- ईरान-इजरायल तनाव की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और पर्शियन गल्फ में सप्लाई चेन बाधित हो गई है
- भारत के विभिन्न बंदरगाहों पर करीब 38,000 कंटेनर फंसे हुए हैं, जिनमें बासमती चावल और ताजा फल प्रमुख हैं
- मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट पर 5,400 टन प्याज सहित हजारों कंटेनर फंसे हैं.
ईरान-इजरायल और अमेरिका जंग से दुनियाभर के देश चिंता में हैं. इस संकट का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और पर्शियन गल्फ से गुजरने वाली सप्लाई चेन बाधित है. तनाव की वजह से समुद्री रास्ते बंद हैं, जहाजों की आवाजाही ठीक से नहीं हो रही. इस वजह से सामान दूसरे देशों तक पहुंच ही नहीं पा रहा, जहां पहुंच भी रहा है, वहां स्पीड बहुत स्लो है. जिसकी वजह से भारतीय एक्सपोर्ट प्रभावित हो रहा है. बड़ी संख्या में कंटेनर देश के अलग-अलग बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं. इन कंटेनरों की तादात करीब 38,000 बताई जा रही है.
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बंदरगाहों पर कितना सामान फंसा?
बासमती चावल: 4 लाख टन (2 लाख टन भारतीय बंदरगाहों पर, 2 लाख टन ट्रांज़िट में)
ताजा अंगूर: 5,000–6,000 टन (300+ कंटेनर)
प्याज: 5,400 टन (150–200 कंटेनर, मुख्यतः नासिक से)
केला और अनार: 1,000+ रीफ़र यूनिट्स में सैकड़ों टन
फ्रोजन बफेलो मीट: 300+ पेरिशेबल कंटेनर में बड़ी मात्रा
कुल मिडिल ईस्ट-बाउंड कंटेनर: 23,000 यूनिट्स विभिन्न पश्चिमी बंदरगाहों पर फंसे
नवी मुंबई पोर्ट पर कितना और कौन-कौन सा सामान फंसा?
बात अगर मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट की करें तो वहां पर 1,000 से ज्यादा एक्सपोर्ट कंटेनर फंसे हुए हैं. इन कंटेनरों में प्याज, अंगूर और पपीता समेत खाने पीने का अन्य सामान, कृषि एवं अन्य वस्तुएं मौजूद है. करीब 150 कंटेनरों में नासिक से जाने वाला प्याज है. बताया जा रहा है कि सभी कंटेनरों को मिलाकर कुल 5,400 टन प्याज फंसा हुआ है. बता दें कि दुबई के रास्ते ये सामान खाड़ी देशों में भेजा जाता है. लेकिन जंग की वजह से समुद्री रास्ते बंद है तो ये सामान मुंबई पोर्ट पर ही फंसा हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यातक बंदरगाहों पर फंसे कंटेनरों को वापस मंगवा रहे हैं, ताकि उनको मोटी फीस न भरनी पड़े. दरअसल वे नहीं जानते कि हालात कब तक खराब रहेंगे और उनका सामान बंदरगाहों पर ही फंसा रहेगा.

किन उद्योगों पर खास तौर पर पड़ा है असर?
भारतीय बंदरगाहों से गाड़ियां, फार्मास्यूटिकल्स, इंडस्ट्रियल सामान, स्टील, खेती के प्रोडक्ट और कंटेनर सप्लाई होते हैं. इनमें प्याज, चाय, केला, अंगूर, पपीता, अनार, चावल, फ्रोजन बफेलो मीट सबसे ज्यादा सप्लाई होता है. केले से लदे कई कंटेनर बंदरगाह में अटके हैं. युद्ध कब खत्म होगा, निर्यातकों को इस बात का इंतजार है, ताकि उनका माल खाड़ी देशों तक पहुंच सके.
रमजान के महीने में बासमती चावल का होता है बंपर निर्यात
रमजान के दौरान मिडिल ईस्ट देशों, जासे सऊदी, ईरान, अबर, इराक और यूएई में भारत के बासमती चावल की मांग सबसे ज्यादा होती है, खासकर फरवरी-मार्च में. इसे नवी मुंबई बंदरगाह से मुख्य रूप से खाड़ी देशों में भेजा जाता है. लेकिन अभी समुद्र में जहाज फंसे हैं. माल आगे जा ही नहीं पा रहा. बात अगर साल 2025 के अप्रैल-दिसंबर की करें तो 32 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा बासमती चावल का निर्यात मिडिल ईस्ट में किया था. फिलहाल जंग का माहौल है, ऐसे में देशभर में, बासमती चावल के करीब 3,000 कंटेनर बंदरगाहों पर अटके हैं. गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर चावल के करीब 2,000 कंटेनर फंसे हैं. वहीं नवी मुंबई में 1 हजार के करीब कंटेनर फंसे हैं.
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