश्यकता नहीं है.पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, भारत की क्रूड सप्लाई secured है. भारत में हर दिन की खपत 55 लाख बैरल कच्चे तेल की है. औसतन Strait of Hormuz से जितना कच्चा तेल आता है उससे ज़्यादा क्रूड ऑयल की सप्लाई डायवर्सिफिकेशन के ज़रिये दूसरे रूट से मैनेज कर लिया गया है.भारत आज 40 देशों से क्रूड आयात करता है. भारत में 70% से ज़्यादा क्रूड ऑयल का आयात आज Strait of Hormuz के अलावा दूसरे समुद्री मार्गों से आ रही है, पहले ये 55% होता था.
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