- नारी शक्ति वंदन अधिनियम मोदी सरकार के बारह वर्षों में पहली बार बहुमत के बावजूद पास नहीं हो पाया है
- भारत में लोकसभा चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है लेकिन उनकी जीतने की दर लगातार कम हो रही है
- महिला मतदाता संख्या 1960 के बाद लगातार बढ़ी है और 2020 के बाद महिला-पुरुष मतदान में लगभग बराबरी आ गई है
नारी शक्ति वंदन अधिनियम आखिर पास नहीं हो पाया. मोदी सरकार के 12 साल के कार्यकाल में यह पहला मौका है जब सरकार बहुमत में होने के बावजूद इस महत्वपूर्ण बिल को पास नहीं करा पाई. हालांकि इसने सरकार को विपक्ष के खिलाफ हमला करने का एक मौका तो दे ही दिया. बीजेपी आज पूरे देश में कांग्रेस के खिलाफ पुतला फूंकने और विरोध प्रदर्शन की तैयारी में है. विपक्ष का कहना है कि बिल तो पहले ही पास हो चुका था तो फिर संशोधन करने की क्या जरूरत है? विपक्ष को डर है कि इससे सरकार परिसीमन का अपना एजेंडा शामिल कर रही थी. इस मुद्दे के बीच एनडीटीवी की टीम ने भारत और दुनिया के अलग-अलग देशों में महिलाओं की भागेदारी पर एक खाका तैयार किया है.
बढ़ती महिलाएं,कम होती कामयाबी
देश में लोकसभा चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या तो बढ़ी है,पर उनके चुनाव जीतने की दर लगातार घट रही है. हमारी डेटा टीम ने 1957 से लोकसभा चुनाव में महिला उम्मीदवार और निर्वाचित महिला सांसदों का एक ग्राफ खींचा है. नीचे सफलता की दर भी बताई गई है.

मतदान में महिला और पुरुषों की हिस्सेदारी
देश में 1960 के दशक के बाद से महिला मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 2020 से महिला-पुरुष मतदान का अंतर भी लगभग खत्म हो गया है. नीचे देखिए

महिला आरक्षण में कहां कितनी दिलचस्पी?
गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों की मानें तो 1 से 16 अप्रैल के बीच पूर्वोत्तर राज्यों में महिला आरक्षण को लेकर सबसे ज्यादा इंटरनेट सर्च किया गया जिसमें सबसे ज्यादा अरुणाचल प्रदेश 100 फीससी रहा. सबसे कम तमिलनाडु में 21 फीसदी लोगों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई

कहां-कितनी महिला विधायक?
अब आपको बताते हैं देश के अलग-अलग राज्यों में कितनी महिला विधायक हैं. सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ में 21 प्रतिशत तो सबसे कम महिला विधायकों की संख्या में दिल्ली 7 प्रतिशत के साथ सबसे नीचे आता है. मैप की मदद से पूरा डेटा देखिए

संसद में कैसे बढ़ी महिलाओं की हिस्सेदारी?
देश की संसद में 1957 के बाद से महिला सांसदों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है. आरक्षण लागू होने के बाद इसमें और तेजी की उम्मीद है.

दुनिया की संसदों में महिलाओं की स्थिति कहां बेहतर?
इसके बाद हमारी टीम ने भारत के अलावा दुनिया की अलग-अलग संसदों मे महिलाओं की भागेदारी पर एक खाका खींचा है. सबसे ज्यादा रवांडा में 63 प्रतिशत महिलाओं की वहां की संसद में भागीदारी है. भारत में यह संख्या सिर्फ 13 प्रतिशत है जो सबसे कम है. रूस और चीन भी उससे बेहतर हैं.

राजनीतिक दलों में महिलाओं की भागेदारी कितनी?
अधिकांश प्रमुख राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों में महिला सांसदों और विधायकों की संख्या महज 10 फीसदी या उससे भी कम है. बीजेपी के पास कुल 1877 सांस-विधायक हैं जिनमें सिर्फ 194 महिलाएं हैं यानी सिर्फ 10 फीसदी की भागेदारी. सबस कम शिवसेना के पास है यानी मात्र 3 फीसदी.

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