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कल्याण बनर्जी: बोतल तोड़ कर बीजेपी सांसद की ओर उछालने, धनखड़ की मिमिक्री करने से निलंबित होने तक

दो साल पहले वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संयुक्त समिति की बैठक के दौरान कल्याण बनर्जी ने समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल की ओर कांच की बोतल तोड़ कर फेंक दिया था. उससे पहले उन्होंने जगदीप धनखड़ की नकल उतारी थी. विवादों से जुड़ी एक लंबी लिस्ट है उनके नाम पर.

कल्याण बनर्जी: बोतल तोड़ कर बीजेपी सांसद की ओर उछालने, धनखड़ की मिमिक्री करने से निलंबित होने तक
कल्याण बनर्जी का विवादों से अटूट रिश्ता
PTI/NDTV
  • कानून की पढ़ाई कर चुके और छात्र जीवन से ही राजनीति से जुड़े कल्याण बनर्जी, ममता बनर्जी के बड़े समर्थक रहे हैं.
  • 2001 में पहली बार पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए. 2009 में सेरामपुर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद बने
  • विवादों के बावजूद कल्याण बनर्जी अपनी पार्टी में कानूनी विशेषज्ञ और भरोसेमंद सलाहकार के रूप में देखे जाते हैं.

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद और पार्टी के सबसे मुखर नेताओं में गिने जाने वाले कल्याण बनर्जी एक बार फिर विवादों में हैं. इस बार मामला इतना बढ़ गया कि लोकसभा ने उन्हें पूरे मॉनसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया. उन पर महिला सांसद के खिलाफ असंसदीय और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगा, जिसके बाद सदन ने ध्वनिमत से उनके निलंबन का प्रस्ताव पारित कर दिया.

यह पहली बार नहीं है जब कल्याण बनर्जी किसी विवाद के कारण सुर्खियों में आए हैं. उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नकल उतारने से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्षी नेताओं और अपनी ही पार्टी के नेताओं पर तीखे हमले करने और संसदीय कमेटी से निलंबित होने तक, उनका राजनीतिक सफर कई विवादों से भरा रहा है.

जाने पूरा मामला और संसद में क्या हुआ?

लोकसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के हंगामे के बीच सदन स्थगित हुआ. इसी दौरान सदन के भीतर कल्याण बनर्जी की टीएमसी के दल बदल चुके उन सांसदों से तीखी बहस हो गई जो अब  एनसीपीआई  के सदस्य हैं.

बताया गया कि इस बहस के दौरान उन्होंने एक महिला सांसद के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया. इस पर महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से शिकायत की.

जब सदन दोबारा शुरू हुआ तो पीठासीन अधिकारी कृष्ण प्रसाद तेनेटी ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप सदन की गरिमा और महिला सदस्यों के सम्मान से जुड़े हैं.

इसके बाद केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कल्याण बनर्जी को पूरे मॉनसून सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित करने का प्रस्ताव रखा. प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित हो गया और उन्हें तुरंत सदन से बाहर जाने का निर्देश दिया गया.

निलंबन के बाद क्या बोले कल्याण बनर्जी?

संसद से निलंबन के बाद कल्याण बनर्जी ने कहा, "मुझे यहां से सस्पेंड करके उन्हें क्या मिलेगा? यह मुश्किल से बीस लोगों की पार्टी है. उन्होंने (टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने) डेढ़ महीने बाद कोलकाता में एक मीटिंग की. उनके पास 20 वोटर भी नहीं हैं. उनके पास कुछ भी नहीं है. पश्चिम बंगाल में एक भी व्यक्ति उन्हें वोट नहीं देगा. वे सभी गद्दार और बेईमान लोग हैं."

किस महिला सांसद को लेकर हुआ विवाद?

संसद में हुई बहस के दौरान जिन सांसदों का नाम सामने आया उनमें मिताली बाग, शताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार शामिल हैं. ये सभी पहले टीएमसी में थीं लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी छोड़कर नवगठित एनसीपीआई में चली गईं.

हालांकि सदन की कार्यवाही में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि विवादित टिप्पणी किस सांसद के लिए की गई थी, लेकिन शिकायत महिला सांसदों की ओर से की गई थी.

आखिर विवाद की वजह क्या थी?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पार्टी में बड़ी टूट हुई. करीब 20 सांसद पार्टी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हो गए. इसके बाद लोकसभा में उन्हें अलग बैठने की अनुमति भी मिल गई.

कल्याण बनर्जी लगातार ममता बनर्जी के साथ खड़े रहे और बागी नेताओं पर हमलावर रहे हैं. माना जा रहा है कि संसद के भीतर इन्हीं राजनीतिक मतभेदों के चलते दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक हुई.

पत्रकारों पर हमले को लेकर भी दिया था विवादित बयान

संसद में निलंबन से ठीक पहले कल्याण बनर्जी का एक और बयान विवादों में आ गया था.

दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच कुछ पत्रकारों के साथ कथित मारपीट हुई थी. जब उनसे इस पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, "वो लोग जानते हैं कि आप लोग गोदी मीडिया के आदमी हैं. वो लोग जो भी कर रहे हैं, ठीक कर रहे हैं."

उनके इस बयान की विपक्ष और मीडिया संगठनों के कई वर्गों ने आलोचना की. वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने पत्रकारों के साथ हिंसा को गलत बताया.

अपनी ही पार्टी पर भी साध चुके हैं निशाना

कल्याण बनर्जी पिछले कुछ समय से अपनी ही पार्टी के अंदरूनी मामलों को लेकर भी खुलकर बोलते रहे हैं.

