- भारत के गगनयान मिशन के ड्रोग पैराशूट का चंडीगढ़ में सफल क्वालिफिकेशन टेस्ट
- टेस्ट में पैराशूट को उड़ान के दौरान आने वाले अधिकतम दबाव से भी अधिक लोड सहने के लिए परखा गया
- पैराशूट ने अतिरिक्त दबाव को बिना किसी खराबी के झेला जिससे सेफ्टी मार्जिन का प्रमाण मिला
भारत अपने पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान (Gaganyaan) की सफलता की ओर एक और कदम बढ़ चुका है. अंतरिक्ष की गहराइयों में तिरंगा फहराने की तैयारी कर रहे हमारे जांबाज एस्ट्रोनॉट्स की सुरक्षा को लेकर DRDO ने सबसे बड़ी बाधा पार कर ली है. मिशन का सबसे कठिन हिस्सा वह होता है जब स्पेसक्राफ्ट हजारों किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धरती के वायुमंडल में दोबारा दाखिल होता है. उस वक्त उसे सुरक्षित तरीके से नीचे उतारने की जिम्मेदारी जिन कंधों पर होती है, उन्हें 'ड्रोग पैराशूट' कहा जाता है. आज चंडीगढ़ की धरती पर इन पैराशूट्स ने अपनी ताकत का ऐसा प्रदर्शन किया कि वैज्ञानिकों के चेहरे खिल उठे। यह टेस्ट इस बात की गारंटी है कि मिशन के दौरान हमारे अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित वतन वापस लौटेंगे।
चंडीगढ़ में हुआ 'सुपर टेस्ट'
गुरुवार को चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) में गगनयान के 'ड्रोग पैराशूट' (Drogue Parachute) का सफल क्वालिफिकेशन टेस्ट किया गया. यह टेस्ट रेल ट्रैक रॉकेट स्लेज (RTRS) फैसिलिटी में किया गया, जो अपनी हाई-स्पीड टेस्टिंग क्षमताओं के लिए जानी जाती है.
Qualification Level Load test of Drogue Parachute for #Gaganyaan programme was successfully conducted at Rail Track Rocket Sled (RTRS) facility of Terminal Ballistic Range Laboratory, DRDO
— DRDO (@DRDO_India) February 19, 2026
The test was jointly conducted by teams from Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC), ISRO,… pic.twitter.com/Hb0gtOao5c
हवा से भी तेज दबाव झेलने की ताकत
यह कोई मामूली टेस्ट नहीं था. वैज्ञानिकों ने इस पैराशूट पर उड़ान के दौरान आने वाले अधिकतम दबाव से भी कहीं ज्यादा लोड डालकर इसे परखा. इस टेस्ट का नतीजा शानदार रहा. पैराशूट ने इस अतिरिक्त दबाव को आसानी से झेल लिया. इससे यह साबित हो गया है कि इस डिजाइन में एक्स्ट्रा सेफ्टी मार्जिन मौजूद है, जो किसी भी इमरजेंसी की स्थिति में एस्ट्रोनॉट्स की जान बचाने के लिए जरूरी है.
ISRO और DRDO की दमदार जुगलबंदी
इस सफलता के पीछे भारत की दो सबसे बड़ी एजेंसियों का दिमाग लगा है। यह टेस्ट ISRO और DRDO की एरियल डिलीवरी रिसर्च एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE) ने मिलकर किया.
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