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पायरेसी से ड्रग तस्करी तक, Maritime Conclave 2026 में 15 देशों की नेवी ने गोवा में बनाई खास रणनीति

इस सम्मेलन में समुद्र में सामने आने वाले कई खतरों पर भी चर्चा हुई. इसमें अवैध रूप से मछली पकड़ना, ड्रग तस्करी और समुद्री अपराध सबसे बड़ा मुद्दा रहा. इस तरह के अपराध वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा, दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं.

पायरेसी से ड्रग तस्करी तक, Maritime Conclave 2026 में 15 देशों की नेवी ने गोवा में बनाई खास रणनीति
नई दिल्ली:

भारत के गोवा में 15 देशों के नौसेना प्रमुख Maritime Conclave 2026 के लिए एक साथ जुटे हैं. यानी ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि दुनिया की हर नेवल पावर की कमान इस समय गोवा में मौजूद है. इस सम्मेलन में 15 देशों के नौसेना प्रमुखों के अलावा वरिष्ठ समुद्री विशेषज्ञ भी शामिल हुए हैं. भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित यह बैठक नेवल वॉर कॉलेज में  संपन्न हुई.इस सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर भी चर्चा हुई है. हाल के दिनों में बढ़ती पायरेसी, यमन में हूती विद्रोहियों के संकट को देखते हुए यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है. सम्मेलन में मौजूद सभी अधिकारियों और एक्सपर्ट्स ने माना है कि समुद्र की सुरक्षा अब साझा जिम्मेदारी है. कोई एक देश अकेले खतरे नहीं रोक सकता. 

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इस सम्मेलन की थीम समुद्री खतरों से मिलकर निपटना रखा गया है. इसमें हिस्सा लेने वाले  देशों ने किसी भी संकट की स्थिति में संयुक्त कार्रवाई पर जोर दिया है. भारत के नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि आज की तारीख में समुद्री खतरे तेजी से बदल रहे हैं. इसलिए अब सिर्फ जानकारी साझा करना ही काफी नहीं है. मॉडर्न जमाने के समुद्री युद्ध में अब मिलकर कार्रवाई जरूरी है. एडमिरल त्रिपाठी ने समुद्र में तकनीक के उपयोग पर जोर दिया है. साथ ही उन्होंने संयुक्त ऑपरेशंस को बढ़ाने की बात कही है. इस कार्यक्रम में भारत ने मेजबान और संयोजक, दोनों की भूमिका निभाई है. भारत ने सभी प्रमुख नेवल पावर्स को एक मंच दिया है. ये समुद्री सुरक्षा के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. सम्मेलन ने सभी देशों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं हैं. 

भारतीय नौसेना ने यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महासागर सागर विजन के तहत की है. सभी देशों ने सुरक्षा और विकास साथ-साथ बढ़ाने पर जोर दिया गया. पृथ्वी का अधिकतर हिस्सा समुद्र है. इसलिए इसकी सुरक्षा और भी अहम है. साथ ही विश्व का अधिकतर व्यापार भी समुद्र के जरिए ही होता है. इसलिए ये जरूरी है कि हर ट्रेड रूट पर सुरक्षा सुनिश्चित हो.

इस सम्मेलन में समुद्र में सामने आने वाले कई खतरों पर भी चर्चा हुई. इसमें अवैध रूप से मछली पकड़ना, ड्रग तस्करी और समुद्री अपराध सबसे बड़ा मुद्दा रहा. इस तरह के अपराध वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा, दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं. इसलिए ये जरूरी है कि जिम्मेदार देश इस दिशा में काम करें.बैठक में कहा गया कि अब अपराधी भी नौसेनाओं से बचने के लिए नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. सभी देशों ने एक-दूसरे के साथ रियल टाइम जानकारी साझा करने पर जोर दिया जिससे किसी भी आपदा की सूरत में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके.

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सम्मेलन में समुद्री निगरानी मजबूत करने के अलावा सभी देशों के सर्विलांस सिस्टम को एक साथ जोड़ने का सुझाव दिया गया. इसके अलावा समय-समय पर संयुक्त अभ्यास बढ़ाने पर भी सहमति बनी. ट्रेनिंग, संसाधन और तकनीक को साझा करने का फैसला भी इस सम्मेलन में लिया गया है. सम्मेलन में विशेषज्ञ के तौर पर मौजूद पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने सुझाव दिया कि रियल टाइम सूचना, मजबूत समन्वय और निरंतर प्रशिक्षण पर फोकस करने की जरूरत है. सम्मेलन के अंत में देशों की ओर से एक साझा घोषणा की गई.

इसमें सभी देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति, आपसी भरोसा और साझेदारी को मजबूत करने की बात कही. सम्मेलन में आये देशों ने भारत को भरोसेमंद साझेदार बताया गया. उन्होंने कहा कि हिंद महासागर की स्थिरता में भारत का रोल काफी अहम है. सभी देशों ने इस सम्मेलन का आयोजन करने के लिए भारत को धन्यवाद भी दिया.

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