किसानों के दिल्ली कूच से बढ़ सकती है आम लोगों की परेशानी, CBSE का एग्जाम; सड़कों पर रहेगा भारी जाम

आज से ICSC बोर्ड परीक्षा भी शुरू हो रही हैं.कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा एक ही शिफ्ट में होंगी. पेपर सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक होगा. किसानों के विरोध-मार्च (Delhi Farmer Protest) के बीच छात्रों का स्कूल पहुंचना काफी मुश्किल भरा हो सकता है. 

नई दिल्ली:

केंद्र सरकार के साथ मांगों पर सहमति नहीं बनने के बाद किसान आज फिर से दिल्ली कूच (Farmer's Delhi March) करने जा रहे हैं. सरकार और किसानों के बीच जारी गतिरोध के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आज फिर आम जनता को उठानी पड़ सकती है. जब-जब किसान दिल्ली कूच की कोशिश करते हैं तो आम लोगों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ट्रैफिक की भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. किसानों के आंदोलन को देखते हुए बॉर्डर्स (Delhi Border Security) पर बैरिकेडिंग तेज कर दी गई है और सुरक्षा भी कड़ी कर दी गई है. पिछले दिनों भी किसानों के दिल्ली मार्च की वजह से भारी ट्रैफिक जाम हो गया था, जिसकी वजह से गाड़ियां सड़कों पर रेंगती नजर आईं और लोग घंटों लंबे जाम में फंस रहे हैं. आज इसका असर स्कूली बच्चों पर देखने को मिल सकता है.

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CBSE-ICSC का एग्जाम, छात्रों को हो सकती है परेशानी

किसानों के आज दिल्ली कूच से बसे ज्यादा परेशानी सीबीएसई बोर्ड के छात्रों को उठानी पड़ सकती है. दरअसल इन दिनों CBSE के एग्जाम चल रहे हैं. 10वीं कक्षा के छात्र हिंदी का पेपर देंगे, जबकि12वीं के छात्र कॉस्ट अकाउंटिंग, म्यूजिक या अन्य वैकल्पिक पेपर देने के लिए घरों से स्कूल जाएंगे. ऐसे में छात्रों को काफी परेशानी हो सकती है और उनके सामने समय से स्कूल पहुंचना बड़ी चुनौती होगी. 

काउंसिल फॉर द इंडिया स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन भी बुधवार यानी कि आज से ICSC बोर्ड परीक्षा शुरू कर रहा है. कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा एक ही शिफ्ट में होंगी. पेपर सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक होगा, ऐसे में स्कूल पहुंचना काफी मुश्किल भरा हो सकता है. 

क्या कहती है पुलिस?

किसानों के दिल्ली मार्च को देखते हुए पुलिस पहले से ही मुस्तैद है और सुरक्षा सख्त कर दी है. वहीं  हरियाणा के डीजीपी ने पंजाब पुलिस को पत्र लिखकर चिंता जताई है. उन्होंने महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को प्रदर्शन से दूर रखने की बात कही है. उनको शक है कि प्रदर्शनकारी इन लोगों को आगे रख सकते हैं, ताकि पुलिस को कानूनी कार्रवाई करने से रोका जा सके. वहीं पंजाब के डीजीपी ने विरोध स्थल की ओर मिट्टी हटाने वालों की आवाजाही रोकने के लिए सभी जिला प्रमुखों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा है. 

 क्या कहती है सरकार?

सरकार किसानों से लगातार बातचीत और शांति बनाए रखने की अपील कर रही है. मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि वह किसानों और विरोध से जुड़े किसान संगठनों से शांति बनाए रखने की अपील करेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि हमें इस मुद्दे पर चर्चा करते रहना चाहिए. हम सभी शांति चाहते हैं और मिलकर इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए. इस बीच, गृह मंत्रालय ने बुधवार को कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पंजाब के मुख्य सचिव को एक पत्र भी लिखा. 

क्या कर रहे हैं प्रदर्शनकारी किसान?

 किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने ऐलान किया है कि वे बुधवार सुबह 11 बजे अपना 'दिल्ली चलो' मार्च फिर से शुरू करेंगे. किसान सीमेंट की दीवारें तोड़ने के लिए पोकलेन, जेसीबी जैसी भारी अर्थ मूविंग मशीनें लेकर शंभू बॉर्डर पर पहुंचे हैं. प्रदर्शनकारी किसान वैकल्पिक रास्ते के तौर पर घग्गर नदी पर मिट्टी की बोरियां डालकर रैंप बनाने की कोशिश कर रहे हैं. इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने सभी किसान मंचों से 21 फरवरी को बीजेपी-एनडीए सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों में उनके विरोध का समर्थन करने की अपील की है. 

किसान नेता सरवन सिंह पंढेर का कहना ने कहा, "हमने सरकार से कहा है कि आप हमें मार सकते हैं लेकिन किसानों पर अत्याचार मत करिए. हम प्रधानमंत्री से अपील करते हैं कि वह आकर MSP पर कानून की घोषणा करके इस विरोध को खत्म करें.  देश ऐसी सरकार को माफ नहीं करेगा. हरियाणा के गांवों में अर्धसैनिक बल तैनात हैं, हमारा अपराध क्या है? हमने आपको प्रधानमंत्री बनाया है. ये कभी नहीं सोचा था कि सेनाएं हम पर इस तरह से अत्याचार करेंगी. प्लीज संविधान की रक्षा करें और हमें शांतिपूर्वक दिल्ली की ओर जाने दें. यह हमारा अधिकार है." 

किसान क्यों कर रहे विरोध-प्रदर्शन?

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किसानें और सरकार के बीच एमएसपी की मांग को लेकर हुई चार दौर की वार्ता बेनतीजा रही.  केंद्र सरकार ने कपास, मक्का, मसूर, अरहर और उड़द यानी 5 फसलों पर MSP देने का प्रस्ताव किसानों को दिया था, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव खारिज कर दिया. किसान सभी फसलों पर  MSP गारंटी देने की मांग कर रहे हैं. इन मांगों को लेकर ही किसान एक बार फिर दिल्ली कूच को तैयार हैं. 
 

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