- ओडिशा की सजा समीक्षा बोर्ड ने दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की अर्जी 31 अगस्त को खारिज कर दी.
- दारा सिंह ने 25 साल से ज्यादा जेल में रहने का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट में रिहाई की मांग की थी.
- 1999 में ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटों को भीड़ ने जिंदा जला दिया था.
ग्राहम स्टेन्स मामले में सुप्रीम कोर्ट को आज यानी 17 सितंबर को बताया गया कि ओडिशा राज्य की सजा समीक्षा बोर्ड ने दारा सिंह (रवींद्र कुमार) की वक्त समय से पहले रिहाई की अर्जी खारिज कर दी है. दारा सिंह ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. उन्होंने सजा में छूट की अर्जी दाखिल की थी. जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच को ओडिशा राज्य के वकील ने बताया कि 31 अगस्त को उनकी सजा कम करने की अर्जी को खारिज करने का आदेश जारी किया गया था.
SC में देर से क्यों हुई सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट पिछली दो सुनवाइयों में इस मामले को इसलिए टाल चुका था क्योंकि अदालत को बताया गया था कि दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई की याचिका पर राज्य सरकार ने अभी फैसला नहीं लिया है.
पिछली सुनवाई में बेंच ने चेतावनी दी थी कि अगर अगली तारीख तक फैसला नहीं लिया गया तो उसके पास राज्य के सचिव को तलब कर देरी पर स्पष्टीकरण मांगने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा.
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25 साल से ज्यादा जेल में रहने का दिया था हवाला
दारा सिंह ने 2024 में सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर समयपूर्व रिहाई की मांग की थी. उसका कहना था कि वह 25 साल से ज्यादा वक्त जेल में बिता चुका है.
याचिका में ओडिशा की रिमीशन पॉलिसी का हवाला देते हुए कहा गया था कि जिन कैदियों की मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदला गया हो और जिन्होंने 25 साल की कैद पूरी कर ली हो, उनकी रिमीशन पर विचार किया जा सकता है.
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23 साल पहले हुई थी सजा
दारा सिंह को 2003 में ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी. 2005 में ओडिशा हाईकोर्ट ने उसकी मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में इस फैसले की पुष्टि की थी. अपनी याचिका में दारा सिंह ने दावा किया था कि अपराध 'युवा अवस्था में गुस्से के आवेश' में हुआ था और अब उसे अपने किए पर पछतावा है. उसने सजा के सुधारात्मक सिद्धांत का हवाला देते हुए समाज में एक सुधरे हुए शख्स के तौर पर लौटने के लिए समयपूर्व रिहाई की मांग की थी. उसने 2022 के राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों की समयपूर्व रिहाई से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी भरोसा किया था.
1999 में हुई थी घटना
हत्याकांड 22 जनवरी 1999 को ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में हुई थी. दारा सिंह के नेतृत्व वाली भीड़ ने उस वाहन में आग लगा दी थी, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटे सो रहे थे.
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