IAS Vinay Kumar Langeh Success Story : छत्तीसगढ़ कैडर के IAS अधिकारी विनय कुमार लंगेह अपनी कार्यशैली और नवाचारों के कारण इन दिनों सुर्खियों में हैं. कोरिया से लेकर महासमुंद तक... जहां भी पोस्टिंग मिली वहां उन्होंने नई मिसाल पेश की. कभी सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहे IAS विनय कुमार ने नौकरी छोड़कर UPSC की कठिन राह चुनी और और कई असफलताओं के बाद 2015 में 477वीं रैंक हासिल कर आईएएस बने. बता दें कि छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में कलेक्टर रहते हुए विनय कुमार लंगेह ने (IAS officer Vinay Kumar Langeh) एक अनूठी मिसाल पेश की है, जिससे 551 ग्राम पंचायतों के 1140 से अधिक गांवों की तस्वीर बदल गई. महज 15 दिनों में 3.41 लाख जल संरक्षण संरचनाएं बनाकर उन्होंने पहली ही बारिश में 31 करोड़ लीटर पानी का संचय करवाया, जो आज प्रशासनिक नवाचार की मिसाल बन चुका है. हालांकि कलेक्टर विनय कुमार ने कहते हैं कि यह सफलता सिर्फ जनभागीदारी से मिली है. ऐसे में यहां आपको बताते हैं इस IAS अफसर के बारे में सबकुछ...
एक इनोवेशन से 1140 गांवों की बदल गई तस्वीर
वर्तमान में विनय कुमार लंगेह महासमुंद जिले के कलेक्टर (Mahasamund Collector Vinay Kumar Langeh) के पद पर कार्यरत हैं. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई नवाचारी पहलें की हैं, जिनकी बदौलत जिले को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान मिली है. बता दें कि 'जल संचय जनभागीदारी अभियान 2.0' के अंतर्गत महासमुंद जिले को जोन-2 की कैटेगरी-2 में देशभर में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ. इसके लिए भारत सरकार ने जिला प्रशासन को एक करोड़ रुपये की नकद राशि से सम्मानित किया.
शानदार काम कर विनय कुमार लंगेह ने दिखाया कमाल
वहीं इस बारिश के मौसम में जिला कलेक्टर की पहल से 1140 से अधिक गांवों में महज 15 दिनों में बारिश की 31 करोड़ लीटर पानी का संचय किया गया, जबकि पहले यह पानी सीधे बहकर नालों और नदियों में चला जाता था और यहां हर साल पानी की कमी से हजारों ग्रामीण जूझते थे. 'मोर गांव-मोर पानी'अभियान के तहत घरों में सोख्ता गड्ढे तैयार किए गए और बारिश की हर बूंद को बचाने का अभियान चलाया गया. महज 15 दिनों के भीतर जिले में 17 प्रकार की कुल 3 लाख 41 हजार जल संरक्षण संरचनाएं तैयार की गई, जिनमें रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सोख्ता गड्ढे, सोकपिट, ब्रश वुड संरचनाएं, लघु जल संरक्षण संरचनाएं, वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच, स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच, कंटीन्यूअस कंटूर ट्रेंच और नालों पर बनाए गए बोरी बंधान शामिल हैं. इसके अलावा मनरेगा और विभिन्न विभागों के समन्वय से तालाब, गेबियन, डबरी और कूप जैसी संरचनाओं का निर्माण भी किया गया.

IAS Vinay Kumar Langeh
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कलेक्टर विनय कुमार बोले- 'जनभागीदारी से मिली सफलता'
महासमुंद कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने NDTV को बताया, 'मोर गांव, मोर पानी 2.0' अभियान को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया गया. इस अभियान में कृषि विभाग, जिला पंचायत, वन विभाग और जनपद पंचायत सहित कई विभागों ने मिलकर काम किया. साथ ही आम लोगों से भी अपने स्तर पर सोख्ता गड्ढे और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं बनाने की अपील की गई.
सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी छोड़ विनय लंगेह ने क्रैक किया UPSC
13 दिसंबर 1988 को जन्मे विनय कुमार लंगेह जम्मू-कश्मीर के बाहु फोर्ट क्षेत्र के निवासी हैं. उनके पिता श्याम लाल लंगेह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) कार्यालय में वरिष्ठ लेखा परीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि उनकी मां संतोष लंगेह गृहिणी हैं. विनय लंगेह ने अपनी स्कूली शिक्षा जम्मू के सेंट पीटर्स स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रणवीर हायर सेकेंडरी स्कूल जम्मू से 12वीं की पढ़ाई पूरी की. वहीं 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जामिनेशन (AIEEE) पास किया और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) श्रीनगर में कंप्यूटर साइंस शाखा में दाखिला लिया. बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने करीब डेढ़ साल तक गुरुग्राम की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में नौकरी की.

IAS Vinay Kumar Langeh
तीसरे प्रयास में हासिल की थी सफलता
इसी दौरान उन्होंने UPSC परीक्षा में भी भाग लिया, लेकिन पहली कोशिश में सफलता नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए. दूसरे प्रयास में विनय लंगेह इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम मेरिट सूची में जगह नहीं बना सके. हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में साल 2015 में 477वीं रैंक हासिल कर यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त की.
जहां पोस्टिंग वहां कर दिखाया कमाल
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर एलॉट हुआ. उनकी पहली पोस्टिंग बिलासपुर जिले में सहायक कलेक्टर के पद पर हुई. इसके बाद उन्हें महासमुंद जिले के सरायपाली में एसडीएम बनाया गया. जहां उन्होंने न सिर्फ लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव और नगरीय निकाय चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराए बल्कि लोगों के सहयोग से इलाके में विकास के ढेरों कार्य भी किए. इसके बाद उन्होंने गरियाबंद और अंबिकापुर में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के रूप में भी सेवाएं दीं. अपनी कार्यकुशलता, नवाचारी सोच और जनहितकारी पहलों के कारण उन्होंने हर पद पर अपनी अलग पहचान बनाई.
कलेक्टर के तौर पर विनय की पहली पोस्टिंग कोरिया जिले में हुई. अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जिले में प्रसिद्ध ‘झुमका जल महोत्सव' की शुरुआत कराई, जिसे लोगों का व्यापक समर्थन मिला और इस दो दिवसीय आयोजन में 20 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए. इसके अलावा उन्होंने ‘कोरिया मिलेट्स कैफे' की भी शुरुआत करवाई. इस पहल से पहले ही वर्ष में 75 लाख रुपये का कारोबार किया. उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भी कई प्रभावी कदम उठाए.
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