New Delhi:
सत्ता पक्ष के विभिन्न दलों और विपक्ष के भारी दबाव के आगे झुकते हुए सरकार ने ऐलान किया कि वह खुदरा एफडीआई पर फैसला स्थगित कर रही है। इस घोषणा के बाद नौ दिन से हंगामे का मंजर देख रही संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पड़ी। संसद का गतिरोध समाप्त करने पर सहमति बुधवार सुबह सर्वदलीय बैठक में बनी। सरकार ने पेशकश की कि वह मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में 51 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के फैसले को फिलहाल रोक रही है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने लोकसभा में ऐलान किया कि सरकार एफडीआई पर फैसला तब तक के लिए टाल रही है, जब तक सभी संबद्ध पक्षों के बीच आम सहमति न बन जाए। राज्यसभा में इसी तरह का बयान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने दिया। मुखर्जी ने कहा कि संबद्ध पक्षों में राजनीतिक दल और राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे, जिन्हें शामिल किए बिना यह फैसला लागू नहीं किया जा सकता। विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इस घोषणा का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार जनता की इच्छा के आगे झुकी है और जनता की इच्छा के आगे झुकना हार नहीं है। नेता सदन मुखर्जी के बयान के बाद अध्यक्ष मीरा कुमार ने बीजेपी, लेफ्ट और बीएसपी सहित विभिन्न दलों की ओर से पेश कार्य स्थगन प्रस्ताव नामंजूर कर दिए, जिसके विरोध में बीएसपी सदस्यों ने वाकआउट किया। उसके बाद इस शीतकालीन सत्र में पहली बार प्रश्नकाल शुरू हुआ। यह सत्र 22 नवंबर को शुरू हुआ था। सरकार के सामने एफडीआई पर पहला और बड़ा दबाव अपने सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस की तरफ से झेलना पड़ा। अब कहा जा रहा है कि सरकार ममता बनर्जी को मनाने में जुट गई है। आज वित्तीय मामलों की कैबिनेट कमेटी की बैठक होनी है, जिसमें पश्चिम बंगाल को 8750 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद देने पर विचार किया जा सकता है। यह मदद पिछड़ा क्षेत्र की मदद के लिए तय निधि से जा सकती है। हालांकि ममता 19,000 करोड़ रुपये का पैकेज मांग रही हैं। हालांकि शनिवार को ही तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने ऐलान कर दिया था कि वित्त मंत्री ने उनसे एफडीआई के फैसले पर आगे नहीं बढ़ने की बात कही है और सरकार अपने सहयोगियों को भरोसे में लेकर ही कोई फैसला लेगी। कैबिनेट ने मल्टीब्रांड रिटेल में 51 फीसदी और सिंगल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी विदेशी निवेश का फैसला लिया था, जिसे लेकर टकराव शुरू हो गया था। पहले काले धन और महंगाई को लेकर और फिर किराने में विदेशी निवेश के मुद्दे पर शीतकालीन सत्र में एक दिन भी कामकाज नहीं हो पाया है। बीजेपी और लेफ्ट एफडीआई पर पूरी तरह रोलबैक की मांग पर अड़े रहे। हालांकि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और सीपीएम नेता सीताराम येचुरी से बात की थी और माना जा रहा है कि उन्होंने एफडीआई के अमल पर रोक लगाए जाने की जानकारी दे दी थी।(इनपुट भाषा से भी)
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