राज्यसभा में जेडीयू कोटे से भेजे गए हरिवंश के रिटायर होने के बाद उच्च सदन में बिहार से एनडीए कोटे से राजपूत जाति के सांसद शून्य हो गए थे. इसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा भी छिड़ गई थी. लेकिन केंद्र की बीजेपी सरकार ने इसकी काट ढूंढ ली और हरिवंश को मनोनीत कोटे से ऊपरी सदन भेज दिया है. इस एक दांव से एनडीए ने कई निशाने साध लिए हैं.
नीतीश के बाद जल्द ही बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन, जेडीयू के रामनाथ ठाकुर, आरएलएम चीफ उपेंद्र कुशवाहा और बीजेपी नेता शिवेश राम राज्यसभा में शपथ लेंगे. अगर राज्यसभा के नए समीकरण पर गौर करें तो बिहार कोटे से उच्च सदन में राजपूत बिल्कुल साफ, भमियार आधे और ओबीसी बढ़ जाएंगे. लेकिन अब राज्यसभा में बिहार कोटे से एक राजपूत सांसद जरूर बना रहेगा.
हरिवंश की जगह नीतीश भेजे गए राज्यसभा
कल ही राज्यसभा के सदस्य के तौर पर हरिवंश का पिछला कार्यकाल समाप्त हुआ था. 2018 से हरिवंश लगातार राज्यसभा के उपसभापति का पद भी संभाल रहे हैं. 2014 से वो जेडीयू की ओर से राज्यसभा भेजे गए थे लेकिन इस बार उनकी जगह नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजने का फैसला हुआ जिसके चलते उनका नाम कट गया.
शुक्रवार सुबह-सुबह जेडीयू नेता और राज्यसभा के पूर्व उपसभापति हरिवंश के लिए एक अच्छी ख़बर आई. जिस बात को लेकर सियासी गलियारे में कई दिनों से अटकलें लगाई जा रही थी, उसपर मुहर लग गई. हरिवंश को राष्ट्रपति की ओर से राज्यसभा का मनोनीत सदस्य घोषित किया गया. वो लगातार तीसरी बार राज्यसभा के सदस्य बने हैं. 2014 और 2020 में उन्हें जेडीयू की तरफ़ से राज्यसभा भेजा गया था. माना जा रहा है कि उनको राज्यसभा भेजकर बीजेपी ने एक तीर से दो निशाना साधने की कोशिश की है.
9 अप्रैल को खत्म हुआ हरिवंश का कार्यकाल, फिर नॉमिनेट
राज्यसभा सदस्य के तौर पर हरिवंश का कार्यकाल 9 अप्रैल यानि कल ही ख़त्म हुआ है. इसके चलते पिछले कई दिनों से ये चर्चा शुरू हो गई थी कि उनकी जगह राज्यसभा का अगला उपसभापति या ड्यूटी चेयरमैन कौन बनेगा? आंकड़ों के लिहाज़ से देखें तो केंद्र सरकार में शामिल एनडीए सहयोगियों में बीजेपी के बाद सबसे बड़ा दल चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी है, जिसके लोकसभा में 16 सांसद हैं. जेडीयू तीसरे नंबर पर है जिसके 12 सांसद हैं. ऐसे में उपसभापति का पद सरकार के लिए बड़ी सिरदर्दी साबित हो सकती थी क्योंकि हरिवंश के हटने के बाद उसपर टीडीपी दावा कर सकती थी.
याद रखना चाहिए कि लोकसभा का उपाध्यक्ष पद पिछले 7 सालों से खाली है और कुछ महीनों पहले जब चर्चा शुरू हुई कि उसे भरा जाएगा तो टीडीपी ने उसकर अपना दावा ठोंक दिया था. अब समझा जा रहा है कि हरिवंश को राज्यसभा का मनोनीत सदस्य बनाकर बीजेपी और सरकार ने ये भी संदेश देने की कोशिश की है कि वो हरिवंश को ही उपसभापति के पद पर बनाए रखना चाहती है.
बीजेपी सियासी समीकरण साधने में सफल
राजनीतिक तौर पर भी देखा जाए तो राजपूत समाज से आने वाले हरिवंश को उपसभापति बनाकर सामाजिक समीकरण को भी साधा जा रहा है. अगर हरिवंश को उपसभापति बनाए रखा जाता है उस बात की भी भरपाई की जा सकेगी कि फ़िलहाल केंद्र में बिहार के राजपूत समाज से आने वाले कोई मंत्री नहीं हैं.
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