- अंडमान एवं निकोबार के पूर्व मुख्य सचिव जितेंद्र नारायण पर 2022 में सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया गया था.
- चार गवाहों में पीड़िता का पति और पूर्व मुख्य सचिव का चालक शामिल हैं, जो अब मुकर गए हैं.
- अभियोजन पक्ष ने बताया कि गवाहों के मुकरने से मुकदमे पर कोई खास असर नहीं होगा क्योंकि अन्य गवाह भी मौजूद हैं.
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के पूर्व मुख्य सचिव जितेंद्र नारायण और अन्य के खिलाफ 2022 के सामूहिक बलात्कार मामले में चार गवाह मुकर गए हैं. इन चार गवाहों में पीड़िता का पति और पूर्व मुख्य सचिव का चालक शामिल हैं. हालांकि, अभियोजन पक्ष ने कहा कि इन गवाहों के मुकरने से मुकदमा बहुत प्रभावित नहीं होगा, क्योंकि मामले में 100 से अधिक अन्य गवाह हैं.
यह मामला 2022 में सामने आया, जब श्रीविजय पुरम की 21-वर्षीय एक महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि तत्कालीन मुख्य सचिव नारायण, पूर्व श्रम आयुक्त आर एल ऋषि और अन्य ने सरकारी नौकरी दिलाने के बहाने मुख्य सचिव के आधिकारिक आवास में उसके साथ बलात्कार किया. इस शिकायत के बाद स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू की.
नारायण को उनके पद से हटाकर जुलाई 2022 में दिल्ली वित्त निगम के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया था. हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उसी वर्ष अक्टूबर में आईएएस अधिकारी को ‘‘गंभीर कदाचार'' के आरोपों में निलंबित कर दिया और अगले महीने उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने नारायण को 20 फरवरी, 2023 को जमानत प्रदान की. वह अब भी निलंबित हैं और इसी वर्ष अक्टूबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं. मुख्य अभियोजक सुमित कुमार कर्माकर ने ‘पीटीआई-भाषा' से बातचीत में चार गवाहों के मुकरने की पुष्टि की. उन्होंने कहा, ‘‘गवाहों के मुकरने से मुकदमे पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि 100 से अधिक गवाह हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पीड़िता के साक्ष्य बहुत मजबूत हैं. मुकदमा जारी रहेगा.''
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