हाल ही में उन्होंने 21 जुलाई की टीएमसी रैली में वक्ताओं की सूची में अपना नाम नहीं होने पर सोशल मीडिया के जरिए नाराजगी जताई थी. उन्होंने लिखा था कि पार्टी का मौजूदा तरीका संगठन को खत्म कर देगा.

उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले दो महीनों से वे जिलों में जाकर कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा रहे हैं, जबकि कई नेता सामने नहीं आ रहे.

अभिषेक बनर्जी

अभिषेक बनर्जी
Photo Credit: PTI

अभिषेक बनर्जी पर भी लगाए आरोप

कल्याण बनर्जी ने हाल के दिनों में कई बार अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाए.

उन्होंने कहा कि पार्टी की गिरावट के लिए कुछ फैसले जिम्मेदार रहे हैं. उन्होंने राजनीतिक सलाहकार टीम और अभिषेक बनर्जी के कार्यालय की कार्यप्रणाली की भी आलोचना की.

हालांकि बाद में अभिषेक बनर्जी ने विवाद को शांत करते हुए कहा कि कल्याण बनर्जी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है.

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ममता बनर्जी से भी जुड़ा विवाद

अभी एक दिन पहले मंगलवार (21 जुलाई, 2026) को शहीद दिवस रैली में कल्याण बनर्जी करीब 23 मिनट तक भाषण देते रहे, जबकि सभी नेताओं को संक्षिप्त भाषण देने के निर्देश थे.

सूत्रों के मुताबिक ममता बनर्जी ने मंच से उन्हें भाषण समाप्त करने का संकेत दिया था. भाषण के बाद दोनों के बीच हल्की नाराजगी की खबरें भी सामने आईं, हालांकि कल्याण बनर्जी ने किसी भी तरह के विवाद से इनकार किया.

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पहले भी कई बार विवादों में रहे

कल्याण बनर्जी का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है.

2024 में उन्होंने संसदीय समिति की बैठक में एक विवाद के दौरान कांच की पानी की बोतल तोड़कर चेयर की तरफ उछाल दिया था. इसके बाद संसदीय समिति की बैठक से उन्हें निलंबित कर दिया गया था. 

वक्फ (संशोधन) विधेयक पर संयुक्त समिति की बैठक के दौरान, कल्याण बनर्जी का बीजेपी सांसद और कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व जज अभिजीत गंगोपाध्याय से तीखी बहस हुई. इस दौरान दोनों ने एक दूसरे पर अपशब्दों के प्रयोग किए.

समिति के अध्यक्ष और बीजेपी के वरिष्ठ सांसद जगदंबिका पाल ने बताया कि उसी दौरान बनर्जी ने कांच की बोतल उठाकर उसे तोड़ दिया और उनकी ओर फेंक दिया, इससे खुद कल्याण बनर्जी के उंगलियों में चोटें आईं.

वहीं दिसंबर 2023 में संसद परिसर में उन्होंने तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की नकल उतारी थी. इस घटना की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आलोचना की थी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और कई विपक्षी नेताओं पर उनकी टिप्पणियां पहले भी विवाद पैदा कर चुकी हैं.

2012 में एफडीआई के मुद्दे पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा से उनकी तीखी बहस हुई थी.

नोटबंदी के दौरान भी उनके बयान राजनीतिक विवाद का कारण बने थे.

Kalyan Banerjee

कल्याण बनर्जी
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कौन हैं कल्याण बनर्जी?

कानून की पढ़ाई कर चुके और छात्र राजनीति से जुड़े रहे कल्याण बनर्जी, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के कट्टर समर्थक रहे हैं. वे 2001 में पहली बार पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए, फिर 2009 में सेरामपुर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा सांसद बने.

उसी साल कल्याण बनर्जी तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की आलोचना करके सुर्खियों में आए. फिर 2012 में जब टीएमसी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया, तब कल्याण बनर्जी ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) की अनुमति देने के मुद्दे पर तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा के साथ जुबानी बहस की थी.

चार साल बाद, कोलकाता में भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यालय के बाहर नोटबंदी के विरोध प्रदर्शनों के बीच, कल्याण बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी की, जिससे व्यापक निंदा हुई थी.

जनवरी 2021 में, राज्य विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले, बनर्जी ने उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुए बलात्कार को लेकर बीजेपी की आलोचना करते हुए देवी सीता और भगवान राम का जिक्र करके विवाद खड़ा कर दिया था.

विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और बीजेपी ने बनर्जी की कड़ी आलोचना करते हुए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की थी.

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में धनखड़ के कार्यकाल के दौरान बनर्जी और धनखड़ के बीच अक्सर मतभेद होते रहते थे.

कई मौकों पर कल्याण बनर्जी ने राज्यपाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व भी किया. उन्होंने राज्यपाल के रूप में धनखड़ के कार्यकाल खत्म होने के बाद उन पर कानूनी कार्रवाई का सुझाव भी दिया था.विवादों के बावजूद, कल्याण बनर्जी को टीएमसी के भीतर कानूनी मामलों में उनकी विशेषज्ञता के लिए महत्व दिया जाता है और पार्टी या पश्चिम बंगाल सरकार से जुड़े कानूनी मामलों पर अक्सर पार्टी के भरोसेमंद सलाहकार के रूप में उन्हें ही देखा जाता है.

उनकी पहचान टीएमसी के सबसे आक्रामक संसदीय वक्ताओं और कानूनी रणनीतिकारों में रही है. पश्चिम बंगाल में हालिया पार्टी संकट के दौरान भी वे ममता बनर्जी के साथ बने रहे. लोकसभा से निलंबन के बाद कल्याण बनर्जी पूरे मॉनसून सत्र की शेष कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले सकेंगे. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब टीएमसी पहले ही पश्चिम बंगाल में चुनावी हार, पार्टी टूट और अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है.

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