विज्ञापन

भारत की सुरक्षा को मिला नया कवच, पहला स्‍वदेशी बॉडी स्कैनर, कुछ सेकेंड में पकड़ लेगा छिपे खतरे

भारत की वेहंट टेक्नोलॉजी ने मेक इन इंडिया के तहत पहला स्वदेशी मिलिमीटर वेव बॉडी स्कैनर डेवलेप किया है, जो एयरपोर्ट और हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों में छोटे से छोटे खतरे को चंद सेकेंड में पकड़ लेगा.

भारत की सुरक्षा को मिला नया कवच, पहला स्‍वदेशी बॉडी स्कैनर, कुछ सेकेंड में पकड़ लेगा छिपे खतरे
मेटल के अलावा प्लास्टिक का महीन सामान, जेल, पाउडर, ड्रग्स को भी कर लेगा डिटेक्ट
नई दिल्‍ली:

देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भारत ने एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है. सुरक्षा तकनीक क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी वेहंट टेक्‍नोलॉजी (Vehant Technologies) ने भारत का पहला स्वदेशी मिलिमीटर वेव (mmWave) बॉडी स्कैनर तैयार किया है. यह पूरी तरह मेक इन इंडिया पहल के तहत डेवलेप किया गया है और इसे खास तौर पर एयरपोर्ट, CISF, सरकारी सुरक्षा एजेंसियों और अन्य हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों के लिए डिजाइन किया गया है.

मेड इन इंडिया बॉडी स्‍कैनर 

आज के समय में सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अपराधी और तस्कर नए-नए तरीके अपनाकर प्रतिबंधित सामान को छिपाने की कोशिश करते हैं. कई बार ऐसी वस्तुएं मेटल डिटेक्टर या सामान्य जांच उपकरणों की पकड़ में नहीं आतीं. इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए यह अत्याधुनिक स्कैनर तैयार किया गया है, जो सुरक्षा जांच की पूरी प्रक्रिया को तेज और ज्यादा भरोसेमंद बनाता है. इस स्कैनर का नाम मिलीव्यू एमएमवेव बॉडी स्कैनर (MilliView mmWave Body Scanner) है. यह आधुनिक मिलिमीटर वेव टेक्नोलॉजी पर आधारित है, जो बिना किसी शारीरिक संपर्क के व्यक्ति की जांच करती है.

सिर्फ धातु को ही स्‍कैन नहीं करता...

इस बॉडी स्‍कैनर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ धातु की वस्तुओं को ही नहीं, बल्कि गैर-धातु सामग्री को भी पहचान सकता है. यानी अगर किसी व्यक्ति ने कपड़ों के नीचे या शरीर से छिपाकर प्लास्टिक, जेल, पाउडर, ऑर्गेनिक सामग्री या अन्य संदिग्ध चीजें छिपाई हैं, तो यह स्कैनर उन्हें भी कुछ ही सेकेंड में पहचान लेगा. कंपनी के मुताबिक, यह बॉडी स्कैनर किसी व्यक्ति की जांच प्रक्रिया को 5 सेकेंड से भी कम समय में पूरा कर सकता है. इससे एयरपोर्ट जैसे स्थानों पर जहां रोजाना हजारों यात्री आते-जाते हैं, वहां सुरक्षा जांच की रफ्तार बढ़ेगी और लंबी कतारों को कम किया जा सकेगा.

AI बेस्‍ड बॉडी स्‍कैनर

इस सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आधारित थ्रेट रिकग्निशन सिस्टम लगाया गया है. यह तकनीक स्कैन के दौरान संदिग्ध पैटर्न को खुद पहचानती है और सुरक्षा कर्मियों को अलर्ट देती है. इससे जांच करने वाले अधिकारियों को तुरंत पता चल जाता है कि किस जगह पर ज्यादा ध्यान देना है. सामान्य मेटल डिटेक्टर केवल धातु की चीजों को पकड़ते हैं, लेकिन यह नई तकनीक उससे कहीं आगे है. यह स्कैनर कई तरह के खतरों की पहचान कर सकता है.

