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कौन हैं मनीष वर्मा जिन्हें नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी माना जा रहा है

मनीष वर्मा ने 2018 में आईएएस की नौकरी से वीआरएस ले लिया था. वो ओडिशा कैडर के आईएएस थे, बाद में कैडर बदलकर बिहार में आ गए थे. वीआरएस लेने के बाद वो लगातार नीतीश कुमार के साथ नजर आ रहे थे. लोकसभा चुनाव में भी मनीष वर्मा ने सक्रिय भूमिका निभाई थी.

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कौन हैं मनीष वर्मा जिन्हें नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी माना जा रहा है
नई दिल्ली:

पिछले कई सालों से नीतीश कुमार के साथ साए की तरह नजर आने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी मनीष वर्मा जेडीयू में शामिल हो गए हैं.उन्हें पार्टी की सदस्यता कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने दिलाई.बिहार के राजनीतिक हलके में चर्चा इस बात की है कि मनीष वर्मा पार्टी में आरसीपी सिंह की जगह लेंगे.उम्र के पांचवें दशक में चल रहे मनीष को नीतीश के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है. वो भी आरसीपी की ही तरह कुर्मी जाति के ही हैं. 

कौन हैं मनीष वर्मा

मनीष ओडिशा कैडर के 2000 बैच के अधिकारी थे. उन्होंने 2018 में नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) ले लिया था. कहा जाता है कि उन्होंने यह कदम नीतीश कुमार के कहने पर उठाया था.इसके बाद से ही वो नीतीश कुमार के करीबी के रूप में काम कर रहे थे. माना जा रहा है कि मनीष को जेडीयू का महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी दी जा सकती है.वो बिना किसी पद के ही पिछले एक साल से जेडीयू की संगठनात्मक गतिविधियों में लगे हुए थे.

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वो बिहार में पटना और पूर्णिया  के डीएम रह चुके हैं. मनीष वर्मा और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दोनों ही नालंदा जिले के ही रहने वाले हैं. मनीष के पिता डॉक्टर अशोक वर्मा बिहारशरीफ के मशहूर डॉक्टर थे.मनीष वर्मा को जेडीयू में नीतीश कुमार के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है.

जेडीय के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने जब मनीष वर्मा को पार्टी की सदस्यता दिलाई तो बिहार के जलसंसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी भी मौजूद थे.

जेडीयू में मनीष वर्मा की भूमिका

मनीष वर्मा बिना किसी पद के ही पिछले एक साल से जेडीयू की संगठनात्मक गतिविधियों में लगे हुए थे.वे जेडीयू के लोकसभा चुनाव अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हुए. उन्होंने उन सभी 16 लोकसभा सीटों का लगातार दौरा किया, जहां से जेडीयू चुनाव मैदान में थी.जेडीयू ने इस बार के लोकसभा चुनाव में 12 सीटों पर जीत दर्ज की है. इसके बाद जेडीयू ने केंद्र में नरेंद्र मोदी की तीसरी सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित जेडीयू की बैठक में राज्य सभा सदस्य संजय झा को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुना  गया था. अब मनीष वर्मा को महासचिव (संगठन) के पद पर बैठाए जाने की चर्चा है. इसे नीतीश कुमार की अपनी पार्टी और वोटर पर पकड़ मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. यह अगड़ा-पिछड़ा गठबंधन की भी तरह है.

जेडीयू में शामिल होकर क्या कहा?

जेडीयू में शामिल होने के बाद मनीष वर्मा ने कहा,''यह मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है. जेडीयू ज्वाइनिंग फॉर्म के कागज के एक छोटे से टुकड़े ने मुझे यूपीएससी परीक्षा के पेपर लिखने जितना परेशान कर दिया. मैं सोच रहा था कि पार्टी ज्वाइनिंग फॉर्म में अपने पेशे का कॉलम कैसे भरें. यह कोई सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नहीं हो सकता.मैंने समाज सेवा लिखा''

वर्मा ने कहा कि उन्होंने माओवाद प्रभावित मलकानगिरी सहित ओडिशा के तीन जिलों में कलेक्टर के रूप में काम किया. वह 2012 में बिहार चले आए,यहां उन्हें राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग में निदेशक के रूप में पहली पोस्टिंग मिली.इसके बाद उन्हें पूर्णिया और पटना का जिलाधिकारी बनाया गया. 

जेडीयू में नौकरशाह

जेडीयू के महासचिव संगठन पद पर पहले भी एक पूर्व नौकरशाह आरसीपी सिंह बैठाया गया था.लेकिन उनका नीतीश कुमार से मतभेद हो गया था.इसके बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता पकड़ना पड़ा था. आरसीपी सिंह को जेडीयू में नीतीश कुमार के बाद दूसरा स्थान हासिल था.पार्टी ने उन्हें अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष तक बनाया था. वो केंद्र सरकार में भी मंत्री रहे. लेकिन इसी के बाद उनकी नीतीश कुमार से नहीं बन पाई.

मनीष वर्मा (बाएं) को जेडीयू की सदस्यता दिलाते संजय झा (दाएं)

मनीष वर्मा जेडीयू में शामिल होने वाले सातवें नौकरशाह हैं.इनसे पहले एनके सिंह, पवन वर्मा, आरसीपी सिंह, केपी रमैया, गुप्तेश्वर पांडेय और सुनील कुमार ने भी जेडीयू की सदस्यता ली थी. इनमें से एनके सिंह, पवन वर्मा और आरसीपी सिंह पार्टी के राज्यसभा सदस्य रहे. पूर्व आईपीएस सुनील कुमार अभी नीतीश कुमार मंत्रिमंडल में शामिल हैं. वहीं केपी रमैया और गुप्तेश्वर पांडेय की राजनीतिक पारी बहुत नहीं चल पाई थी. 

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