विज्ञापन

रास्ते का रोड़ा, असंवैधानिक तरकीब, खोखली कोशिश... महिला आरक्षण बिल पर शाह से राहुल-प्रियंका तक, किसने क्या कहा

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के विफल होने पर बीजेपी और उनके सहयोगी दल विपक्ष को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. वहीं विपक्ष इसे सरकार की सची समझी साजिश बता रहा है. अमित शाह से राहुल- प्रियंका तक, जानें किसने क्या कहा.

रास्ते का रोड़ा, असंवैधानिक तरकीब, खोखली कोशिश... महिला आरक्षण बिल पर शाह से राहुल-प्रियंका तक, किसने क्या कहा
महिला आरक्षण बिल पर पक्ष-विपक्ष का रिएक्शन.
  • संविधान के 31वें संशोधन बिल को लोकसभा में दो-तिहाई समर्थन न मिलने के कारण पास नहीं किया जा सका
  • कांग्रेस नेताओं ने महिला आरक्षण विधेयक के असंवैधानिक प्रयास और मोदी सरकार की आलोचना की है
  • भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर महिला आरक्षण का विरोध करने और देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

लंबी बहस और मतभेदों के बीच शुक्रवार को संविधान का 31वां संशोधन बिल लोकसभा में गिर गया. बिल को पास करने के लिए दो-तिहाई वोट की जरूरत होती है. लेकिन इसके पक्ष में 298 वोट और विरोध में 230 वोट पड़े, जो दो तिहाई से बहुत कम हैं. कुल मिलाकर महिला आरक्षण कानून पास नहीं हो पाया. अब राजनीतिक गलियारों में कोई बिल पास न होने को सही बता रहा है तो कोई गलत करार दे रहा है. पक्ष से विपक्ष तक, जानें किसके क्या कहा.

कांग्रेस सासंद राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि संशोधन विधेयक गिर गया. उन्होंने महिलाओं के नाम पर, संविधान को तोड़ने के लिए, असंवैधानिक तरकीब का इस्तेमाल किया. भारत ने देख लिया. INDIA ने रोक दिया.

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण इस देश की महिलाओं का हक है जो उनको मिलने से कोई नहीं रोक सकता। एक दिन यह हकीकत में परिवर्तित होकर रहेगा. मगर बदनीयती से इसे 2011 की जनगणना और उस पर आधारित परिसीमन से जोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का महिलाओं का मसीहा बनने का खोखला प्रयास आज नाकाम रहा.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि जनता के बढ़ते विरोध और आक्रोश से ध्यान हटाने के लिए साज़िशन लाए गए ‘तथाकथित महिला आरक्षण बिल' की हार बीजेपी की हार है. ये बीजेपी की बदनीयत की भी हार है.


ओडिशा में विपक्षी बीजू जनता दल ने कहा कि 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 800 से अधिक करने के लिए लाए गए संविधान संशोधन विधेयक के पारित नहीं होने से 'सत्य की जीत हुई है.' बीजद अध्यक्ष नवीन पटनायक ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक नहीं, बल्कि विवादास्पद परिसीमन विधेयक (131वां संवैधानिक संशोधन) पराजित हुआ है. उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक को परिसीमन विधेयक से अलग करने की मांग की थी.

एक सोचा-समझा षड्यंत्र

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने NDA  पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्व में पारित महिला आरक्षण कानून को रोकने के लिए लाया गया नया विधेयक एक सोचा-समझा षड्यंत्र साबित हुआ है. पीएम नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह सहित पूरी सरकार को यह भली-भांति ज्ञात था कि विपक्ष के सहयोग के बिना इतना महत्वपूर्ण विधेयक पारित नहीं हो सकता, इसके बावजूद विपक्षी दलों को विश्वास में लेने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया गया.

बीएसपी चीफ मायावती ने कहा कि देश के SC, ST व OBC समाज के संवैधानिक/क़ानूनी अधिकारों आदि के मामले में, कांग्रेस भी गिरगिट की तरह अपना रंग बदलने वाली यह पार्टी भी, महिला आरक्षण में, जो अब इन वर्गों की बात कर रही है, तो यही कांग्रेस पार्टी है जिसने अपनी केन्द्र की सरकार के रहते हुए किसी भी क्षेत्र में इनके आरक्षण के कोटे को पूरा कराने की कभी पहल नहीं की है.

TMC  महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि लोकसभा में परिसीमन विधेयक के पारित नहीं होने संबंधी घटनाक्रम से बीजेपी की बेचैनी सबके सामने आ गई है. उन्होंने ‘एक्स' पर लिखा, ‘लोकसभा में परिसीमन विधेयक के पारित नहीं होने से जो स्थिति बनी है, उससे भाजपा की बेचैनी सबके सामने उजागर हो रही है.'

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाते हुए लोकसभा में कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके ‘रास्ते का रोड़ा' कौन है और विपक्ष के नेताओं को चुनाव में महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा.उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करने वालों से नारी शक्ति हिसाब मांगेगी.

बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने कहा कि संसद में जो कुछ हुआ, वह सरासर विश्वासघात है. जब देश की महिलाओं के लिए खड़े होने का समय आया, तो कुछ लोगों ने कर्तव्य की जगह व्यवधान, सिद्धांतों की जगह राजनीति और प्रगति की जगह सत्ता को चुना. यह असहमति नहीं बल्कि महिलाओं को फैसले लेने में उनकी उचित जगह से वंचित करने का एक सुनियोजित प्रयास था.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विधेयक के पारित न हो पाने पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इन दलों ने ‘महिला विरोधी रुख' अपनाया और देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है.यह दिन सुनहरे अक्षरों में लिखा जा सकता था लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों के घोर विश्वासघात ने सब बेकार कर दिया.उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी तथा उनकी टीम के नेतृत्व वाले उसके महिला विरोधी गठबंधन ने देश की आधी आबादी के साथ घोर विश्वासघात किया है.

भारत के लोकतंत्र के लिए काला दिन

केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने महिला आरक्षण विधेयक की हार को भारत के लोकतंत्र के लिए एक काला दिन करार दिया. एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि यह पल एकता और महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के साझा संकल्प की मांग करता था, लेकिन इसके बजाय इसने उस चीज को उजागर किया जिसे उन्होंने 'संकल्प की कमी' बताया.

ये भी पढ़ें-महिला आरक्षण बिल पास क्यों नहीं होने दिया, राहुल गांधी ने बताई वजह; प्रियंका बोलीं- इसे तो गिरना ही था

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com