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This Article is From Jan 31, 2018

झारखंड और उत्तर पूर्व के दूरदराज के इलाकों में पढ़ायेंगे IIT के छात्र

देश के इन जाने माने संस्थानों से पास आउट अब दूर दराज के इलाकों के इंजीनियरिंग और टेक्नीकल कॉलेजों में पढ़ायेंगे.

झारखंड और उत्तर पूर्व के दूरदराज के इलाकों में पढ़ायेंगे IIT के छात्र
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली: सरकार ने आम बजट से ठीक एक दिन पहले घोषणा की कि उसने दूर दराज़ के उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाने के लिए 1225 फैकल्टी नियुक्ति की है, जो अगले 3 साल तक 'देशसेवा की भावना' से काम करेंगे. इस योजना के लिये 375 करोड रुपये का बजट रखा गया है.

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देश के इन जाने माने संस्थानों से पास आउट अब दूर दराज के इलाकों के इंजीनियरिंग और टेक्नीकल कॉलेजों में पढ़ायेंगे. सरकार ने ऐसे 1225 पीएचडी और मास्टर्स डिग्री धारकों का चयन किया है. इनमें से ज्यादातर आईआईटी और एनआईटी जैसे उच्च संस्थानों से हैं. ये झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार, उड़ीसा और उत्तरपूर्व समेत पिछड़े राज्यों के 53 संस्थानों (सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज) में जाकर 3 साल तक पढ़ायेंगे. इन्हें असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कॉन्ट्रेक्ट में रखा गया है और 70 हजार रुपये महीना दिया जाएगा.

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सरकार कहती है कि ये छात्र देशभक्ति की भावना से प्रेरित होकर इन इलाकों में काम करने जा रहे हैं, लेकिन सच यह भी है कि बाज़ार में अभी नौकरियों की भारी कमी है और इनके प्रीमियर संस्थानों के पास आउट इस पद दी जाने वाली तनख्वाह से कम पर ये सेवा देने को तैयार हुए हैं. मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक कोई 5000 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था.

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प्रकाश जावड़ेकर ने कहा ये काफी हौसला बढ़ाने वाला कदम है, क्योंकि इन इलाकों में फैकल्टी की नियुक्ति हो रही है, जहां पद खाली पड़े थे. प्रकाश जावड़ेकर के मुताबिक कुछ संस्थानों में तो 60 फीसद पद खाली थे. सरकार का कहना है कि इन छात्रों ने जाकर पढ़ाने का काम शुरू कर दिया है, लेकिन एक सवाल ये भी है कि ठेके पर की गई इन नियुक्तियों से क्या एससी-एसटी कोटे के उम्मीदवार की अनदेखी नहीं हुई, जो कि इस श्रेणी के उम्मीदवारों का संवैधानिक अधिकार है.. जावड़ेकर ने इस सवाल के जवाब में कहा कि जब स्थाई नियुक्तियां होंगी तो आरक्षण नीति का पालन किया जाएगा. 
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