दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने फर्जी GST और VAT कंपनियों के जरिए किए जा रहे बड़े टैक्स घोटाले का खुलासा किया है. जांच में सामने आया है कि संगठित गिरोह आम लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनियां बना रहा था और बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये की लेयरिंग कर टैक्स चोरी को अंजाम दे रहा था. इस पूरे मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.
पहला मामला: फर्जी ट्रांजैक्शन से करोड़ों का घोटाला
यह केस तब सामने आया जब कारोबारी यश्वी शर्मा ने शिकायत की कि उनकी फर्म 'स्वास्तिक एंटरप्राइजेज' के GST और VAT क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग किया जा रहा है. जांच में पता चला कि कंपनी के बैंक खातों से करोड़ों रुपये अलग-अलग फर्मों में ट्रांसफर किए गए. EOW के मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया बेहद सुनियोजित थी, जिसमें पैसों के असली स्रोत और लाभार्थियों को छिपाने के लिए कई डमी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया.
CA की भूमिका: फर्जी कंपनियों का नेटवर्क
जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क को चलाने में चार्टर्ड अकाउंटेंट अतुल गुप्ता और दिवंगत प्रकाश गुप्ता की अहम भूमिका थी. आरोप है कि उन्होंने अपनी फर्म Ashok Atul & Co. के जरिए फर्जी कंपनियां और बैंक खाते संचालित करने में मदद की. इस मामले में राजीव कुमार परासर और CA अतुल गुप्ता को 12 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया और पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है.
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दूसरा मामला: नौकरी का झांसा देकर खोली फर्जी फर्म
दूसरे केस में लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया. शिकायतकर्ता अंकुश ने बताया कि उसके दोस्त पुनीत ने GST विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर उसके दस्तावेज लिए और उनसे R.K. Enterprises नाम की फर्जी कंपनी बना दी.
जांच में खुलासा हुआ कि इस फर्म के जरिए करीब 128 करोड़ रुपये का टर्नओवर दिखाया गया और लगभग 10 करोड़ रुपये का फर्जी ITC (Input Tax Credit) हासिल किया गया.
छापेमारी में बड़ा खुलासा
EOW ने दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में छापेमारी कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया. ये आरोपी गाजियाबाद, शाहदरा, दरियागंज और जामा मस्जिद इलाके से पकड़े गए. छापेमारी के दौरान पुलिस ने करीब 40 लाख रुपये नकद, 10 लाख से ज्यादा अतिरिक्त कैश, कई मोबाइल, लैपटॉप, फर्जी दस्तावेज, स्टांप और इनवॉइस और 2 कारें जब्त कीं. जांच एजेंसियों का मानना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से पूरे नेटवर्क की कड़ी जुड़ सकती है.
कैसे चलता था पूरा रैकेट?
बेरोजगार या आम लोगों को नौकरी/बिजनेस का लालच देकर उनके दस्तावेज लिए जाते थे. उन्हीं दस्तावेजों से फर्जी कंपनियां बनाई जाती थीं. इन कंपनियों के जरिए फर्जी बिलिंग और ट्रांजैक्शन दिखाए जाते थे. GST और ITC का गलत फायदा उठाकर रकम को कई खातों में घुमाया जाता था. इस प्रक्रिया को 'मनी लेयरिंग' कहा जाता है, जिससे असली पैसों का स्रोत छिपाया जाता है.
अब क्या? जांच का दायरा बढ़ा
दिल्ली पुलिस EOW अब इस पूरे सिंडिकेट के फाइनेंशियल ट्रेल की गहराई से जांच कर रही है.
- कितनी फर्जी कंपनियां जुड़ी हैं
- कितनी टैक्स चोरी हुई
- किन-किन राज्यों तक नेटवर्क फैला है
इन सभी पहलुओं पर जांच जारी है. शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क दिल्ली से बाहर भी फैल सकता है. यह मामला दिखाता है कि कैसे संगठित गिरोह फर्जी कंपनियों और आम लोगों के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर टैक्स फ्रॉड कर रहे हैं. EOW की कार्रवाई से इस सिंडिकेट का बड़ा हिस्सा सामने आया है, लेकिन असली नेटवर्क अभी पूरी तरह खुलना बाकी है.
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