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अमेरिका-ईरान का युद्ध भी रोक नहीं पाया भारत का आर्थिक विकास,जीएसटी से गाड़ियों की बिक्री तक में आई तेजी

पश्चिम एशिया संकट की वजह से तेल बाजार में आए उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था का विकास जारी है.आइए देखते हैं कि किस सेक्टर में कितना विकास हुआ है.

अमेरिका-ईरान का युद्ध भी रोक नहीं पाया भारत का आर्थिक विकास,जीएसटी से गाड़ियों की बिक्री तक में आई तेजी
नई दिल्ली:

वैश्विक अनिश्चितताओं, ऊर्जा बाजार की उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में हुए युद्ध के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था रफ्तार से आगे बढ़ रही है. इसकी गवाही आंकड़े दे रहे हैं. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जीडीपी में बढ़ोतरी, मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्र में हो रहे विस्तार, वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री, जीएसटी के रिकॉर्ड कलेक्शन और मजबूत निर्यात से देश में मांग और निवेश लगातार बढ़ रहा है. आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 में भी आर्थिक विकास में तेजी दर्ज की गई. आइए देखते हैं कि यह तेजी कहां-कहां दर्ज की गई. 

जीडीपी में बढ़ोतरी कितनी हुई है

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7 फीसदी की दर से बढ़ी. इससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहा. वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में यह बढ़ोतरी और तेज हुई. इस दौरान वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.8 फीसदी रही, जबकि पिछले साल की इसी अवधि में यह 7.0 फीसदी थी. इस बढ़ोतरी में मैन्युफैक्चरिंग, सेवा क्षेत्र, उपभोग (खपत) और निवेश का बड़ा योगदान रहा.

भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार आगे बढ़ रहा है. जून 2026 में एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) 54.2 रहा. यह लगातार 37वें महीने 50 अंक से ऊपर रहा. यह इस सेक्टर में लगातार विस्तार का संकेत है. इस दौरान उत्पादन, नए ऑर्डर मिलने, रोजगार और खरीदारी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिली. इस वजह से घरेलू मांग और कारोबारी भरोसा और मजबूत हुआ. 

अगर सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) की बात करें तो यह क्षेत्र विकास का बड़ा आधार बना हुआ है. एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई अप्रैल के 58.8 से बढ़कर मई 2026 में 59.8 पर पहुंच गया. यह नवंबर 2025 के बाद सबसे तेज बढ़ोतरी है. नए ग्राहकों, बढ़ती मांग और नए कारोबार मिलने से सेवा क्षेत्र में तेजी आई है. इस क्षेत्र में रोजगार बढ़ा है और निर्यात की मांग में भी सुधार हुआ है.

औद्योगिक उत्पादन में भी आई है तेजी

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) अप्रैल के 4.9 फीसदी से बढ़कर मई 2026 में 5.1 फीसदी हो गया.यह पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में 5.5 फीसदी और बिजली व गैस आपूर्ति में 9.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.इस दौरान मोटर वाहन (14.5 फीसद), इलेक्ट्रिकल उपकरण (20.8 फीसद) और बेसिक मेटल (4.6 फीसद) सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्र रहे. इसके अलावा पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) का उत्पादन 12.9 फीसद बढ़ा.इससे निवेश और औद्योगिक क्षमता में बढ़ोतरी का संकेत मिलता है.

अप्रैल 2026 में देश में 26.11 लाख वाहन बिके. यह अप्रैल महीने में अब तक की सबसे अधिक बिक्री है.

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Photo Credit: PTI

वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों (अप्रैल-मई) में सरकार ने 2.51 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च किया. यह पिछले साल इसी अवधि में 2.21 लाख करोड़ रुपये था. यानी सिर्फ दो महीनों में ही करीब 29,650 करोड़ रुपये अधिक खर्च किया गया.इससे सड़क, रेलवे, स्टील, सीमेंट, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और निर्माण जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा मिल रहा है. भारतीय रेलवे ने अप्रैल-मई 2026 में 84 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए. यह उसके पूरे साल के लक्ष्य का करीब 30 फीसदी है. यह खर्च सुरक्षा, सिग्नलिंग, नई रेल लाइनों, गेज बदलने और डबल लाइन बिछाने जैसे कामों पर हो रहा है.

बढ़ता ही जा रहा है जीएसटी का कलेक्शन 

अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बावजूद सरकार का कर संग्रह मजबूत बना हुआ है. जून 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का संग्रह करीब 1.95 लाख करोड़ रुपये रहा. यह जून 2025 के 1.71 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 13.9 फीसदी अधिक है. प्रत्यक्ष कर का संग्रह 17 जून तक 14.64 फीसदी बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया.

पश्चिम एशिया में पसरे तनाव और तेल की कीमतों के दबाव के बावजूद कच्चे तेल और उर्वरकों की कीमतों में नरमी से सरकार को वित्तीय घाटा नियंत्रित रखने में मदद मिल रही है. सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के राजकोषीय लक्ष्य पर कायम रहने की कोशिश कर रही है.

देश के आर्थिक विकास के और संकेत क्या हैं

  • मई में ई-वे बिल की संख्या पिछले साल की तुलना में 10.9 फीसद बढ़ी. यह देश में व्यापारिक गतिविधियां तेज होने का संकेत है.
  • बिजली की मांग में बढ़ोतरी अप्रैल के 3.5 फीसदी से बढ़कर मई में 11.2 फीसदी हो गई. बिजली की बढ़ती मांग भी उद्योगों और कारोबार में तेजी का संकेत है.
  • बंदरगाहों पर माल की आवाजाही में बढ़ोतरी अप्रैल के 2.4 से बढ़कर मई में 6.6 फीसदी हो गई. 
  • अप्रैल 2026 में देश में 26.11 लाख वाहन बिके. यह अप्रैल महीने में अब तक की सबसे अधिक बिक्री है. 
  • मई में 25.31 लाख वाहन बिके. यह पिछले साल की तुलना में करीब  10 फीसद अधिक हैं.
  • जून में भी कारों, एसयूवी, इलेक्ट्रिक वाहनों, दोपहिया और व्यावसायिक वाहनों की मांग मजबूत बनी रही.
  • ग्रामीण इलाकों में भी मांग बढ़ती रही. मई में ग्रामीण इलाकों में वाहन बिक्री 7.8 फीसद बढ़ी. इससे  ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती के संकेत मिलते हैं. 

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