क्‍या-क्‍या चीजें पकड़ता है ये स्‍कैनर 

  • नुकीली धातु की वस्तुएं
  • हथियार
  • गोलियां
  • विस्फोटक सामग्री
  • डिटोनेटर
  • ज्वलनशील सामान
  • प्लास्टिक आधारित सामग्री
  • जेल और पाउडर जैसी चीजें

यही वजह है कि इसे एयरपोर्ट और संवेदनशील जगहों की सुरक्षा के लिए बेहद उपयोगी माना जा रहा है. इस स्कैनर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि जांच के दौरान यात्री को किसी तरह की परेशानी न हो. इसमें किसी व्यक्ति को छूने की जरूरत नहीं होती. जांच पूरी तरह संपर्क रहित होती है. साथ ही, यह तकनीक यात्रियों की निजता को ध्यान में रखती है. इसमें सामान्य कैमरे की तरह व्यक्ति की पहचान वाली तस्वीर नहीं बनाई जाती, बल्कि सिस्टम एक वर्चुअल मानव आकृति पर संदिग्ध जगह को दिखाता है. यानी सुरक्षा कर्मियों को सिर्फ खतरे वाली जगह की जानकारी मिलती है, जिससे जांच प्रक्रिया सुरक्षित और प्राइवेसी के हिसाब से रहती है.

कहां-कहां लगेगा ये स्‍कैनर 

मिलीव्‍यू स्कैनर में इस्तेमाल होने वाली तकनीक नॉन-आयोनाइजिंग मिलिमीटर वेव पर आधारित है. इसका मतलब है कि यह ऐसी तरंगों का इस्तेमाल करता है जो शरीर के अंदर प्रवेश नहीं करतीं. कंपनी के अनुसार, इसकी रेडिएशन मात्रा बेहद कम है और यह यात्रियों के लिए सुरक्षित है. इसे इस तरह तैयार किया गया है कि लंबे समय तक इस्तेमाल के दौरान भी सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाए. यह तकनीक सिर्फ एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी. इसे रेलवे स्टेशन, सरकारी कार्यालयों, महत्वपूर्ण इमारतों, संवेदनशील प्रतिष्ठानों और अन्य सुरक्षा क्षेत्रों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे सुरक्षा एजेंसियों को कम समय में ज्यादा लोगों की जांच करने में मदद मिलेगी. साथ ही, कम मैनपावर में बेहतर सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जा सकेगी.

ये भी पढ़ें :- अब भारत में होगी एयरपोर्ट सुरक्षा उपकरणों की जांच, केंद्र सरकार खोलेगी 'टेस्टिंग सेंटर'

वेहंट टेक्‍नोलॉजी का यह स्वदेशी स्कैनर भारत की सुरक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. जहां पहले ऐसी अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब भारत में ही ऐसी तकनीक विकसित की जा रही है. मेक इन इंडिया के तहत तैयार यह मिलिमीटर वेव बॉडी स्कैनर आने वाले समय में एयरपोर्ट और अन्य हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों में सुरक्षा जांच का नया मानक बन सकता है. कंपनी के मुताबिक, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन के साथ उनकी बातचीत चल रही है. सब कुछ ठीक रहा, तो बहुत जल्दी ही इसका ट्रायल एयरपोर्ट्स पर शुरू हो सकता है. स्वदेशी तकनीक कर आधारित ये बॉडी स्कैनर करीब 4 साल में बनकर तैयार हुआ है. इसका वजन करीब 700 किलो है.

ये भी पढ़ें :- एएआई को अब भी 100 से अधिक हवाई अड्डों के लिए खरीदने हैं सिंगल बॉडी स्कैनर

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Made In India, Indigenous, Threats
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com